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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
राष्ट्रपति सचिवालय
14-अप्रैल-2018 19:58 IST

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द जी का ‘डॉ. बाबा साहब आंबेडकर व्यक्ति नहीं, संकल्प’ पुस्तक की पहली प्रति स्वीकार करने के अवसर पर सम्बोधन

  1. आज भारत-रत्न बाबा साहब डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर की 127वीं जयंती के दिन मैंने प्रात: काल दिल्ली में संसद भवन में उनकी प्रतिमा पर सभी देशवासियों की ओर से उनको नमन किया। उसके बाद महू में उनकी पवित्र जन्म-स्थली पर जाने का सौभाग्य प्राप्त किया। और अब यहां बाबा साहब से संबन्धित प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विचारों के इस संकलन की पहली प्रति को स्वीकार करके मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है।
  2. नब्बे पृष्ठों की यह छोटी सी पुस्तक गागर में सागर की तरह है। आज जो विचार मैं आपसे साझा करूंगा वे इसी पुस्तक पर आधारित हैं।
  3. ऐसा ठीक ही कहा जाता है कि तस्वीरें बोलती हैं और एक तस्वीर हजारों शब्दों से अधिक बोलती है। इस पुस्तक के भीतरी पन्नों में छपी पहली और आखरी तस्वीरें, तथा अन्य बहुत से चित्र यह दिखलाते हैं कि पूर्व में गुजरात के मुख्यमंत्री और आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी डॉक्टर आंबेडकर के परम अनुयायी हैं और संविधान के पुजारी हैं। उस संविधान के, जो डॉक्टर आंबेडकर की भारत को देन है। प्रधानमंत्री, बाबा साहब के ‘विजन’ को साकार करने में पूरी निष्ठा के साथ तत्पर हैं। 
  4. इस पुस्तक से पता चलता है कि श्री नरेंद्र मोदी जी विद्यार्थी जीवन से ही डॉक्टर आंबेडकर के आदर्शों के प्रति निष्ठावान रहे हैं। अपने सार्वजनिक जीवन में वे हमेशा उन्ही आदर्शों को कार्यरूप देते रहे हैं।
  5. इस पुस्तक में संकलित विचार यह स्पष्ट करते हैं कि डॉक्टर आंबेडकर के ‘विजन’ को ठोस रूप देना ही आज भारत सरकार के काम-काज का उद्देश्य है।
  6. डॉक्टर आंबेडकर ने ऐसे समाज की कल्पना की थी जहां आखरी छोर पर बैठे पीड़ित, शोषित, वंचित, गरीब, किसान, मजदूर और विशेषकर महिलाओं को सबके साथ बराबरी का हक और सम्मान मिले। वे शांति, अहिंसा और सौहार्द के साथ सभी मुद्दों का समाधान करने के हिमायती थे। यही रास्ता बंधुता, समता, ममता और समरसता की भावना को मजबूत बनाता है।
  7. इस पुस्तक में समरसता के अर्थ को बहुत ही अच्छे ढंग से समझाया गया है। ‘सम-भाव’ अर्थात ‘बराबरी का भाव’ और ‘मम-भाव’ अर्थात ‘अपनेपन का भाव’ को जोड़ देने से समरसता का भाव पैदा होता है।
  8. इस पुस्तक में कहा गया है कि आज समर की नहीं, समरसता की जरूरत है। सामाजिक मुद्दों पर राजनीति करने से समाज का अहित होता है। स्वार्थ की राजनीति में समाज को समर-भूमि बनाने की नुकसानदेह प्रवृत्ति पाई जाती है। जोड़ने के बजाय तोड़ने की मानसिकता काम करने लगती है। बाबा साहब के सपनों का भारत बनाने के लिए जातिवाद से मुक्त होना ही पड़ेगा क्योंकि जातिवाद तोड़ने का काम करता है। आर्थिक विकास के लिए ही नहीं बल्कि हर प्रकार की सुख-शांति के लिए सोशल हारमोनी यानि सामाजिक सौहार्द जरूरी है।
  9. बाबा साहब बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे और राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान भी बहु-आयामी हैं। वे एक शिक्षाविद, अर्थ-शास्त्री, विधिवेत्ता, पत्रकार, समाज-शास्त्री और संविधानवादी थे। सबसे बढ़कर वे एक कर्मठ समाज-सुधारक थे। हमारी बैंकिंग, इरिगेशन, इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम, लेबर मैनेजमेंट सिस्टम, रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम, आदि सभी क्षेत्रों पर डॉक्टर आंबेडकर के योगदान की छाप है। सबसे बढ़कर, हमारा संविधान तो उनकी प्रमुख देन है ही।
  10. डॉक्टर आंबेडकर केवल वंचितों के नेता नहीं हैं। उनकी विरासत के साथ न्याय करना जरूरी है। इस दिशा में अब प्रयास हो रहा है। मार्टिन लूथर किंग की तरह बाबा साहब विश्व-मानव हैं। सौ से भी अधिक देशों ने सन 2016 में संयुक्त राष्ट्र संघ में उनकी जयंती मनाई।  
  11. इस पुस्तक से पता चलता है कि गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में श्री नरेंद्र मोदी जी ने सामाजिक योगदान के लिए ‘वीर माया सम्मान’ नाम के पुरस्कार की शुरुआत की थी। लगभग एक हजार साल पहले, उस समय गुजरात की राजधानी पाटन में, मेघमाया नाम के एक वंचित वर्ग के वीर युवा ने लोक-कल्याण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बाबा साहब ने इसका विवरण अपने पत्र ‘मूक नायक’ के संपादकीय में दिया था।
  12. इस पुस्तक में बाबा साहब के जीवन से जुड़े पावन स्थलों के सचित्र विवरण हैं। ये पंच-तीर्थ हैं महू में उनकी जन्म-भूमि, नागपुर में उनकी दीक्षा-भूमि, दिल्ली में उनका महा-निर्वाण स्थल, मुंबई में चैत्य-भूमि और लंदन में ‘आंबेडकर मेमोरियल होम’।  
  13. इस प्रकार, इस पुस्तक से यह स्पष्ट होता है कि डॉक्टर आंबेडकर के जीवन और विचारों को प्रधानमंत्री ने बहुत गहराई से समझा है और महसूस किया है तथा वे भावना के स्तर पर जुड़कर डॉक्टर आंबेडकर के आर्थिक और सामाजिक सुधार के विचारों को साकार करने में लगे हुए हैं।
  14. यह बहुत ही खुशी की बात है कि इस छोटी सी पुस्तक में बाबा साहब के प्रेरक जीवन तथा उनकी गहरी सोच के सभी आयामों को और उन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विचारों को भी समाहित कर दिया गया है। इस पुस्तक के रूप में बाबा साहब को समझने का एक अच्छा और सरल स्रोत उपलब्ध हो गया है। इसके लिए मैं इस पुस्तक के संपादक श्री किशोर मकवाणा जी की प्रशंसा करता हूं। साथ ही मैं इस पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई देता हूं। मैं चाहता हूं कि इस पुस्तक में संकलित विचार अधिक-से-अधिक देशवासियों तक पहुंचें ताकि समरसता और सौहार्द के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ने की भावना और मजबूत बने।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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अतुल कुमार तिवारी/ कंचन पतियाल