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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
14-नवंबर-2017 13:42 IST

अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन के स्‍थापना समारोह के लिए बॉन, जर्मनी में आयोजित पूर्वावलोकन कार्यक्रम

अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के स्‍थापना समारोह के लिए कल बॉन, जर्मनी में पूर्वावलोकन कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

इस अवसर पर भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव श्री आनंद कुमार ने आशा व्‍यक्‍त की कि विकसित देश सकारात्‍मक कार्रवाई की भावना से विकासशील देशों की सौर ऊर्जा परियोजनाओं में विदेशी विकास सहायता (ओडीए) का प्रतिशत तय करेंगे। उन्‍होंने बताया कि बहुपक्षीय विकास बैंक और अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थान कम लागत के वित्‍त और अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी संस्‍थानों के जरिए विश्‍वभर की सौर परियोजनाओं को पूरी तरह से समर्थन प्रदान करने की कोशिश करते हैं ताकि सौर ऊर्जा तथा उसका भंडारण सभी की पहुंच में आ सके। श्री कुमार ने कॉरपोरेट और अन्‍य संस्‍थानों को भी सौर ऊर्जा विकास में समर्थन तथा हर संभव तरीके से सहायता करने के लिए आमंत्रित किया।

आईएसए की पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी का दृष्टिकोण है इसे याद करते हुए श्री कुमार ने एक बार फिर बल दिया कि भारत सरकार आईएसए को समर्थन देना जारी रखेगी। उन्‍होंने भारत की मिश्रित ऊर्जा विशेष रूप से 2022 तक 175 गीगावॉट की क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा हासिल करने की दिशा में सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने की योजना के बारे में भी बताया।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव श्री सी के मिश्रा ने सतत विकास लक्ष्‍यों के परिपेक्ष्‍य में सौर ऊर्जा की आवश्‍यकता को रेखांकित किया। उन्‍होंने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ ही इसकी भंडारण प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी, वित्‍त और क्षमता निर्माण की व्‍यवस्‍था करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्‍होंने सुझाव दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा के दोहन और ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा के इस्‍तेमाल के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्‍कता है।

आईएसए के अंतरिम महानिदेशक श्री उपेन्‍द्र त्रिपाठी ने जानकारी दी कि आईएसए 6 दिसंबर, 2017 को संधि आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन बन जाएगा। 44 देशों ने पहले ही आईएसए की संधि पर हस्‍ताक्षर कर दिए हैं तथा कई और देश इसमें शामिल होने के लिए तैयार है। वे आईएसए के चल रहे तीन कार्यक्रमों: ये सौर ऊर्जा के लिए किफायती वित्‍त सुविधा उपलब्‍ध कराना, कृषि के लिए सौर उपायों का प्रयोग बढ़ाना और सदस्‍य राष्‍ट्रों में सौर मिनी ग्रिड को बढ़ावा देना में बोल रहे थे। इस दौरान आईएसए सामान्‍य जोखिम न्‍यूनीकरण प्रक्रिया (सीआरएमएम) परियोजना पर भी चर्चा की गई, जिसका उद्देश्‍य विकासशील देशों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के जोखिम को कम कर इस क्षेत्र में कोष के प्रवाह को बढ़ाना है।

इस अवसर पर फ्रांस सरकार की ओर से आईएसए के कार्यान्‍वयन के लिए विशेष दूत महामहिम सिगोलिन रॉयल ने वैश्विक स्‍तर पर सौर ऊर्जा के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के पांच महत्‍वपूर्ण बिंदुओं पर बल दिया। ये बिंदु हैं - मजबूत लक्ष्‍य तय करना, सामान्‍य उपकरण विकसित करना तथा उनका लाभ उठाना, परियोजनाओं को बढ़ावा देना, विकेंद्रीकृत पीवी समाधान तैयार करना और पूरक क्षमताओं के आधार पर पूंजी निवेश करने के लिए नई साझेदारी करना।

आईएसए का शुभारंभ 30 नवंबर, 2015 को पेरिस, फ्रांस में 21 पक्षों के यूएनएफसीसीसी सम्‍मेलन (सीओपी 21) के अवसर पर संयुक्‍त रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी तथा फ्रांस के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति महामहिम फ्रांस्‍वा ओलांद द्वारा किया गया था। आईएसए उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पूरी तरह या आंशिक रूप से स्थित 121 संभावित सौर-संपन्न सदस्य राष्ट्रों का संधि-आधारित गठबंधन है। इसका उद्देश्‍य विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा के विकास और इस्‍तेमाल को बढ़ावा देना है।

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वीके/एमके/एसके- 5422