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27-सितम्बर-2017 19:06 IST

विश्व पर्यटन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सतत पर्यटन वर्ष-2017

सतत पर्यटन के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया जा रहा है

 

विशेष लेख- विश्व पर्यटन दिवस

*पांडुरंग हेगडे

देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या 2016 के 6.8 प्रतिशत से बढ़कर जनवरी 2017 में 16.5 प्रतिशत हो गयी है। इसी प्रकार घरेलू पर्यटकों की संख्या में (2015 की तुलना में) 2017 में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट है कि एनडीए सरकार द्वारा लागू की गयी पर्यटन नीतियां सफल रही हैं।

विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि का कारण ऑनलाइन वीजा सुविधा उपलब्ध कराना है। यह सुविधा अब 180 देशों को उपलब्ध है। चिकित्सा और व्यावसायिक पर्यटकों के लिए ई-वीजा की सुविधा तथा ठहरने की अवधि को 30 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन कर देने की वजह से भी विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।

ताजमहल जैसे ऐतिहासिक इमारतों में ई-टिकट के लांच से, विशेष पर्यटन रेलगाडियों की सुविधा से तथा 24x7 पर्यटन हेल्पलाईन की सुविधा के कारण विदेश से पर्यटकों का आगमन बढ़ा है।

2015 की तुलना में 2017 में पर्यटन से अर्जित विदेशी मुद्रा में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2015 में यह 12000 करोड रुपये थी जो 2017 में बढ़कर 13,669 करोड रुपये हो गयी।

पर्यटन क्षेत्र के पास विदेशी मुद्रा कमाने की अपार क्षमता है। यह जीडीपी को बढ़ाने में भी योगदान दे सकता है। पर्यटन क्षेत्र 39.5 मिलियन लोगों को सेवा क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराता है। 2017-2018 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 5 विशेष पर्यटन जोन बनाने का प्रस्ताव दिया था जो राज्यों के सहयोग से विशेष उद्देश्य कंपनी (एसपीभी) के माध्यम से लागू किये जाएंगे। वित्त मंत्री ने पर्यटन द्वारा बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा था कि यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था को गुणात्मक रुप से प्रभावित करता है। मंत्री महोद्य ने पूरे विश्व में अतुल्य भारत 2.0 अभियान के शुभारंभ करने की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से भारत की विविधता को विश्व तक पहुंचाया है। देश की आध्यात्मिक विरासत की क्षमता का उपयोग करने के लिए उन्होंने देश की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक संबंध को विश्व के समक्ष प्रचारित करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र के सेवा क्षेत्र में शतप्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति प्रदान की ताकि पूरे देश में पर्यटन के लिए मूलभूत संरचना का विकास हो सके।

केन्द्र सरकार यात्रा और पर्यटन को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करती है। पर्यटकों को आर्कषित करने के लिए सरकार ने कई योजनाओं का शुभारंभ किया है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत पर्यटन केन्द्रों को स्वच्छ बनाया गया है जैसे वाराणसी में गंगा नदी के तट का पुनर्रुद्धार किया गया है। प्रधानमंत्री ने “स्वच्छ भारत, स्वच्छ स्मारक” का नारा दिया है। इसके तहत विरासत केन्द्रों को स्वच्छ रखने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

“आदर्श स्मारक”, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत ऐतिहासिक स्थलों में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

“स्वदेश दर्शन” पर्यटन मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत थीम आधारित पर्यटन सर्किट का विकास किया जाता है। इसके तहत देश में 13 पर्यटन सर्किटों का चयन किया गया है।

“प्रसाद” योजना के अंतर्गत, भारत में 25 महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की पहचान की गई है- अमरावती (आंध्र प्रदेश), अमृतसर (पंजाब), अजमेर (राजस्थान), अयोध्या (उत्तर प्रदेश), बद्रीनाथ (उत्तराखंड), द्वारका (गुजरात), देवघर (झारखंड), बेलूर (पश्चिम बंगाल), गया (बिहार), गुरूवायूर (केरल), हजरतबल (जम्मू और कश्मीर), कामख्या (असम), कांचीपुरम (तमिलनाडु), कटरा (जम्मू और कश्मीर), केदारनाथ (उत्तराखंड) मथुरा (उत्तर प्रदेश), पटना (बिहार), पुरी (ओडिशा), श्रीसैलम (आंध्र प्रदेश), सोमनाथ (गुजरात), तिरुपति (आंध्र प्रदेश), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश), वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और वेल्लंकनी (तमिलनाडु)।

