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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण
22-दिसंबर-2013 20:03 IST

करीब 82 करोड़ लोगों को सस्‍ती दरों पर खाद्यान देने के लिए राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया
उद्योगों और किसानों के हित के लिए चीनी क्षेत्र को विनिमय और नियंत्रण से दूर रखना 2013 में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होना उपभोक्‍ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के लिए एक नई उपलब्‍ध‍ि है। मंत्रालय ने दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक कल्‍याण के इस कार्यक्रम से करीब 82 करोड़ लोगों के लिए सस्‍ती दरों पर खाद्यान पाने का कानूनी अध

 

 

2013 में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होना उपभोक्‍ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के लिए एक नई उपलब्‍ध‍ि है। मंत्रालय ने दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक कल्‍याण के इस कार्यक्रम से करीब 82 करोड़ लोगों के लिए सस्‍ती दरों पर खाद्यान पाने का कानूनी अधिकार होगा। उद्योगों और किसानों के हित के लिए चीनी क्षेत्र को अनियमित और अनियंत्रित करना मंत्रालय का एक अभूतपूर्व फैसला था। खाद्यान प्रबंधन को और सक्षम बनाने में 2013 में उठाए गए कई कदमों का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। केवल भंडारण क्षमता ही नहीं बल्‍कि भंडारण और आवाजाही क्षतियों में महत्‍वपूर्ण कमी की जाएगी।

 

 मंत्रालय द्वारा वर्ष के दौरान लिए गए महत्‍वपूर्ण फैसले और कदम निम्‍नानुसार है:-

 

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

 

     संसद द्वारा पारित होने के उपरांत सरकार ने राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को 10 सितम्‍बर, 2013 को अधिसूचित कर दिया, जिसका उद्देश्‍य लोगों को सस्‍ती दर पर पर्याप्‍त मात्रा में उत्‍तम खाद्यान्‍न उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिले और वे सम्‍मान के साथ जीवन जी सकें। इस कानून के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक तथा शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत तक की आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस प्रकार देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्‍या को इसका लाभ मिलेगा। पात्र परिवारों को प्रतिमाह पांच कि. ग्रा. चावल/गेहूं/मोटा अनाज 3/2/1 रुपये की रियायती दर पर मिल सकेगा। यह भी प्रावधान है कि अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) मे शामिल परिवारों को प्रति परिवार 35 कि. ग्रा. अनाज का मिलना पूर्ववत जारी रहेगा।

    

इस अधिनियम में महिलाओं एवं बच्‍चों को पौष्टिक आहार मुहैया कराने पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है। गर्भव‍ती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान तथा प्रसव के छ: माह के उपरांत भोजन के अलावा कम से कम 6000 रुपये का मातृत्‍व लाभ भी मिलेगा। 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे पौष्टिक आहार अथवा निर्धारित पौष्टिक मानदण्‍डानुसार घर राशन ले जा सकें। खाद्यान्‍न

 अथवा भोजन की आपूर्ति न हो पाने की स्थिति में, लाभार्थी को खाद्य सुरक्षा भत्‍ता दिया जाएगा। इस अधिनियम के जिला एवं राज्‍यस्‍तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्‍थापित करने का भी प्रावधान है। पारदर्शिता एवं उत्‍तरदायित्‍व सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्‍यक प्रावधान किए गए हैं।

 

इस अधिनियम में प्रावधान है कि इसके लागू होन के 365 दिन के अवधि के लिए, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएम) के अंतर्गत‍ सब्सिडीयुक्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने हेतु, पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा। हरियाणा, राजस्‍थान, दिल्‍ली और हिमाचल प्रदेश के 4 राज्‍यों में इस अधिनियम का कार्यान्‍वयन भी प्रारंभ हो गया है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत राज्‍यों को खाद्यान्‍न का आवंटन भी किया जा चुका है।   

 

चीनी क्षेत्र का विनियमन एवं नियंत्रण से परे करना

 

     चीनी क्षेत्र के विनियमन मुद्दे को लेकर गठित डॉ. सी रंगराजन समिति की सिफारिशों पर कार्यवाही करते हुए, सरकार ने चीनी क्षेत्र से प्रमुख विनियामक नियंत्रण हटाने का महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है। चीन‍ मिलों पर लेवी वाध्‍यता की शर्त समाप्‍त कर दी गई और सरकार ने देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएफ) के माध्‍यम से रियायती चीनी आपूर्ति जारी रखने के लिए 3000 करोड़ रुपये के करीब अतिरिक्‍त सब्सिडी का भार अपने ऊपर ले लिया है। इसी प्रकार खुली चीनी की बिक्री के लिए निधि प्रणाली को विनियमित करने की प्रवृत्ति को हटा दिया गया है और चीनी मिलें किसी प्रतिबंध के बगैर अपने नकदी प्रवाह संचालन के अनुसार योजना बनाने के लिए स्‍वतंत्र हैं। डीजीएफटी के पास पूर्व पंजीकरण को छोड़कर चीनी का निर्यात वस्‍तुत अब मुक्‍त है। ज‍बकि चीनी आयात पर 15 प्रतिशत की दर से युक्तिसंगत शुल्‍क लगता है।

