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Press Information Bureau
Government of India
Prime Minister's Office
30-September-2014 15:29 IST
Text of PM’s address at the US-India Business Council in Washington, DC

भारत की विदेश मंत्री आदरणीय सुषमा स्‍वराज जी मेरे साथ आई हैं। यहीं पर हैं। भारत की प्रथम महिला विदेश मंत्री बनने का उनको सम्‍मान प्राप्‍त हुआ है।

आप सब ने मेरा स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं आज कई लोगों से जब मिल रहा था, तो मैं देख रहा था, काफी पुराने मेरे परिचित चेहरे थे। जब मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो Vibrant Investment Summit में बहुत बड़ा delegation आपकी तरफ से आता था। ऐसे कई पुराने परिचितों से आज मुझे मिलने का अवसर मिला। 2015 में फिर, जनवरी में गुजरात में Vibrant Summit हो रही है। अक्‍तूबर 9 को मध्‍य प्रदेश के इंदौर में Vibrant Summit हो रही है। मुझे विश्‍वास है कि भारत में जिस प्रकार से आप सबकी रूचि बढ़ रही है, ये ऐसे अवसर हैं कि जहां एक साथ, एक Roof के नीचे, आपको हिन्‍दुस्‍तान के Industrial World के, Business world के, Who’s Who से रू-ब-रू होने का अवसर मिलता है। इसलिए मुझे विश्‍वास है कि आप इस अवसर को, इस मौके को नहीं छोड़ेंगे।

125 करोड़ लोगों का देश भारत, उसकी तरफ विश्‍व का ध्‍यान होना बहुत ही आवश्‍यक है। और भारत भी पूरी ताकत के साथ आर्थिक जगत में अपनी जगह बनाने का संकल्‍प करके आगे बढ़ रहा है। एक नए आत्‍मविश्‍वास के साथ आगे बढ़ रहा है। नए संकल्‍प के साथ आगे बढ़ रहा है। किसी भी सरकार के लिए 3-4 महीने का अनुभव कोई बहुत बड़ी बात नहीं होती है। लेकिन इस छोटे अनुभव से मैं कह सकता हूं कि भारत के आर्थिक दृष्टि से पीछे रहने के लिए मुझे एक भी कारण कहीं नजर नहीं आता।

पीछे क्‍यों है, इसका जवाब खोजने में अब समय बर्बाद करने की आवश्‍यकता नहीं है। सिर्फ, सिर्फ एक छोटा सा निर्णय करने की आवश्‍यकता है कि चलो, निकल पड़ो। और मैं विश्‍वास से कहता हँ, इस एक छोटे से संकल्‍प से, तीन महीने के छोटे से कार्यकाल से मैं अनुभव करता हूं कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आखिरकर, कोई भी व्‍यापारी या उद्योगपति किसी देश के साथ नाता कब जोड़ता है? जब उसके अंदर एक विश्‍वास हो कि मैं जहां जा रहा हूं, वह सही जगह है। मैं सही मुकाम पर जा रहा हूं। ये विश्‍वास सबसे बड़ी अमानत होती है। पिछले तीन महीने में मेरी सरकार का एक प्रमुख काम रहा है कि किसी के पुराने, कुछ भी अनुभव क्‍यों न रहो हों, मेरे देश के लिए कोई भी पुरानी सोच क्‍यों न रही हो, अच्‍छे-बुरे अनुभव रहे हों, लेकिन वक्‍त बदल चुका है। इरादे बदल चुके हैं। मकसद बदल चुके हैं। इसलिए उन सारी बातों को छोड़कर मैं एक विश्‍वास जगाने में लगा हूं। इतने कम समय में मैं ये विश्‍वास से कह सकता हूं कि न सिर्फ हिन्‍दुस्‍तान के सवा सौ करोड़ देशवासियों में, बल्कि पूरे विश्‍व में भारत के प्रति एक नई विश्‍वास की चिंगारी प्रकट हुई है जिसकी रोशनी हिन्‍दुस्‍तान की तरफ लोगों को खींच के ले आ रही है।

कोई भी व्‍यवसायी, businessman हो, industrialist हो, मेरा अनुभव है – मैं 14 साल तक गुजरात का मुख्‍यमंत्री रहा हूं और हम गुजराती लोगों का स्‍वभाव है – हमारी रगों में ही रुपये दौड़ते है। Business और Commerce – यह हमारे Nature में होता है। उसके कारण मैं उस अनुभव के आधार पर कहता हूं कि Investor हो, व्‍यापार करने वाला व्‍यक्ति हो, वह सरकार से कोई कंसेशन-वंसेशन नहीं चाहता है। यह भ्रम है। सरकारों को लगता है, बिना समझे, कि हम टुकड़े फेकेंगे तो उद्योगपति आएगे। यह Reality नहीं है। मेरा अनुभव कहता है कि उनको Effective Governance चाहिए। उन्‍हें Easy Governance चाहिए। उन्‍हें Red tapeism से, उन मुसीबतों से बचने के लिए सुविधा चाहिए। Red Carpet मिले या न मिले, अगर Red Tapeism में फंस जाते है और उसने Plan किया हो कि 2014 में सोचा हो, 2016 में Production में जाना हो, लेकिन 2016 तक अगर ईंट भी नहीं रख पाए, तो उसके सारे Economics, सारे हाल-चाल खराब हो जाते हैं।

