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Press Information Bureau
Government of India
Vice President's Secretariat
16-May-2018 20:06 IST
Media should take the truth into the society with courage and enthusiasm: Vice President

Media should dedicate itself to a new TRP philosophy of promotion of Truth in a Responsible and Professional manner; Addresses 3rd Convocation of Makhanlal Chaturvedi Rashtriya Patrakarita Avam Sanchar Vishwavidyalay

The Vice President of India, Shri M. Venkaiah Naidu has said that Media should take the truth into the society with courage and enthusiasm. He was addressing 3rd Convocation of Makhanlal Chaturvedi Rashtriya Patrakarita Avam Sanchar Vishwavidyalay, in Bhopal, Madhya Pradesh today. The Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chouhan and other dignitaries were present on the occasion.

 

The Vice President said that the university named after Pandit Makhanlal Chaturvedi is a great inspiration for everyone and the great man who taught journalism on high ideals and used the word 'weapon of political freedom to get political and economic freedom'.

 

The Vice President said that Media should dedicate itself to a new TRP philosophy of promotion of Truth in a Responsible and Professional manner. He further said that the need of the hour is to highlight the negative forces of society. These forces weaken the country's integrity and unity and also damage the development of the country, he added.

 

The Vice President said that keeping the right picture of the society by the media is very important and Media is now awakening in the direction of women's rights. Media should strive to make the priorities of maintaining dignity of women and protect the rights of women.

 

Following is the text of Vice President's address in Hindi:

 

"आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होकर मुझे अपार हर्ष एवं गहरा आत्मिक संतोष मिल रहा है।

इस विश्वविद्यालय ने अपने 27 वर्षों की यात्रा में देश को बेजोड़ पत्रकार, कंप्यूटर प्रोफेशनल, प्रबंधक और सैंकेडों विकास संचारकर्ता दिए हैं। कुलाधिपति होने के नाते मुझे गहरा संतोष है कि मीडिया शिक्षा की दृष्टि से यह विश्वविद्यालय सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में गिना जाने लगा है।

यह विश्वविद्यालय जिनके नाम पर स्थापित है, ऐसे पंडित माखनलाल चतुर्वेदी हमारे प्रेरणा महापुरुष हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को ऊंचे आदर्शों पर चलना सिखाया और पत्रकारिता को राजनैतिक सामाजिक एवं आर्थिक आजादी पाने का शब्द-अस्त्र बनाया।

उनकी महान कविता मुझे तोड लेना वनमालीने देशवासियों में राष्ट्रवादिता के जज्बे को ऐसा उभारा कि यह कविता देश के साहित्य में अमर हो गयी। माखनलाल जी पत्रकारिता में इतनी ओजस्विता और स्वाभिमान था कि उसने समाज के नैतिक और चेतना के विकास में गहरा योगदान दिया पर इसके बदले में माखनलाल जी ने बड़े-बड़े पुरस्कारों तक को ठुकराया। इस मायने में उन्होंने पत्रकारिता के ऊंचे आदर्शों और पत्रकारिता के दर्शन की बुनियाद रखी। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि विश्वविद्यालय के छात्र पत्रकारिता, संचार और कंप्यूटर अनुप्रयोग में डिग्री पाकर समाज में अपना योगदान देने की शुरूआत करने जा रहे हैं।

आज का दौर बहुत महत्व का है। देश में बदलाव की हवा बह रही है और युवा शक्ति आगे बढ़कर भारतवर्ष के विकास में अपना गहरा योगदान दे रही है। ऐसी परिस्थितियों में जब देश मजबूत कदमों से तरक्की कर रहा है और पूरे देश में सामाजिक जागरण भी पूरे गौरव से हो रहा है, आज संचारकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

आप विद्यार्थीगण नए भारतवर्ष के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। मीडिया का काम, देश के विकास को गति देना है और मीडिया हमारे लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है। जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने एक मामले में कहा है कि "एक तरफ़ा सूचना, अनुचित सूचना, ग़लत सूचना और सूचना देना, सभी सामान रूप से, एक अनभिज्ञ नागरिक वर्ग पैदा करते हैं, जिससे लोकतंत्र एक तमाशा बनकर रह जाता है। "(As the Supreme Court said in a case, “one-sided information, disninformation, misinformation and non-information, all equally create an uninformed citizenry which makes democracy a farce.”)