      विनियामक तंत्र के हटाए जाने के बावजूद खुले बाजार में चीनी के मूल्‍य नियंत्रण में है। वस्‍तुत: 30 सितम्‍बर 2013 तक देश ने लगातार 3 गन्‍ना काल चकों में अतिरिक्‍त चीनी का उत्पादन किया है।

 

      सरकार ने चीनी सीजन 2013-14 के लिए बहुत आकर्षक उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) की घोषणा की है जो 210 रुपये प्रति क्विंटल 9.5 प्रतिशत रिकवरी और बेसिक रिकवरी पर प्रति 0.1 प्रतिशत अंक वृद्धि के अनुरुप 2.21 रु की अतिरिक्त बढ़ोतरी है। यह चीनी सीजन 2012-13 की आधार दर से 40 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। एफआरपी वह न्यूनतम मूल्य होता है जिससे कम पर चीनी मिलें, किसानों से गन्ना नहीं खरीद सकती।

 

      देश में चीनी के उत्‍पदन तथा चीनी की वसूली की मुख्‍य बाधाओं को पूरी तरह से समाप्‍त करने के दृष्‍ट‍ि से विभाग ने एक कार्यदल गठित किया है जिसने अपनी महत्‍वपूर्ण सिफारिशें दी हैं जिसे धीरे-धीरे कार्यान्‍वति की जाएगी। 

 

चीनी मिलों के लिए चीनी विकास कोष के तहत रियायती दरों पर ऋण गतिविधियां जारी रही और 30 नवम्बर 2013 तक चीनी मिलों को गन्ना विकास और विभिन्न गतिविधियों जैसे एथेनॉल उत्पादन एवं आधुनिकीकरण उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी के लिए चालू वित्त वर्ष में 383 करोड़ रुपये दिये गये।

 

वेब युक्‍त मॉड्यूल जो पूरी तरह से अब कार्यशील है। चीनी मिलों तथा विभाग के बीच उत्‍पादन संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान/माल प्रेषण/स्‍टॉक संबंधी जानकारी देने में सुविधा प्रदान करता है।

 

     

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए चीनी पर दी जाने वाली सब्सिडी राशि के वितरण के लिए एक उदार प्रक्रिया अपनायी गयी है। मौजूदा वित्त वर्ष में नयी प्रणाली के तहत अब तक राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को 685 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है।

     

खाद्यान प्रबंधन में सुधार

 

      एफसीआई की भंडार क्षमता और आवश्‍यकता उसके वसूली स्‍तर रक्षित तथा उपभोक्‍ता राज्‍यों की पीडीएस आवश्‍यकताओं पर निर्भर करती है। बढ़ती हुई वसूली तथा भंडारण जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए एफसीआई के पास इसकी स्‍थापना के समय से निर्माण एवं किराए के परिसरों के फलस्‍वरूप इसकी भंडारण क्षमता में भारी वृद्धि हुई है।

 

      वर्ष 2008-09 से पिछले कुछ वर्षों के दौरान खाद्यान की बढ़ी हुई वसूली के फलस्‍वरूप केंद्रीय पूर्व के भंडार स्‍तर में लगातार वृद्ध‍ि हो रही है। एफसीआई ने चुनौतियों पर तेजी से कार्रवाई की है और एफसीआई तथा राज्‍यों वसूली एजेंसियों के पास 31.10.2013 की स्थिति के अनुसार उपलब्‍ध भंडारण क्षमता 763.35 एलएमटी तक पहुंच गई है।

 

एफसीआई की भंडारण क्षमता 31.03.2008 में 238.94 एलएमटी से बढ़कर 31.10.2013 को 384.17 एलएमटी हो गई है। इसके अलावा, एफसीआई अगले 2 वर्षों में अपनी क्षमता में अनुमानत: 80-100 एलएमटी बढ़ोत्‍तरी करने पर कार्यरत है।

 

31.10.2013 को एफसीआई  की भंडारण क्षमता (निजी/किराए) पर तथ राज्‍य सरकारों/एजेंसियों (एफसीआई को सौंपी क्षमताओं को छोड़कर) का ब्‍यौरा इस प्रकार है:-

एफसीआई के द्वारा भंटारण क्षमता

राज्‍य सरकारों के पास (एफसीआई को किराए की क्षमता को छोड़कर) भंडारण क्षमता

कुल जोड़

आवृत्‍त

किराये

 पर

सीएपी

किराये पर

जोड़

आवृत्‍त

सीपीए

जोड़

 