इसलिए उसके लिए आवश्‍यक होता है, Development-Friendly Environment और Development-Friendly Environment प्रदान करना सरकार की जिम्‍मेदारी है। उसके रुपयों की Security का भरोसा होना चाहिए। दूसरा, उसे चाहिए Proper Infrastructure। मैं Proper शब्‍द का उपयोग कर रहा हूं। मैं नहीं कह रहा हूं कि उन्‍हें World-Class Infrastructure चाहिए। लेकिन जिस काम के लिए वह आया है, उसके अनुकूल यदि Infrastructure मिले, तो काम होता है। और तीसरी बात है, Peaceful Labor चाहिए। अगर Peaceful Labor है, Proper Human Resource available है, तो अपने औद्योगिक विकास को, व्‍यापारिक काम-काज को तेजी से आगे बढ़ा सकता है। इन्‍हीं सब बातों के अनुभव के आधार पर भारत सरकार ने देश को आगे ले जाने के लिए जो design तैयार किया है, जो roadmap तैयार किया है, उन सब बातों को ध्‍यान में रखते हुए हमने काम को आगे बढ़ाया है।

उसी प्रकार से देश का अर्थतंत्र भी Vibrant होना चाहिए। हम ये सोचे कि यह सब हो, पर मरा-पड़ा सरकार हो, मरा-पड़ा अर्थतंत्र हो, तो वहां कौन आएगा? सरकार के अपने Economic System में Vibrancy चाहिए। Fiscal Deficit कम होना चाहिए। Tax Terrorism का अस्तित्‍व खत्‍म होना चाहिए। Taxation System में सरलता होनी चाहिए। अगर इन चीजों को करते है, तो लोगों को सुविधा रहती है।

हमने सरकार में आने के बाद इन चीजों को प्राथमिकता दी है। कभी-कभी सरकारों का उत्‍साह रहता है, नए-नए कानून बनाना। क्‍यों? तो लोगों के मदद के लिए कानून बना रहे है। लेकिन मेरा कहना है कि शायद कानून ही लोगों के लिए बोझ बन जाते हैं। और इसलिए मैंने एक काम शुरू किया है, कानून खत्‍म करने का। मैंने एक committee बिठाई है, जिसको काम दिया है कि जो गैर-जरूरी कानूनों की भरमार है, उसको खत्‍म करो।

आप देखिए, आप बाहर से आए है। और अगर खिड़की खुली नहीं है तो कैसा अनुभव होता है? और अगर खिड़की खुली है, जरा हवा आती है, तो मन को कितनी प्रसन्‍नता होती है? उसी प्रकार से सरकारी व्‍यवस्‍था में जितने कम कानून हों, उतने Fresh air की अनुभूति होती है। और इसलिए मेरी कोशिश रहती है कि कानून के झाल से निकल के एक सरल कानून हो, एक सरल व्‍यवस्‍था हो। व्‍यवस्‍थाओं को चलाएं।

दूसरा मेरा मत है: “Government has no Business to be there in Business”. ये सरकार का काम नहीं है व्‍यापार करना। लोग हैं, सामर्थ्‍यवान हैं। हमारा काम है Facilitator का, एक अवसर पैदा करने का। और हमारी ये भूमिका रहेगी। हमारे यहां जितने PSU है, अभी हमने एक बहुत बड़ा Decision लिया है। करीब-करीब $10 Billion के disinvestment का proposal already मैंने पारित कर दिया है। इतने कम समय में किसी एक सरकार ने इतने बड़े disinvestment का decision लिया हो, यह शायद पिछले 50 साल के इतिहास में पहली बार, हिन्‍दुस्‍तान की किसी सरकार ने किया है।

उसी का नतीजा है, लोगों को भरोसा हो रहा है। मैं disinvestment भी उस जगह पे कर रहा हूं, जो कि हमारे लिए, सरकार के एक प्रकार से कमाऊ बेटे हैं। ऐसे Institutions में initiative लिया है। मैं मानता हूं कि हम बाजार में जाएगें। अपने आप लोग इसका फायदा उठाएंगे। गरीब लोगों को फायदा मिलेगा।