 

आपने विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान जो ज्ञान और हुनर हासिल किया है, अब इसे समाज की जरूरतों के हिसाब से हकीकत में उतारना है।

सूचना क्रांति का महत्वपूर्ण वाहक यह विश्वविद्यालय रहा है। हिंदी भाषी प्रांतों की सबसे बड़ी चुनौती थी, डिजिटल क्रांति को सुदूर गांवों तक ले जाने की। विश्वविद्यालय ने मध्यप्रदेश में डिजिटल क्रांति को गांव-गांव तक ले जाकर साकार किया है और मध्य प्रदेश को e-governance में देश का सिरमौर माना जाने लगा है, विश्वविद्यालय ने e-governance के लिए काबिल प्रोफेशनल मुहैया कराये हैं।

देश के आज हर प्रतिष्ठित मीडिया प्रतिष्ठान में विश्वविद्यालय के विद्यार्थीगण आपको महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई पड़ेंगे और वे अपना कार्य सामाजिक जिम्मेदारी से करते हैं। विश्वविद्यालय ने मीडिया शिक्षा के नये क्षेत्रों में नवाचार किए हैं। मल्टीमीडिया, ऐनिमेशन, ग्राफिक्स और प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग क्षेत्रों में विश्वविद्यालय ने मीडिया शिक्षा में नई शुरूआत कर, एशिया में पहले मीडिया विश्वविद्यालय होने के गौरव को बढ़ाया है।

मुझे बहुत खुशी है कि विश्वविद्यालय ने हमारे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक समय में जीवन-शैली में जोड़ने के लिये अनेक शोध पीठों की स्थापना की है। इसमें महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद, पतंजलि और भृर्तहरि जैसे ऋषियों पर कार्य हो सका। विश्वविद्यालय ने प्रदीर्घ योगदान वाले प्रकाशन इन महापुरुषों के अवदान पर निकाले हैं।

विश्वविद्यालय मीडिया को ध्यान में रखकर पत्रिकाएं, रिसर्च जर्नल्स निकालता है जिससे मीडिया शोध भी विकसित हो रहा है।

विश्वविद्यालय पड़ोसी देश पाकिस्तान के मीडिया का अध्ययन करने के लिए एक पत्रिका निकालता है, जिससे पाकिस्तान के मीडिया चरित्र को समझने में मदद मिलती है।

मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि विश्वविद्यालय ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचकर कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करने का बीड़ा उठाया है। इससे इन पिछड़े क्षेत्रों की हालत बदलने लगी है और इन क्षेत्रों के नवयुवकों को शिक्षा मिल रही है और वे योग्य कंप्यूटर प्रोफेशनल बन रहे हैं। विश्वविद्यालय ने मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी पुस्तकें प्रकाशित की हैं और सामाजिक महत्व के भी विषयों पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। विश्वविद्यालय ने अपने परिसरों का मध्यप्रदेश में विस्तार किया है विश्वविद्यालय ने माखनलाल जी की नगरी खंडवा के बाद अमरकंटक, रीवां, ग्वालियर में परिसर शुरू करने के बाद अब दतिया में परिसर आरंभ करने जा रहा है।

प्राय: विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र में सीमित होकर सिकुडकर रह जाते हैं पर यह खुशी की बात है कि यह विश्वविद्यालय निरंतर अपना विस्तार कर रहा है। मध्यप्रदेश में पिछले पंद्रह वर्षों में तेज गति से विकास हुआ है और मध्य प्रदेश से बीमारू प्रदेश का टैग हट गया है। विश्वविद्यालय का विकास मध्य प्रदेश के तेज विकास के साथ-साथ हुआ है।

देश में आप जब मीडिया में प्रवेश करें तो साहस और हौसलों के साथ सच्चाई को समाज में ले जायें। आज जरूरत है समाज की नकारात्मक ताकत को उजागर करने की। ये ताकतें देश की समरसता यानि अखंडता और एकता को कमजोर करती हैं और देश के विकास में अड़ंगेबाजी भी करती हैं।

जरूरत है, आज मीडिया द्वारा समाज की सही तस्वीर रखने की।

मीडिया के सनसनीवाद ने समरस भारत की सही तस्वीर नहीं रखी है। आम भारतीय जीवन अभी भी मूल्य आधारित जीवन जीता है, पर मीडिया ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करता है कि मसलन हमारे जीवन से मूल्य गायब हो गए हैं। भारतीय सभ्यता दुनिया की पुरानी सभ्यताओं में है और भारतीय ज्ञान परंपरा में भारतीय जीवन दृष्टि भी है, जो उसे एक महान सभ्यता बनाती है। आप लोग समाज को बतायें कि देश की प्राचीन सभ्यता की क्या-क्या विशेषताएं रही हैं और यह सभ्यता इतनी सारी चुनौतियों को झेलने के बाद भी अपने मूल स्वरूप को कैसे बचा सकी है।

आप लोग सही मायने में कर्मवीरबनें, जिससे आपके काम की गूंज भी समाज को सुनाई पड़े और सामाजिक बदलाव का काम भी हो सके। मेरे विचार से मीडिया को ज़िम्मेदारी और व्यावसायिक रीति से सत्य के प्रोत्साहन की नई टीआरपी अवधारणा अपनानी चाहिए।

I feel that media should dedicate itself to a new TRP philosophy of promotion of Truth in a Responsible and Professional manner.

