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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
13-फरवरी-2018 20:16 IST

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने भारतीय चिकित्‍सा परिषद (एमसीआई) के स्क्रीनिंग परीक्षा नियमावली 2002 में संशोधन के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी

अब विदेश में चिकित्‍सा-अध्‍ययन के लिए एनईईटी में उत्‍तीर्ण होना अनिवार्य होगा

देश में सभी मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए राष्‍ट्रीय प्रवेश परीक्षा (राष्‍ट्रीय योग्‍यता व प्रवेश परीक्षा) को अनिवार्य बना दिया गया है। विदेशों में चिकित्‍सा की पढ़ाई करके प्रारंभिक चिकित्‍सा योग्‍यता (एमबीबीएस) की डिग्री प्राप्‍त करने के पश्‍चात भारतीय छात्रों को देश में प्रैक्टिस शुरू करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेज्‍युएट एग्‍जाम (एफएमजीई) में सफल होना होगा। यह संज्ञान में आया है कि विदेशी चिकित्‍सा संस्‍थान/विश्‍वविद्यालय भारतीय छात्रों का नामांकन करने के पहले उचित आकलन नहीं करते हैं या स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट नहीं लेते हैं। इस कारण बहुत से छात्र स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट में असफल हो जाते हैं।

इस संबंध में भारतीय चिकित्‍सा परिषद ने स्‍क्र‍ीनिंग टेस्‍ट नियमावली 2002 में संशोधन करने का प्रस्‍ताव दिया है। इसके अन्‍तर्गत विदेश में चिकित्‍सा पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए एनईईटी में सफल होना अनिवार्य बनाया गया है।

भारतीय नागरिक/विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिक जो विदेश में चिकित्‍सा की पढ़ाई करना चाहते हैं उन्‍हें मई 2018 के पश्‍चात एनईईटी परीक्षा में अनिवार्य रूप से सफल होना होगा। इन व्‍यक्तियों के लिए एनईईटी का परीक्षाफल योग्‍यता प्रमाण पत्र के समान माना जाएगा।

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वीके/जेके/आरएन–6670