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पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय
14-जनवरी-2019 18:26 IST

हरदीप पुरी का नवोन्‍मेषी निर्माण प्रौद्योगिकियों के लिए प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन का आह्वान – ग्लोबल हाउसिंग टेक्‍नोलोजी चैलेंज- इंडिया का शुभारंभ

नई उभरती, आपदाओं-से उबरने में सक्षम, पर्यावरण के अनुकूल, किफायती एवं त्‍वरित निर्माण प्रौद्योगिकियों की तलाश करने की जरूरत संसाधनों और पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों के सर्वोत्तम इस्तेमाल सहित न्यूनतम समय और लागत में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में परिवर्तन इन्‍कूबेशन सेंटर्स की स्‍थापना और आशा-इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत त्‍वरित कार्यशालाओं के आयोजन के माध्‍यम से प्रमाणित प्रदर्शनीय एवं प्रोत्‍साहन के सामर्थ्‍य वाली प्रौद्योगिकियों की पहचान को शामिल करने की चुनौती

आवास और शहरी मामलों के राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप एस पुरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पीएमएवाई (यू) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर निर्माण को दुनिया भर में उपलब्‍ध बेहतरीन निर्माण प्रौद्योगिकियों को प्राप्‍त करने के एक अवसर के रूप में इस्‍तेमाल करते हुए प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन लाने का आह्वान किया है। ग्लोबल हाउसिंग टेक्‍नोलोजी चैलेंज- इंडिया’ (जीएचटीसी-इंडिया) का शुभारंभ करते हुए श्री पुरी ने समूचे विश्‍व से प्रौद्योगिकियां प्राप्‍त करने तथा भारत में अपनायी जा सकने योग्‍य प्रौद्योगिकियों की पहचान करने की परिकल्‍पना की। इस अवसर पर नीति आयोग के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत, सचिव, आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय, श्री दुर्गा शंकर मिश्र, संयुक्‍त सचिव एवं मिशन निदेशक (एचएफए), आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, श्री अमृत अभिजात, मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी और निर्माण उद्योग के विविध हितधारक मौजूद थे।

 

जीएचटीसी-इंडिया का उद्देश्‍य एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के माध्‍यम से वैश्विक स्‍तर पर उपलब्‍ध नवोन्‍मेषी निर्माण प्रौद्योगिकियां प्राप्‍त करना है। यह सतत तरीके से कम लागत और अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले निर्माण सहित अल्‍पावधि में रहने को तैयार आवास उपलब्‍ध कराना प्रदर्शित करने और उपलब्‍ध कराने की दिशा में प्रयासरत है। यह देश में अनुसंधान एवं विकास के लिए उपयुक्‍त वातावरण तैयार करने के लिए भावी प्रौद्योगिकियों को भी बढ़ावा देना चाहता है।

श्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि नई उभरती, आपदाओं-से उबरने में सक्षम, पर्यावरण के अनुकूल, किफायती एवं त्वरित निर्माण प्रौद्योगिकियों की तलाश करने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा, ‘प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण में परिवर्तन संसाधनों और पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों के सर्वोत्‍तम इस्‍तेमाल के साथ न्‍यूनतम समय और लागत में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम होगा

जीएचटीसी-इंडिया की संकल्‍पना देश में निर्माण क्षेत्र में आवश्‍यक महत्‍वपूर्ण बदलावों को समर्थ बनाने के लिए की गई है। जीएचटीसी-इंडिया, अवधारणा और साथ ही साथ आवास निर्माण करने के तरीके दोनों में ही परिवर्तन लायेगा। चैलेंज के तीन संघटक हैं यथा i) ग्रेंड एक्‍स्पो-कम-कॉन्‍फ्रेंस का संचालन करना, ii) दुनियाभर की प्रमाणित प्रदर्शनीय प्रौद्योगिकियों की पहचान करना और iii) चुनिंदा आईआईटी में इन्कूबेशन सेंटर्स की स्थापना और आशा इंडिया कार्यक्रम के जरिए सम्भावित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्‍साहन देना।

 

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि भवन निर्माण उद्योग में शामिल सभी हितधारकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, डवेलेर्प्‍स और तकनीकी संस्‍थान चेलैंज में शिरकत करेंगे। उन्‍होंने कहा कि आवास और शहरी  मामलों का मंत्रालय, वर्ष 2022 तक सभी पात्र लाभार्थियों को हर मौसम के लिए अनुकूल ‘’पक्‍के मकान’’ उपलब्‍ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई यू) मिशन का कार्यान्‍वयन कर रहा है। वर्ष 2022 तक लगभग एक करोड़ मकानों का निर्माण करने की विधिमान्‍य मांग के विपरीत आवास और शहरी  मामलों के मंत्रालय द्वारा अब तक लगभग 70 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से लगभग 37 लाख स्‍थापित हो चुके हैं और लगभग 15 लाख मकानों का निर्माण पूरा करके लाभार्थियों को उनका आवंटन कर दिया गया है। 

सुदृढ़ प्रकिया सुनिश्चित करने के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने किफायती मकानों के निर्माण के लिए नवोन्‍मेषी और वैकल्पिक निर्माण प्रौद्योगिकियों को धीमे और सीमित रूप से अपनाने के व्‍यापक कारणों की पहचान करने के लिए राज्‍य/ संघ शासित प्रदेशों की सरकारों, आईआईटी, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और अन्‍य हितधारकों के साथ विचार विमर्शों का आयोजन किया है।

यह हस्‍तांतरण संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्‍यों (एसडीजी) को प्राप्‍त करने, नये शहरी एजेंडे और पेरिस जलवायु समझौते की दिशा में योगदान देगा। वैकल्पिक, नवोन्‍मेषी और फास्‍ट ट्रेक प्रौद्योगिकियों का लक्ष्‍य : क) प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, ख) निर्माण में तेजी लाना, ग) औद्योगिक तथा निर्माण संबंधी अपशिष्‍ट का उपयोग, घ) वायु और ध्‍वनि प्रदूषण में कमी, ड़) जल का सर्वोत्‍तम इस्‍तेमाल, च) बढती श्रम उत्‍पादकता, छ) लागत में कटौती, ज) सुरक्षित और आपदा से उबरने में सक्षम मकान तथा झ) सभी प्रकार के मौसम के अनुकूल आदि। इस तरह का प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण राष्‍ट्र को विश्‍व की उन्‍नत अर्थवयवस्‍थाओं तथा निर्माण क्षेत्र में उनके सटीक मानदंडों के बराबर लायेगा।

      अन्‍य हितधारकों को प्रतिनिधि के तौर पर भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जायेगा, जिनमें अकादमिक, तकनीकी संस्‍थानों के छात्र, प्रौद्योगिकीविद, इंजीनियर, आर्किटेक्‍ट, अनुसंधान एवं विकास संस्‍थान (आर एंड डी), आवास बोर्ड और राज्‍य लोक निर्माण विभाग (पीडब्‍ल्‍यूडी) सहित सरकारी एजेंसियां, डवलेपर्स, उद्यमी आदि शामिल हैं।

आर.के.मीणा/एएम/आरके/एस-184