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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
जल संसाधन मंत्रालय
10-अक्टूबर-2018 19:42 IST

श्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘गंगा नदी के लिए  पर्यावरणीय प्रवाह से जुड़ी अधिसूचना एक महत्‍वपूर्ण कदम है’

श्री नितिन गडकरी ने ‘अविरल और निर्मल गंगा’ के लिए सरकारी प्रतिबद्धता दोहराई    ‘गंगा अधिनियम के मसौदे को मंजूरी के लिए शीघ्र ही कैबिनेट के पास भेजा जाएगा’

केन्‍द्र सरकार ने आज गंगा नदी के लिए उन न्‍यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) को अधिसूचित किया जिसे इस नदी में विभिन्‍न स्‍थानों पर निश्चित तौर पर बनाये रखना है। पर्यावरणीय प्रवाह दरअसल वह स्‍वीकार्य प्रवाह है जो किसी नदी को अपेक्षित पर्यावरणीय स्थिति अथवा पूर्व निर्धारित स्थिति में बनाये रखने के लिए आवश्‍यक होता है। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने इसे एक महत्‍वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इस नदी के लिए ई-फ्लो की अधिसूचना जारी हो जाने से इसके ‘अविरल प्रवाह’ को सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी। ‘अविरल और निर्मल गंगा’ के लिए सरकारी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री महोदय ने यह जानकारी दी कि गंगा अधिनियम के मसौदे को मंजूरी के लिए शीघ्र ही कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

श्री गडकरी ने कहा, ‘यह एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण क्षण है। गंगा के ई-फ्लो को अधिसूचित करने के बारे में चर्चाएं लम्‍बे समय से हो रही थीं। हमने नदी में प्रवाह की न्‍यूनतम मात्रा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।’

सरकार द्वारा आज जारी गई अधिसूचना से यह सुनिश्चित होगा कि सिंचाई, पनबिजली, घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग इत्‍यादि से जुड़ी विभिन्‍न परियोजनाओं एवं संरचनाओं के कारण नदी का प्रवाह किसी अन्‍य तरफ मुड़ जाने के बावजूद नदी में जल का न्‍यूनतम अपेक्षित पर्यावरणीय प्रवाह निश्चित रूप से बरकरार रहेगा। यह नदी के अविरल प्रवाह को बनाये रखने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

सरकार द्वारा अधिसूचित ई-फ्लो कुछ इस तरह से है :

  1.  उद्गम वाले ग्‍लेशियरों से आरंभ होने वाला और संबंधित संगम से होकर गुजरने के बाद आखिर में देवप्रयाग से हरिद्वार तक मिलने वाला ऊपरी गंगा नदी बेसिन विस्‍तार:

 

क्र.सं.

ऋतु

माह

प्रत्‍येक पूर्ववर्ती 10 दिवसीय अवधि के दौरान प्रेक्षित मासिक औसत प्रवाह का प्रतिशत (%)

1

शुष्‍क

नवम्‍बर से मार्च

20

2

क्षीण

अक्‍टूबर, अप्रैल और मई

25

3

उच्‍च प्रवाह ऋतु

जून से सितम्‍बर

30*#

 

*# उच्‍च प्रवाह ऋतु के मासिक प्रवाह का 30 प्रतिशत

  1. हरिद्वार, उत्‍तराखंड से उन्‍नाव, उत्‍तर प्रदेश तक गंगा नदी के मुख्‍य मार्ग का विस्‍तार :

क्र.स.

