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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
15-सितम्बर-2018 16:09 IST

वित आयोग 17 सितंबर से महाराष्ट्र के दौरे पर, अंतःराज्यीय असमानता एवं शहरीकरण से संबंधित मुद्वों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

भारत सरकार का 15वां वित आयोग 17 सितंबर से 19 सितंबर, 2018 तक महाराष्ट्र के दौरे पर जाएगा। अध्यक्ष श्री एन के सिंह के नेतृत्व में आयोग सदस्यों-श्री शक्तिकांत दास, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. अशोक लाहिड़ी, डॉ. रमेश चंद एवं सचिव श्री अरविंद मेहता एवं अन्य अधिकारियों के साथ मुंबई में मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों एवं राज्य के अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करेगा। राज्य से संबंधित मुद्वों को समझने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, व्यापार एवं उद्योग के प्रतिनिधियों, शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थानों के साथ बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

आयोग की क्षेत्र से संबंधित मुद्वों को समझने के लिए अगस्त महीने में पुणे में अर्थशास्त्रियों के साथ भी परामर्श बैठक हुई थी। अपना दौरा आरंभ करने से पहले आयोग ने नई दिल्ली में महाराष्ट्र के महालेखापाल से राज्य की वित्तीय स्थिति एवं सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित मुद्वों एवं विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

महाराष्ट्र भारतीय संघ के उच्च आय राज्यों में एक है। यह एक अग्रणी औद्योगिक राज्य है तथा भारत के सबसे शहरीकृत राज्यों में से एक है। महाराष्ट्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देता है। तथापि, उच्च अंतः क्षेत्रीय विषमता आरंभ से ही राज्य में व्याप्त है। राज्य अपनी उच्च आर्थिक विकास गति को मानव विकास के अनुरूप ढालने में विफल रहा है।

 

जिन प्रमुख मुद्वों पर आयोग ध्यान केंद्रित करेगा:

 

  • राज्य 2009-13 से 2014-17 के दौरान राजस्व प्राप्ति के विकास की गति बरकरार नहीं रख पाया।
  • राज्यों के अपने कर राजस्व की रुझान बढोतरी में गिरावट आई और यह 2009-13 के 19.44 फीसदी की तुलना में 2014-17 के दौरान 8.16 फीसदी रह गई।
  • कुल व्यय में से पूंजीगत व्यय का प्रतिशत 2013-17 के दौरान 11 और 12 प्रतिशत के बीच रहा।

 

विभिन्न जिलों के बीच व्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक-सामाजिक बड़ी असमानता

 

  • 2011 की जनगणना के अनुसार 31.16 प्रतिशत के अखिल भारतीय औसत की तुलना में राज्य की शहरीकरण दर 45.23 प्रतिशत की है।
  • दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के 34 जिलों में से विदर्भ एवं मराठवाड़ा के 16 जिलों की प्रति व्यक्ति आय राज्य एवं राष्ट्रीय औसत से नीचे है।
  • 351 विकास ब्लॉक में से, राज्य में 125 विकास ब्लॉकों की पहचान मानव विकास सूचकांक पर सामाजिक रूप से पिछड़े ब्लॉक के रूप में की गई है।

ग्रामीण विपत्ति एवं किसानों द्वारा आत्महत्या के मुद्वे

 

  • किसानों को औपचारिक उधारी की स्थिति
  • महाराष्ट्र की कुल खेतीयोग्य भूमि का केवल 18 प्रतिशत ही सिंचित है जबकि राष्ट्रीय औसत 35 प्रतिशत से अधिक का है।
  • सिंचाई परियोजना एवं भूमि अधिग्रहणों में लागत में वृद्धि का मुद्वा

राज्य सरकार ने भी आयोग के समक्ष विचार करने के लिए एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया है।

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वीके/आरकेएम/एएम/एसकेजे/एनके–10230