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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
गृह मंत्रालय
14-सितम्बर-2018 15:54 IST

हिंदी दिवस समारोह का आयोजन

उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडु ने राजभाषा में उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए मंत्रालयों/विभागों को पुरस्‍कृत किया

गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से आज नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्‍य अतिथि उपराष्‍ट्रपति श्री वेंकैया नायडु ने विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों के प्रमुखों को राजभाषा कार्यान्‍वयन में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु पुरस्‍कृत किया गया। पुरस्‍कार विजेताओं को शील्‍ड तथा प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने की और गृह राज्‍य मंत्री श्री हंसराज गंगाराम अहीर तथा श्री किरेन रिजिजू भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों/उपक्रमों मंत्री, सांसद तथा वरिष्‍ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में उपराष्‍ट्रपति श्री वेंकैया नायडु ने कहा कि मातृभाषा आंख होती है जबकि पराई भाषा चश्‍मा। यदि आंख ही नहीं होगी तो चश्‍मे का क्‍या महत्‍व रह जाता है। श्री नायडु ने जीवन में पांच चीजों की महत्‍ता बताते हुए कहा कि हमें मां, जन्‍मभूमि, मातृभाषा, मातृदेश तथा गुरू का हमेशा ध्‍यान रखना चाहिए और आवश्‍यकता पडने पर इन पांचों की सेवा के लिए तत्‍पर होना चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य  होनी चाहिए ताकि उच्‍च शिक्षा अपनी भाषा में मिलने में आसानी हो सके। उनका कहना था कि हिंदी के बिना हिंदुस्‍तान में आगे बढना संभव नहीं है लेकिन हिंदी ज्ञान परस्‍पर सहभागिता से सभंव किया जाना चाहिए। उन्‍होंने भाषाई सद्भाव की दृष्टि से उत्‍तर भारत के लोगों को दक्षिण की एक भाषा तथा दक्षिण के लोगों को उत्‍तर भारत की एक भाषा सीखने का भी सुझाव दिया।

श्री वेंकैया नायडु ने बताया कि विदेशों से आने वाले गणमान्‍य व्‍यक्ति अपनी ही भाषा में बात करते हैं और गौरव की अनुभूति करते है। हमें इस बात को समझना होगा और अपने जीवन में अपनाना होगा। किसी भी देश का अपनी भाषा में बात करना आवश्‍यक होता है और भाषा राज-उत्‍सवों से नहीं बल्कि जन-सरोकारों से समृद्ध होती है। हिंदी को अन्‍य भारतीय भाषाओं से समृद्धि मिलती है और उसे कार्यालयों से निकालकर जनभाषा बनाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी भाषा के उत्‍थान के लिए महात्‍मा गांधी का योगदान अतुलनीय है।

श्री वेंकैया नायडु ने कहा कि वह कभी कान्‍वेंट नहीं गए और प्रधानमंत्री नरेन्‍द मोदी समेत कई वरिष्‍ठ लोग कान्‍वेंट की ओर भी नहीं गए परंतु आज वह पूर्णतया सफल हैं इसलिए कान्‍वेंट से प्राप्‍त शिक्षा को सफलता का आधार मानने वालों को अपनी मानसिकता में बदलाव लाने की आवश्‍यकता है। श्री वेंकैया नायडु ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं समृद्ध हैं। उनका अपना साहित्‍य, शब्‍दावली तथा अभिव्‍यक्‍तियां एवं मुहावरे हैं। इन सभी भाषाओं में भारतीयता की एक आतंरिक शक्‍ति भी है। भले ही हमारी भाषाएं अलग-अलग हों, इन्हें बोलने वाले लोग देश के अलग-अलग भागों में रहते हों, पर ये सभी भाषाएँ भावनात्मक रूप से हमारी साझी धरोहर हैंI इससे हमारी राष्‍ट्रीय एकता और मजबूत होगी तथा भारत की विविध संस्‍कृति को बेहतर रूप में अभिव्‍यक्‍त किया जा सकेगा। हिंदी को केवल बोलचाल के स्‍तर पर ही संपर्क भाषा नहीं बनना है, बल्‍कि कला और साहित्‍य के स्‍तर पर भी यह दायित्‍व निभाना है।

उनका कहना था कि यह आवश्‍यक है कि शासन का कामकाज आम जनता की भाषा में किया जाए। यदि हम चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र निरंतर प्रगतिशील रहे, और अधिक मजबूत बने तो हमें संघ के कामकाज में हिंदी का तथा राज्‍यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का ही प्रयोग करना होगा। हिंदी को उसके वर्तमान स्‍वरूप तक पहुंचाने में देश के सभी प्रदेशों का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है।