उसी प्रकार से आर्थिक व्‍यवस्‍था तेज हो, उसकी एक आवश्‍यकता है ease of Business। पहले भारत का Ranking जो था। लेकिन इन दिनों मैंने सरकार के अधिकारियों से कहा है कि मुझे इस Ranking पर ease of Business में रहना नहीं है। उसको कम करना है और उसको कम करने के ये-ये Parameters हैं। ये-ये Initiatives हैं। ये-ये जिम्‍मेदारियां है। आज मैं विश्‍वास से कह सकता हूं, Within 6 month, इन सारी चीजों को लागू कर देंगे। Ease of Business के जितने Ranking के Parameters हैं, उसमें हम एक नई ऊंचाईयों को पार कर देंगे और कोई भी Business House हो, को भी Industrial House हों, उसको अगर हिन्‍दुस्‍तान में आना है, तो बहुत सरलता रहेगी।

उसी प्रकार से हम digital world में रहते है। हम नंबर लगाए, डायरी देखें, नाम निकाले, फिर नंबर लगाएं। वह जमाना चला गया। अब एक click से आज Communicate करते है। इतनी दुनिया Fast हो गई है। अगर सामान्‍य व्‍यक्ति का जीवन इतना बदल चुका है और सरकार वहीं की वहीं रह जाएगी, तो कौन इस सरकार पर भरोसा करेगा? कौन इस सरकार के आधार पर चलेगा? वह सरकार ही irrelevant हो जाएगी। सरकार वो होनी चाहिए जो समाज से दो कदम आगे चलती हो। समाज की आवश्‍यकताओं से दो कदम आगे होनी चाहिए सरकार को। सरकार अगर समाज की आवश्‍यकताओं से 10 कदम पीछे है, वह फासला वो कभी भर नहीं पाएंगे और वह समाज के भरोसे देश को आगे बढ़ाने की संभावना सरकार को छोड़ देनी चाहिए।

इसलिए सामान्‍य जन-व्‍यवस्‍था जिन बातों को लेकर चलता है, सरकार को दो कदम आगे ले जाना चाहिए। इसलिए सरकार ने Initiative लिया है digital India का। मैं चा‍हता हूं कि Mobile Governance हमारे देश में क्‍यों न हो। मैं कल President Obama से बड़ी विस्‍तार से… इस विषय में हम दोनों की रूचि समान है, बराबर हमारी Wave length मिलती है। तो काफी विस्‍तार से हमने बातें की कि उसको क्‍या अनुभव आए! मेरे क्‍या अनुभव आए। हम इसमें कैसे काम कर सकते है? Digital India के लिए अमेरिका और भारत साथ मिल कर के कैसे काम कर सकते है? लेकिन मैं चाहता हूं, हमने जो Make In India Movement शुरू की है, उस Make In India Movement को मैं पूरा का पूरा Digital network से जोड़ रहा हूं।

आप कोई भी Industrial house हैं, उसको अगर भारत सरकार से संपर्क करना है तो mobile से कर सकते है। उसकी फाइल कहां है, उसका Proposal कहां है, उसका Position क्‍या है – वह अपने mobile पर देख पाए, मैं ऐसी स्थिति पैदा करना चाहता हूं। Transparency चाहिए।

मैं जब गुजरात में था, तब Specially मैंने Environment department के लिए काम किया था। सामान्‍य रूप से Environment department में जब application जाती है तो उसको भरोसा नहीं होता है कि मोक्ष कब होगा? उसको भरोसा ही नहीं होता। इतनी queries आती-जाती है, इतनी queries आती-जाती है, कि वह चिंता में रहता है। तो मैंने वहां पर एक काम किया, फाइल आते ही online available हो और जिसकी फाइल हो उसे Password दिया जाए। वह Password से देख सकता है कि आज उसकी फाइल कहां move कर रही है, कहां अटकी पड़ी है। और कहीं पर भी अटकी पड़ी है तो उसे सिर्फ मुझे SMS करना होता था और उसे पता चल जाता था कि उसका काम होने लगा है। और उसके कारण इतनी Transparency आ गई, इतनी Speed आ गई - उन्‍हीं प्रयोगों को केंद्र में भी लागू किया जा सकता है।

हम इस Technology का उपयोग good governance के लिए करना चाहते हैं। Effective governance के लिए करना चाहते हैं, Ease of Business के लिए करना चाहते हैं। सारी Business community हो, Industrial community हो, उसको immediate Make In India कार्यक्रम के द्वारा हम जोड़ना चाहते हैं।

