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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए)
12-सितम्बर-2017 19:30 IST

त्‍वरित, विश्‍वसनीय और सुरक्षित रेल सेवा प्रदान करने के लिए दौंड-मनमाड रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को स्‍वीकृति

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने 247.5 किमी लम्‍बी दौंड-मनमाड रेल लाइन की दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी दे दी है। परियोजना पर 2,081.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी और 5 प्रतिशत सालाना की दर से लागत वृद्धि के साथ इसके पूरा होने पर 2,330.51 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह परियोजना अगले पांच वर्षों में यानी 2021-22 तक पूरी होने की संभावना है।

इस रेल खंड के दोहरा हो जाने से न केवल माल और यात्री गाडि़यों के संचालन में तेजी आएगी, बल्कि भविष्‍य में रेल यातायात में बढ़ोतरी को देखते हुए अतिरिक्‍त क्षमता भी उपलब्‍ध होगी और इससे अधिक तेज एवं विश्‍वसनीय रेल सेवाएं बिना देरी के उपलब्‍ध कराई जा सकेंगी। इससे यात्री और माल यातायात में बहुत आसानी हो जाएगी और दौंड-मनमाड रेल मार्ग में रेलगाडि़यों की भीड़-भाड़ कम करने में भी मदद मिलेगी। पुणे के रास्‍ते उत्‍तर भारत से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली रेलगाडि़यों के लिए यह रेलखंड अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। इसके साथ ही यह प्रसिद्ध शिरडी धाम और शनि-शिंगणापुर की तीर्थयात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी बहुत अहम है। यही नहीं, इस रेलमार्ग पर रेलगाड़ियों को उन्‍मुख कर देने से मुंबई में रेलगाडि़यों की भीड़-भाड़ भी कम हो जाएगी।

इसके पूरा हो जाने पर ब्‍लॉक्‍स के रखरखाव के लिए अधिक समय मिलने लगेगा। इसके अलावा, बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए भारत की रक्षा और सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा क्‍योंकि अहमदनगर दक्षिणी कमान, भारतीय सेना का एक प्रमुख टैंक बेस है।    

रेलमार्ग के दोहरीकरण से दौंड-मनमाड रेल लाइन के आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा क्‍योंकि उद्योगों के पास अपनी परिवहन आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक क्षमता उपलब्‍ध हो जाएगी। इतना ही नहीं, रेल लाइन के दोहरीकरण से रेल पर्यटन भी बढ़ेगा क्‍योंकि इससे शिरडी और शनि-शिंगणापुर की कनेक्टिविटी में सुधार होगा और तीर्थयात्रा यातायात में आसानी होगी। यहां यात्रा का सिलसिला पूरे साल जारी रहता है और हर वर्ष लाखों तीर्थ यात्री यहां पहुंचते हैं।

इस परियोजना से निर्माण अवधि के दौरान प्रत्‍यक्ष रोजगार के अवसर उत्‍पन्‍न होंगे और करीब 59.40 लाख दिहाडि़यों के बराबर रोजगार पैदा होगा। महाराष्‍ट्र के पुणे, अहमदनगर और नासिक जिलों को इस परियोजना से सीधा फायदा होगा। 

वर्ष 2014-15 के दौरान दौंड-मनमाड रेल खंड का क्षमता उपयोग 156 प्रतिशत था जिसमें मेंटिनेंस ब्‍लॉक भी शामिल है। इसके साथ ही मुंबई-चेन्‍नई मुख्‍य रेलमार्ग पर भीगवान-मोहोल तथा होटगी-गुलबर्गा रेल लाइनों का दोहरीकरण भी जारी है जिसके पूरा हो जाने से दौंड-मनमाड खंड पर रेल यातायात में जबरदस्‍त बढ़ोतरी होने की संभावना है। जाहिर है कि मौजूदा इकहरी रेल लाइन बढ़े हुए यातायात की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्‍त नहीं है जिस कारण यह रेलखंड एक तरह का गति अवरोधक बना हुआ है। दूसरी ओर क्षमता-उपयोग भी पहले ही अपनी अंतिम सीमा को छूने लगा है। अत: दौंड-मनमाड रेलखंड के बीच दोहरीकरण बहुत जरूरी हो गया है।       

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 वीएल/एजे/आरडब्‍ल्‍यू/पीकेए/पी 3750