129.98  

221.65  

26.36   

6.16     

384.17

215.57          

163.61  

379.18

763.35

आंकड़े (एलएमटी)

 

उपभोक्‍ता के अलावा, खा़द्यान्‍न के सुरक्षित भंडारण की क्षमता अढ़ाने की दृष्टि से एफसीआई/भारत सरकार द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं का ब्‍यौरा निम्‍नानुसार है:-

योजनागत स्‍कीम के अंतर्गत आवृत्‍त भंडारण क्षमता का निर्माण

 

एफसीआई की निजी क्षमता का निर्माण भारत सरकार द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत अनुमोदित योजनागत स्‍कीम के अधीन किया जाता है। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान एफसीआई द्वारा 610860 एफटी क्षमता के नये गोदामों के निर्माण का प्रस्‍ताव है व सीएएफ एंड पीडी मंत्रायल के भंडारण निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत प्‍लान योजनाधीन (534640 एफटीएनई  व 76220 एमटी अन्‍य)। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 के दौरान 4570 एमटी की क्षमता की भंडारण सुविधा पूरी हेा चुकी है।

 

प्राइवेट उद्यमी गारंटी (पीईजी) योजना के अंतर्गत अतिरिक्‍त क्षमता निर्माण

 

पीईजी योजना के अंतर्गत 19 राज्‍यों में विभिन्‍न स्‍थानों पर गोदामों के निर्माण के लिए 203.76 लाख एमटी क्षमता की मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें से 113.26 लाख एमटी की क्षमता के लिए निजी निवेशकों के टेंडरों को मंजूरी दी जा चुकी है तथा 7.79 लाख एमटी व 29.57 लाख एमटी क्षमता का आवंटन क्रमश: सीडब्‍ल्‍यूसएलडब्‍ल्‍यूसी को अपनी निजी भूमि पर गोदामों के निर्माण के (स्‍वीकृत/आवंटित कुल क्षमता 150.79 एलएमटी) का आवंटन किया गया है। 82.00 लाख एमटी की क्षमता पहले ही बनकर तैयार हो चुकी है। 

 

साइलोज के रूप में भंडारण सुविधाओं का आधुनिकीकरण

 

     7.2.2012 को सम्‍पन्‍न बैठक में मंत्री समूह ने देश भर में 20 लाख एमटी क्षमता वाले आधुनिक साइलों के निर्माण के प्रस्‍तावों को अनुमोदन कर दिया है। इन 20 लाख एम्‍टी साइलों का निर्माण पीईजी योजना के अंतर्गत पूर्व में मूल्‍यांकित भंडारण क्षमता/अनुमोदित क्षमता के प्रति किया जाएगा। एफसीआई के निदेशक-मंडल ने 20 लाख एमटी के साइलों की राज्‍यवार वितरण एवं स्थानों को अंतिम रूप दे दिया है।  

      एफसीआई द्वारा भारत के 9 राज्‍यों के 36 स्‍थानों पर 17.50 लाख एमटी की कुल क्षमता के लिए डीबीएफओओ के अंतर्गत प्रस्‍ताव मंगाने हेतु 21 नवम्‍बर 2013 को ई-टेण्‍डर आमंत्रित किए हैं।

 

      खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में कुल आवंटन अनुमानित 61.2 मिलियन टन है। इसके सापेक्ष एफसीआई तथा राष्‍ट्रीय वसूली एजेंसियों की कुल क्षमता करीब 76 मिलियन टन है। इसके अलावा पीईजी योजना/साइलोज के माध्‍यम से अगले 2 वर्षों के दौरान 8-10 मिलयिन टन की क्षमता बढ़ने की संभावना है। इस प्रकार भंडार क्षमता की समस्‍या को पर्याप्‍त रूप से हल कर लिया गया है।

 

वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का निर्माण

      

       खाद्यान्‍न के सुरक्षित भंडारण के लिए सभी एफडीआई के गोदाम बीआईएस कोड तथा सीपीडब्‍ल्‍यूडी विशिष्‍टताओं के अनुसार निर्मित होते हैं। इसके अलावा, एफडीआई ने दस वर्षों के किराए पर निजी उद्यमियों से आधुनिक वैज्ञानिक गोदामों का ही निर्माण सुनिश्चित किया है। इस प्रयोजनाओं एमटीएफ (मॉडल टेंडर फार्म) में ही तकनीकी विशिष्‍टताओं का उल्‍लेख किया गया है। निर्माण की अवस्‍थाओं में इन गोदामों का निरीक्षण किया गया है ताकि तय विशिष्‍टताओं का कोई उल्‍लंघन न हो सके।