बैराज की अवस्थिति

बैराजों के सन्निकट निम्‍न धारा को निर्मुक्‍त करने वाला न्‍यूनतम प्रवाह

(क्‍यूमैक्‍स में)

गैर- मानसून

(अक्‍टूबर से मई)

बैराजों के सन्निकट निम्‍न धारा को निर्मुक्‍त करने वाला न्‍यूनतम प्रवाह

(क्‍यूमैक्‍स में)

मानसून

(जून से सितम्‍बर)

1

भीमगौड़ा

(हरिद्वार)

36

57

2

बिजनौर

24

48

3

नरौरा

24

48

4

कानपुर

24

48

 

उपर्युक्‍त आदेश उद्भव वाले ग्‍लेशियरों से आरंभ होने वाले और संबंधित संगम से होकर गुजरने के बाद आखिर में देवप्रयाग से हरिद्वार तक मिलने वाले ऊपरी गंगा नदी बेसिन और उत्‍तर प्रदेश के उन्‍नाव जिले तक गंगा नदी के मुख्‍य मार्ग पर लागू होगा। न्‍यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह का अनुपालन सभी मौजूदा, निर्माणाधीन और भावी परियोजनाओं के लिए मान्‍य है। जो वर्तमान परियोजनाएं फिलहाल इन मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं उन्‍हें तीन वर्षों की अवधि के अंदर निश्चित रूप से अपेक्षित पर्यावरणीय प्रवाह मानकों का अनुपालन करना होगा। ऐसी लघु एवं सूक्ष्‍म परियोजनाएं जिनके कारण नदी की विशेषताओं अथवा उसके प्रवाह में व्‍यापक बदलाव नहीं होता है उन्‍हें इन पर्यावरणीय प्रवाह से मुक्‍त कर दिया गया है।

इन नदी विस्‍तार में प्रवाह की स्थिति पर समय समय पर हर घंटे करीबी नजर रखी जाएगी। केन्‍द्रीय जल आयोग संबंधित आकड़ों का नामित प्राधिकरण एवं संरक्षक होगा और प्रवाह की निगरानी एवं नियमन की जिम्‍मेदारी इसी आयोग पर होगी।

संबंधित परियोजना डेवलपरों और प्राधिकरणों को 6 माह के भीतर परियोजना स्‍थलों के समुचित स्‍थानों पर स्‍वत: डेटा प्राप्ति एवं डेटा संप्रेषण सुविधाएं स्‍थापित करनी होंगी।

गंगा नदी को स्‍वच्‍छ करने के लिए किये जा रहे वर्तमान प्रयासों के बारे में विस्‍तार से बताते हुए श्री गडकरी ने बताया कि अनेक परियोजनाएं जैसे कि घाटों एवं शवदाह गृह के विकास, सीवेज शोधन संयंत्रों, गंगा नदी पर तल की सफाई इत्‍यादि कार्यान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं। उन्‍होंने देशवासियों को आश्‍वासन दिया कि इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने के बाद ‘अविरल और निर्मल गंगा’ का उनका सपना साकार हो जाएगा। उत्‍तराखंड में पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण के मसले पर श्री गडकरी ने कहा कि विभिन्‍न हितधारकों की राय ली जा रही है और इस संबंध में सोच-समझ कर निर्णय लिया जाएगा।

केन्‍द्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने गंगा नदी के लिए ई-फ्लो से जुड़ी अधिसूचना को एक ऐतिहासिक कदम बताया और अपने द्वारा शुरू किये गये कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए श्री गडकरी का धन्‍यवाद किया। सुश्री उमा भारती ने कहा, ‘गंगा नदी व्‍यक्तिगत रूप से मेरे लिए विश्‍वास का प्रतीक रही है, लेकिन गंगा नदी पर काम शुरू करने के बाद संबंधित समस्‍याओं को लेकर मुझमें उपयुक्‍त समझ विकसित हुई। इस संदर्भ में यह अधिसूचना एक ऐति‍हासिक कदम है और भारत की सभी नदियों को फिर से जीवंत बनाने की दिशा में एक शुरुआत है।’ उन्‍होंने कहा कि पनबिजली परियोजनाओं को कुछ इस तरह से कार्यान्वित किया जाना चाहिए जिससे कि नदियों में जल के सतत प्रवाह में कोई भी बाधा उत्‍पन्‍न न हो।

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आर.के.मीणा/अर्चना/आरआरएस/एस 10626