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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
जल संसाधन मंत्रालय
09-अक्टूबर-2018 18:39 IST

जल संसाधन परियोजनाओं में पर्यावरण के मुद्दे पर सेमीनार आयोजित

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के केन्‍द्रीय जल आयोग ने आज नई दिल्‍ली में ‘जल संसाधन परियोजनाओं में पर्यावरण में मुद्दे’ पर एक दिवसीय सेमीनार आयोजित किया। यह सेमीनार एक ऐसे समय में आयोजित की गई जब अनेक पक्षों से सतत विकास के मुद्दे पर चिंता व्‍यक्‍त की जा रही है।

सेमीनार का उदघाटन करते हुए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में सचिव श्री यू.पी. सिंह ने कहा कि अब हम विकास की बात नहीं करते। हम अब सतत विकास की बात करते हैं और मुझे इस बात से खुशी है कि केन्‍द्रीय जल आयोग ने एक ऐसी विचारगोष्‍ठी की शुरूआत की है, जो अति आवश्‍यक है। श्री सिंह ने क‍हा कि हम अब पारिस्थितिकीय प्रबंधन की उपेक्षा नहीं कर सकते। पारिस्थितिकी से जुड़ी चिंताओं को ध्‍यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जाना चाहिए और विकास परियोजनाओं के प्रभावों का समुचित रूप से अध्‍ययन होना चाहिए।

केन्‍द्रीय जल आयोग के अध्‍यक्ष श्री एस. मसूद हुसैन ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करने पर जोर दिया। दिनभर चलने वाले सेमीनार के दौरान अनेक वक्‍ताओं ने जल संसाधन से जुड़ी विकास परियोजनाओं के कुप्रभावों के बारे में चर्चा की, जैसे - लोगों का विस्‍थापन, वन और कृषि क्षेत्र का पानी में डूबना, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधन, वन्‍य जीवन तथा नदियों के प्रवाह में व्‍यवधान आदि। सेमीनार में जल संसाधन मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री एस. के. सरकार ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किए।

इस सेमीनार के माध्‍यम से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केन्‍द्रीय जल आयोग, राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी, वापकोस, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण, केन्‍द्रीय भू-जल बोर्ड, केन्‍द्रीय अंतर्देशीय मत्‍स्‍य अनुसंधान संस्‍थान, राष्‍ट्रीय जलविज्ञान संस्‍थान, टिहरी पनबिजली विकास निगम, राष्‍ट्रीय पनबिजली निगम, गुजरात राज्‍य सरकार, एनजीपी आदि हितधारक संगठनों के विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्‍ध हुआ।

आयोजकों और वक्‍ताओं ने आशा व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि इस सेमीनार में मिले सुझावों और फीडबैक से नीतिगत तौर पर जानकारी आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।    

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आर.के.मीणा/अर्चना/एसकेएस/एनएम – 10606