      साथ ही, सभी गोदामों को सुपरिभाषित राष्‍ट्रीय मानकों तक लाने के लिए भौतिक ढांचे के उन्‍नयन हेतु कार्य योजना तैयार की गई है। वित्‍तीय वर्ष 2013-14 के दौरान 80 डिपो को उन्‍नयन के लिए चुना गया है। उन्‍नयन की प्रक्रिया में पुरानी एसीसी/सीजीआई शीरों को परतयुक्‍त प्रोफाइल चादरों से छत बदलना, क्षतिग्रस्‍त बिट्मन सड़कों के स्‍थान पर सीमेंट कन्‍कीड सड़क का निर्माण, सड़क की बिट्मन के ऊपरों सतह का पुर्नानिर्माण तथा बाडण्‍ड्रों दीवार आदि में सुधार करना।

      उन्‍नयन के लिए वित्‍तीय वर्ष 2013-14 के दौरान अंचल/क्षेत्रवार आवं‍टित बजट का ब्‍यौरा निम्‍नानुसार है:-

डिपो का उन्‍नयन सीमेंट कंकीट को छोड़कर

80 करोड़ रुपये

क्षतिग्रस्‍त बिट्मन सड़क के स्‍थान पर सीमेंट/कंकीट सड़क बनाना

75 करोड़ रुपये

 

      31-10-2013 की स्थिति अनुसार 17 डिपो का उन्‍नयन कर दिया गया है तथा अन्‍य डिपुओं पर कार्य प्र‍गति पर है।

 

भंडारण एवं आवाजाही क्षतियों में कमी करना

 

भंडारण क्षतियां:

 

      भंडारण क्षति का तब पता चलाता है जब खाद्यान्‍न की खेप पूर तरह से जारी हो जाए अथवा समाप्‍त हो जाए। यह बही के अनुसार स्‍टॉक शेष तथा भौतिक स्‍टॉक शेष के बीच अंतर की द्योतक होती है। महीने के दौरान कुल नष्‍ट हुए स्टॉक के वजन में से वस्‍तुवार  नष्‍ट हुए वजन के आधार पर क्षति की प्रतिशत का पता चलता है।

      ग‍त 2 वर्षों तथा 2013-14 के लिए भंडारण की प्रवृत्ति की तुलनात्‍मक स्थिति इस प्रका है:-

वर्ष

गेहूं

चावल

गेहूं-चावल

2011-12    

-0.11 

0.52 

0.23 

2012-13    

-0.19

0.57 

0.27 

2013-14 (अक्‍तूबर 2013 तक)

-0.12

0.53 

0.33

 

प्रेषण वजन तथा प्राप्‍त वजन के अंतर से अभिप्राय है किसी एक केन्‍द्र से दूसरे केन्‍द्र के बीच स्‍टॉक के आवा-जाही के दौरान क्षति का होना है।

      गत 2 वर्षों एवं 2013-14 के लिए प्रेषण-क्षति की प्रतिशत वार तुलनात्‍मक प्रवृत्ति इस प्रकार है:-

वर्ष

गेहूं

चावल

गेहूं-चावल

2011-12

0.35

0.61

0.48

2012-13

0.39

0.67

0.52

2013-14 (अक्‍तूबर 2013 तक)

0.43

0.65

0.54

 

·        वर्ष 2011-12 ऑडिट आंकड़े हैं।

·

·        2012-13 और 2013-14 के आंकड़े अस्‍थायी हैं।

 

खाद्यान के भंडारण एवं प्रेषण के दौरान सुरक्षा के लिए किए गए उपाए

 

·               खाद्यान के भंडारण के वैज्ञानिक मानदंडों में क्षतियों का निर्धारण करने के लिए अध्‍ययन दायित्‍व सौंपा गया है।

·         गेहूं और चावल के भंडारण के लिए मंत्रालय द्वारा तदर्थ मानदंड तय किए गए हैं।

·        अतिरिक्‍त आवृत्‍त्‍ भंडारण क्षमता का सृजन/किराए पर व्‍यवस्‍था करना।

·        असंगत क्षतियों के लिए उत्‍तरदायी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्‍मक कार्रवाई।

·        भंडारण के भौतिक स्‍टाक विशेष जांच के औचक/दस्‍ता निरीक्षण।

·        स्‍टाक जारी करने/भेजने में एफआई एफओ के मानकों का पालन करना।

·        भंडारण एवं पारगमन में होने वाले नुकसान की प्रवृत्‍त‍ियों की नियमित सुरक्षा करना।

·        क्षति के दोषी पाए जाने वाले परिवहन ठेकदारों की जवाबदेही तय करना और उनसे नुकसान की वसूली करना।

·        नियमित वार्षिक/तिमाही पी बी के अतिरिक्‍त शून्‍य पी बी हासिल करना।

 

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वि.कासोटिया/एसआर/डीके/एम/आरके/एमके-02