आप जानते हैं कि माखनलाल चतुर्वेदी जी कर्मवीरअखबार निकाला करते थे और यह अखबार अंग्रेज सरकार पर दबाव बनाकर शासन को जवाबदेह और जिम्मेदार बनाता था। गांधी जी भी इस अखबार की खूब तारीफ किया करते थे। सच्चाई की ज्योति को यदि आपने थाम लिया तो यकीन मानिए कि विजय आपकी ही होगी। आपकी राजदृष्टि, समाजदृष्टि में स्पष्टता है तो आपके संचारकर्ता के काम आसान होंगे। मुझे उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि आपकी राष्ट्रबोध चेतना और सामाजिक बोध विकसित होगा, जिससे आप घटनाक्रमों की सही पड़ताल करके उसे सही नजरिए से समाज के सामने रख सकेंगे।

भारत के गांवों में भी अब विकास हो रहा है। आप लोग थोड़ा शहरों की चकाचौंध से दूर ग्रामीण भारत में भी जाएं और ग्रामीण भारत की तस्वीर को समाज के सामने रखें। यकीन मानिए कि ग्रामीण भारत पर यदि आपने ध्यान दिया तो केवल भारतवर्ष की आत्मा को जान पाएंगे बल्कि विकास की बुनियाद को भी समझ सकेंगे।

मेरा यह भी कहना है कि गांधी जी, जो स्वयं एक महान पत्रकार थे, उन्होंने नैतिकता की सही कसौटी दी थी। उनका कहना यही था कि हमे अपने काम का मूल्यांकन इस आधार पर करना चाहिए कि उसका अंतिम पंक्ति के व्यक्ति पर क्या असर पड़ता है। आप भी इस अंतिम कतार के व्यक्ति पर ध्यान जरूर दीजिएगा और इसकी तस्वीर को अपने जेहन में जरूर रखिएगा, जिससे आप भारत वर्ष को सही मायने में मजबूत बना सकें।

मीडिया स्त्री अधिकारों की दिशा में अब जागृत हो रहा है, आप सब को प्रयास करना चाहिए कि मीडिया की प्राथमिकताओं ने नारी गरिमा और नारी अधिकार हमेशा रहे।

मीडिया को वंचित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए भी काम करना चाहिए ताकि निर्धनों को मुख्यधारा में लाया जा सके।

पूरी दुनिया में पर्यावरण के खतरे बहुत बढ़े हैं, मुझे लगता है कि आप युवा पत्रकारों को पर्यावरण को संरक्षित करने और बचाने के पूरे प्रयास करने चाहिए।

भारत अब ज्ञान अर्थ व्यवस्था आधारित विश्व-शक्ति होने जा रहा है, और यह सब भारतीय लोगों की काबिलियत के निखरने से ही संभव हो सकेगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल कीजिये। अपने हुनर को तराशें और बड़ी से बड़ी चुनौती को हासिल करके, अपनी काबिलियत को सिद्ध करें। परिस्थितियां आपको आसान और कठिन चुनौती भरे रास्तों का विकल्प देंगी पर हमेशा ऐसा रास्ता चुनें जिसमें आपकी और समाज की तरक्की दिखती हो। आपके इसी निर्णय से ही आप भी निरंतर अपनी काबिलियत को निखारते हुए, राष्ट्र और समाज को बेहतर और मजबूत बनाने में योगदान दे सकेंगे।

और एक बात याद रखें कि सीखने की असली प्रयोगशाला है समाज। समाज में अगर आप हर दिन कुछ सीखने के संकल्प को लेकर चलेंगे तो अपनी हासिल की हुई शिक्षा में कुछ जोड़ सकेंगे। शिक्षा एक निरंतर चलने वाली सजीव प्रक्रिया है, मगर आप हर दिन कुछ सीखते नहीं हैं और अपना कुछ जोड़ते नहीं हैं तो शिक्षा अधूरी ही रहती है।

मध्यप्रदेश ने एक से बढ़कर एक पत्रकार विभूतियां देश को दी हैं, आप भी आने वाले समय में अपने समय के बेहतर संचारकर्मी हो सकते हैं, जो भारतवर्ष के नवोत्थान में सहायक होंगे।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को समझेंगे और डिजिटल भारत के सपने को साकार करने में अपना पूरा योगदान देंगे। हमारी मिली-जुली संस्कृति जिसमें विविधता और सहिष्णुता सहज रूप से है, इसके स्रोतों को हमें समझकर, इसमें रची-बसी परंपरा को अपने आचरण में भी लाना चाहिए।

अंत में, मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं अपना जीवन यशस्वी हो, आपका सामाजिक योगदान स्थायी रहे और आप सब विकसित भारतवर्ष को दुनिया में उसकी सही पहचान दिला सकें।

जय हिन्द!"

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AKT/BK/RK