      कार्यक्रम में गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भाषा अनंत काल से मानवीय अस्मिता का महत्वपूर्ण अंग रही है और यह अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी है। हिंदी दिवस की उपयोगिता पर श्री राजनाथ सिंह का कहना था कि आज का दिन इस बात का मूल्‍यांकन करने का है कि देश-विदेश में हिंदी भाषा, सहित्‍य ने कौन सी मंजिलें तय की हैं और आज का दिन यह विमर्श करने का अवसर प्रदान करता है। उन्‍होंने बताया कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी ने कहा था “भारतीय संस्कृति एक विकसित शत दल कमल की तरह है जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी हमारी प्रादेशिक भाषाएँ हैं। किसी भी एक पंखुड़ी के नष्ट होने से कमल की शोभा नष्ट हो जाएगी। मैं चाहता हूँ कि प्रादेशिक भाषाएं रानी बनकर प्रान्तों में विराजमान रहें एवं इनके बीच हिंदी मध्यमणि बन कर विराजती रहेI” श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्वीटर पर हिंदी में अपना अकाउंट बनाया और हिंदी भाषा में ही पहला ट्वीट किया। पहले ट्वीट में लिखा संदेश पढ़कर हर भारतीय का, सभी हिंदी प्रेमियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इतना ही नहीं  संयुक्त राष्ट्र संघ  ने फेसबुक पर भी हिंदी पेज बनाया है ।

      राजभाषा विभाग द्वारा तकनीकी दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उपराष्ट्रपति के कर कमलों से ‘‘लीला हिंदी प्रवाह’’ का लोकार्पण किया जाना हर्ष का विषय हैI हिंदी की वैश्विक रूप से मजबूत होती स्थिति पर खुशी दर्शाते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हिंदी बाजार की आवश्‍यकता बन चुकी है।

कार्यक्रम में गृह राज्‍य मंत्री श्री गंगाराम अहीर का कहना था कि सरकार और जनता के बीच वही भाषा प्रभावी एवं लोकप्रिय हो सकती है जो आसानी से सभी को समझ में आ जाए और बेझिझक जिसका प्रयोग देश के सभी वर्गों द्वारा आसानी से किया जा सके। हिंदी मातृभाषा ही नहीं बल्कि संस्‍कृति की भी प्रतीक है। हमारा लोकतंत्र तभी फल-फूल सकता है जब हम जन-जन तक उनकी ही भाषा में उनके हित की बात पहुंचाएं क्योंकि हमारे लोकतन्त्र का मूलमंत्र ‘सर्वजन हिताय’ है। सशक्‍त व्‍यापक राष्‍ट्रीय आधार प्रदान करने में तथा देश के एक कोने से दूसरे कोने के बीच सांस्‍कृतिक सेतु बनाने में हिंदी एवं अन्‍य भारतीय भाषाओं का बहुत महत्‍व हैI

      कार्यक्रम में अतिथियों का स्‍वागत करते हुए श्री किरेन रिजिजू का कहना था कि हिंदी व उससे संबंधित संसाधनों के विकास, प्रयोग तथा प्रचार – प्रसार की दिशा में विभिन्न स्तरों पर प्रयास निरंतर जारी हैं। हिंदी और अन्य अभी भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध हैI विगत कुछ समय से हिंदी के अनेक ई–टूल्स विकसित किए गए हैं, जिनसे कम्प्यूटर और प्रौद्योगिकी में हिंदी का प्रयोग सरल और व्यापक हुआ हैI अब यह हम सभी लोगों का उत्तरदायित्व है कि हम इन सुविधाओं के प्रति जागरूक बनें और अपने सरकारी और गैर-सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग करें। आज जरूरत इस बात की है कि व्यावहारिक व प्रचलित सरल हिंदी का सरकारी कामकाज में ज़्यादा से ज़्यादा प्रयोग किया जाए।

इस मौके पर राजभाषा विभाग द्वारा सी-डैक के सहयोग से तैयार किये गये ‘लीला-हिंदी प्रवा‍ह’ के एप का लोकार्पण भी किया गया। हिंदी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कार्मिकों के साथ-साथ जनसाधारण को भी हिंदी भाषा का उच्चतर ज्ञान कराने हेतु ‘लीला हिंदी प्रवाह’ तैयार किया गया है। इस ऐप से देश भर में विभिन्‍न भाषाओं के माध्‍यम से जन सामान्‍य को हिंदी सीखने में सुविधा और सरलता होगी तथा हिंदी भाषा को समझना, सीखना तथा कार्य करना संभव हो सकेगा। सचिव राजभाषा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार व्‍यक्‍त किया तथा सभी पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी सम्मेलन, मॉरिशस में लोकर्पित हुए स्मृति आधारित टूल ‘कंठस्थ’ की लघु फिल्म के माध्यम से दर्शकों को विस्तृत जानकारी दी गई ।   

      हिंदी भाषा के देशव्‍यापी प्रसार और स्‍वीकार्यता को देखते हुए 14 सितंबर, 1949 को इसे संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया था । इस दिवस की स्‍मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए, हिंदी सप्‍ताह/पखवाड़ा/माह का आयोजन किया जाता है । इस क्रम में राजभाषा  विभाग, गृह मंत्रालय प्रत्‍येक वर्ष हिंदी दिवस समारोह का आयोजन करता है जिसमें वर्ष भर के दौरान राजभाषा हिंदी में उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु राजभाषा गौरव और राजभाषा कीर्ति पुरस्‍कार के अंतर्गत विभिन्‍न वर्गों में पुरस्‍कार दिये जाते हैं।     

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वीके/आरकेएम/एएम/जीआरएस-10214