सरकार, सिर्फ शासन में बैठे हुए लोगों के पास ही बुद्धि है, ऐसा मानने वाले हम लोग नहीं है। शासन के बाहर प्रतिभावान, तेजस्‍वी अनेक लोग होते हैं। हम Public Private Partnership पर चलने का प्रयास करते हैं। हम लोगों के सुझाव लेकर के चलते हैं। लोगो से पूछते है, हम कोई भी Policy ले करके आते हैं, तो जनता का Opinion मागते हैं, उसका Feedback मागते हैं। हम Policy को और People-Friendly कैसे बनाएं, उस दिशा में काम कर रहे हैं। एक प्रकार से हमारा प्रयास ये रहता है कि हमारी पूरी सरकार की भूमिका एक Facilitator की हो। कोई भी उद्योगपति या Businessman आने वाला हों तो उसका क्‍या Requirement है, उसको कहें।

कई लोग मेरा एक उदाहरण देते है बाहर Tata Nano का। लोग कहते हैं कि मोदी ने 45 मिनट में Tata Nano का निर्णय कर लिया था। इसका नाम सरकार है। ऐसा कहके मेरी सरकार की बड़ी तारीफ हुआ करती है। लेकिन मैं उसके सिवा एक उदाहरण आज समझाना चाहता हूं कि हम कैसे काम करते हैं। मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था तो मेरे पास 40-45 साल के एक नौजवान आए। वह मूलत: तो Indian Origin थे, पर उनके Forefathers अफ्रीका चले गए होंगे। उसके बाद वो Canada चले गए। मुस्लिम सज्‍जन थे, मिलने आए। यहां Industry लगानी है, Business करना है। मैंने कहा - आइए भाई, बैठिए। लेकिन पता नहीं क्‍यों उनका Confidence level बहुत poor था। Communication Skill भी बहुत Poor थी। 5-10 मिनट तो मैं उसको झेल रहा था, लेकिन मैं समझ नहीं पाता था कि क्‍या करना चाहते है। मुझे लगता था कि ये ऐसे ही आ गया है और मेरा समय खपा रहे है। तो मैंने बड़ी मुश्किल से नमस्‍ते करके उन्‍हें निकाला।

मैंने कहा ऐसा करो, आपके जो काम है, इस प्रकार के काम के लिए आप बडौदा चले जाइये। बडौदा के कलेक्‍टर को मैं फोन करके कहता हूं, वह आपसे मिलेंगे और आपको सारी बातें समझाएंगे। आप उन्‍हीं से बात कीजिए। तो वो बेचारा पहली बार India आया था, वह मूलत: तो हिन्‍दुस्‍तान को था, पर पहली बार आया था, वो बेचारा चला गया। मुझे भी लगा की जान छूटी, वो सर खा रहा था।

13 महीने के बाद वह सज्‍जन फिर से आए - after 13 months। मेरे स्‍टॉफ ने मुझे कार्ड दिया तो मैंने कहा, ये वहीं है। वो मेरा समय बर्बाद करके गया था तो मैंने कहा, मना कर दो। तो वो बोले नहीं-नहीं, वह तो Invitation देने आया है। तो मैं चौंक गया। मैंने कहा किस बात का, तो बोला, उसका कारखाना हो गया, उसके उद्घाटन के लिए। आप कल्‍पना कर सकते है? मैंने कहा, बुलाओ भाई उसको बुलाओ। वह आया, मैंने कहा, भाई तुम तो एक बार गए तो फिर आए ही नहीं। तो बोले, मुझे जरूरत ही नहीं पड़ी। आपने जहां मुझे भेजा था मेरा सारा काम हो गया। मेरा कारखाना तैयार हो गया। आप उद्घाटन के लिए आइये।

फिर उसने मुझे कहा कि अभी तो आना है, फिर 6 महीने के बाद दोबारा आना है। मैंने कहा क्‍यों, अभी तो उद्घाटन करेंगे, लेकिन 6 महीने के बाद मेरे Chairman आएगे। उस दिन पहला Product market में रखेंगे। उस दिन भी आइये। मैंने कहा, देख यार, तूने जिस प्रकार का कमाल किया है, मैं मन से कहता हूं। मैं तुम्‍हें बधाई देने के लिए तुम्‍हारी फैक्‍ट्री के उद्घाटन के लिए मैं खुद आऊंगा। और मैं गया। 6 महीने के बाद दोबारा उसने बुलाया, दोबारा गया। आपको जान करके आनंद होगा, जिस दिन वह मुझे मिला, और जिस दिन पहला Product market में रखा, इस बीच में 19 months Total हुए, 19 months। और पहला Product क्‍या था? Delhi Metro train का कोच।

हम मिल करके, आपका भी भला हो, मेरे देश का भी भला हो, मानव जाति का भी भला हो। हम सब नई Technology में खोज करते हुए नए आविष्‍कारों को प्राप्‍त करते हुए विकास की नई ऊचाईयों को प्राप्‍त करते हुए आगे बढ़े।

मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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अमित कुमार / महिमा वशिष्ट / शिशिर चौरसिया / लक्ष्‍मी