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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
09-जुलाई-2014 13:28 IST

बुनियादी ढांचे, लोहा और इस्‍पात, टैक्‍सटाइल्‍स, विमानन और खनन क्षेत्रों के लिए त्‍वरित पहल

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वित्‍तीय स्थिरता रिपोर्ट दिसम्‍बर-2013 में पांच क्षेत्रों- बुनियादी ढांचे, लोहा और इस्‍पात, टैक्‍सटाइल्‍स, विमानन और खनन की प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचान की हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आमतौर पर ‘उद्योग’ क्षेत्र को विशेष रूप से ‘महत्‍वपूर्ण’ क्षेत्रों को अधिक वरीयता देते है। सर्वेक्षण में उल्‍लेख है कि बैंकों की एनपीए में बढ़ोतरी मुख्‍य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा एनपीए की प्रणाली आधारित पहचान को अपनाने, आर्थिक विकास में मंदी और विगत में विशेष रूप से अच्‍छे समय के दौरान भारी ऋण देने के मामलों में अपना रूख बदलने के कारण हुई। बैंकिंग प्रणाली में परि‍सम्‍पत्ति गुणता से विगत में खराब स्थिति हुई और बैंकों के समूह द्वारा सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में एनपीए और पुनर्गठित अग्रिम राशि पर अधिक ध्‍यान दिया गया।

बढ़ते हुई एनपीए को रोकने के लिए सरकार द्वारा हाल में जो प्रयास किये गये है, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं –

• बैंकों में वसूली के लिए उनके मुख्‍यालय/क्षेत्रीय कार्यालय/प्रत्‍येक ऋण वसूली ट्रिब्‍यूनल (डीआरटी) में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति।

• बैंकों द्वारा घाटे की परि‍सम्‍पत्तियों की वसूली पर जोर और परि‍सम्‍पत्ति पुनर्गठन कंपनियां संकल्‍प एजेंटों की नियुक्ति।

• राज्‍य स्‍तर के बैंकरों की समितियों को राज्‍य सरकारों के साथ होने वाले मामले सुलझाने के लिए सक्रिय होने के निर्देश देना।

• बैंकों में जानकारी साझा करने के आधार पर नये ऋण स्‍वीकृत करना।

• एनपीए का क्षेत्र/गतिविधि के आधार पर विश्‍लेषण करना आदि।

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विजयलक्ष्मी /अर्चना/इंद्रपाल/मनीषा/ यादराम/ तनेजा/ पंकज/प्रवीन/हरीश/ शदीद/सुनील/दयाशंकर/ गीता/विनोद -14