सतत पर्यटन - विकास के लिए एक उपकरण

पर्यटन दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा निर्यात उद्योग है। इसके तहत 1.235 मिलियन पर्यटक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2017 को सतत पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया है। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत समावेशी आर्थिक विकास, स्थानीय समुदायों को अच्छे रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की समस्या के प्रति ध्यान और अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान का सम्मान को शामिल किया गया है।

इस प्रकार, पर्यटन विकास लोगों तथा विश्व के लिए समृद्धि का बेहतर अवसर प्रदान करता है। 2017 के विश्व पर्यटन दिवस का आदर्श वाक्य है- प्रकृति, संस्कृति और मेजबानों का सम्मान करना। सरकार एक नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति (एनटीपी) तैयार करने की प्रक्रिया में है। एनटीपी की मुख्य विशेषताएं समावेशी तरीका अपनाना, रोजगार सृजन करना और सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए पर्यटन का विकास करना है।

इसका उद्देश्य समृद्ध संस्कृति और विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए मेडिकल और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह कौशल विकास और आधारभूत संरचना के विकास पर भी बल देता है। यह देश की विविधता का अनुभव प्राप्त करने के लिए घरेलू और विदेशी पर्यटकों को प्रोत्साहन प्रदान करता है।

पर्यटन मंत्रालय ने सुरक्षित पर्यटन के लिए दिशा निर्देश जारी किये हैं। इसके अंतर्गत मौलिक मानव अधिकार और महिलाओं एवं बच्चों की शोषण से मुक्ति सुनिश्चित की गयी है।

आधारभूत संरचना की कमी के कारण पर्यटन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में कुछ समस्याएं हैं। जैसे सड़कों का अभाव और पर्यटकों के लिए स्वच्छ, आरामदायक प्रवास सुविधा की कमी। इसके निदान के लिए सरकार यात्री टर्मिनल को अपग्रेड कर रही है, पर्यटन स्थलों में कन्क्टिविटी प्रदान कर रही है, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करा रही है और पर्यटकों को सुविधा देने के लिए पर्यटन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क का निर्माण कर रही है।

भारत सांस्कृतिक, आधायत्मिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध है। इस संदर्भ में विश्व का कोई अन्य देश इसका मुकाबला नहीं कर सकता। विविध परंपराएं, जीवन पद्धतियां, रंगारंग मेले तथा हमारे पर्व त्यौहार घरेलू और विदेशी पर्यटकों को कई तरह के विकल्प प्रदान करते हैं।

भारत सरकार समावेशी विकास हेतु पर्यटन के उपयोग के प्रति न सिर्फ सचेत है बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ पर्यटन के लाभों को बांटने के लिए भी कृत संकल्प है। हमारे वन, जनजाति जीवन, सुंदर समुद्र तट, वन अभयारण्य और राष्ट्रीय पार्क पर्यटकों को देश की विविधता अनुभव करने का अतुल्य अवसर प्रदान करते हैं।

केन्द्रीय पर्यटन राज्य मंत्री श्री के.जे. अल्फोंस ने कहा है, “हमें भारत की विरासत, दर्शन और अविश्वसनीय विविधतापूर्ण विशेषताओं को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है जो अनुभव प्राप्त करने योग्य हैं।”

भारत सरकार पर्यटन के विकास के लिए उचित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और सतत पर्यटन के लक्ष्य की प्राप्ति हेतू एक रोडमैप प्रस्तुत कर रही है जो अंतर्राष्ट्रीय सतत पर्यटन वर्ष का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

 

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वीके/जेके/एमएम-183