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माह वर्ष
  • “सबका साथ सबका विकास” – प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) (12-मई,2017)
 
रसायन और उर्वरक मंत्रालय

“सबका साथ सबका विकास” – प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)

Indian Customs EDI System

संदर्भ सामग्री/तथ्य सामग्री

 

 

 

Ø  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था,

 

सस्ती दवाओं तक गरीबों की पहुंच होनी चाहिए; दवा के अभाव में गरीब की जान नहीं जानी चाहिए..... इसीलिए देश भर में जन औषधि केंद्रों की योजना बनाई गई है।

 

Ø  सबको सस्ती दरों पर बेहतर जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने देश भर में नवम्बर, 2008 को जन औषधि योजना की शुरुआत की। सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम फार्मा ब्यूरो (बीपीपीआई) के जरिये योजना को लागू किया जा रहा है। भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग का इस पर प्रशासनिक नियंत्रण है।  

Ø  सितंबर, 2015 में जन औषधि योजना में सुधार करके इसे प्रधानमंत्री जनौषधि योजना (पीएमजेएवाई)के रूप में विकसित किया गया। योजना में और तेजी लाने के लिए नवम्बर, 2016 में इसका 'प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना' (पीएमबीजेपी) के रूप में दोबारा नामकरण किया गया। वर्ष 2016-17 के लिए संसद में बजट पेश करते हुए माननीय वित्त मंत्री ने पीएमजेएवाई का विशेष उल्लेख किया था। माननीय वित्तमंत्री के बजट भाषण का एक उद्धरण नीचे दिया जा रहा है :

 

सस्ती दरों पर बेहतर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती रहा है। हम जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति को नया जीवन देंगे। वर्ष 2017 के दौरान प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत 3000 स्टोर खोले जायेंगे।

 

Ø  क्रियान्वयन की स्थिति : -

 

देश में खोले जाने वाले पीएमबीजेके की वर्षवार और मौजूदा स्थिति :

 

31.03.14 को

31.03.15 को

31.03.16 को

31.03.17 को

30.04.2017 को

80

99

269

1080

1253

 

 

31 मार्च, 2016 तक

30 अप्रैल, 2017 तक

राज्यों/ केद्र शासित प्रदेश की संख्या

22

29

जिलों की संख्या

149

419

 

Ø  योजना की प्रमुख विशेषताएं :

 

  • गुणवत्ता औषधि तक सुगमता सुनिश्चित करना
  • गुणवत्ता जेनेरिक दवाओं के दायरे को बढ़ाना ताकि दवाओं पर किए जाने वाले खर्च में कमी आए और इस तरह प्रति व्यक्ति उपचार पर होने वाले खर्च को दोबारा परिभाषित किया जाए
  • जेनेरिक दवाओं के विषय में शिक्षा और प्रचार के जरिये जागरुकता बढ़ाना ताकि दवाओं की गुणवत्ता की अवधारणा केवल महंगी कीमत तक सिमट कर न रहे
  • सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठनों, सोसाइटियों, सहकारी निकायों और अन्य संस्थानों के साथ जन कार्यक्रम 
  • सभी उपचारात्मक वर्गों में जहां भी आवश्यकता हो, कम उपचार खर्च और आसान उपलब्धता के जरिये बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच में सुधार लाकर जेनेरिक दवाओं के लिए मांग बढ़ाना

 

Ø  गुणवत्ता सुनिश्चित करना : उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दवाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन आदर्श निर्माण प्रक्रिया (जीएमपी), वर्तमान आदर्श निर्माण प्रक्रिया (यूएसएफडीए) और प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि केंद्रों को दवा आपूर्ति करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से खरीदा जाता है। दवा के प्रत्येक बैच की जांच बीपीपीआई के नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड केलीब्रेशन लेब्रोटरी (एनएबीएल) द्वारा प्रमाणित प्रयोगशालाएं करती हैं। इसके तहत दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव को आवश्यक मानकों पर परखा जाता है। इन प्रयोगशालाओं से प्रमाणित होने के बाद ही दवाओं को सी एंड एफ एजेंटों, वितरकों और जन औषधि केंद्रों को भेजा जाता है।   

 

Ø  संभावित प्रभाव : पीएमबीजेपी का प्रयास है कि ब्रांडेड उत्पादों की तुलना में 50 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाये ताकि सबको, खासतौर से गरीब व्यक्तियों को सस्ती दरों पर दवा उपलब्ध हो। परिणामस्वरूप लोगों के दवा खर्च में काफी कमी आई है। 

 

Ø  बजट और खर्च की स्थिति 2008-18 के वित्त वर्ष के संबंध में पीएमबीजेपी के लिए बजट प्रावधान और खर्च का ब्योरा इस प्रकार है :

 

वर्ष

जारी होने वाली धनराशि

(रुपये में)

खर्च होने वाली धनराशि (रुपये में)

2008 - 09

17250000/-

5505000/-

2009 - 10

20000000/-

10624000/-

2010 - 11

30000000/-

12039000/-

2011 - 12

शून्य

10580000/-

2012 - 13

16600000/-

22482000/-

2013 - 14

152000000/-

14563000/-

2014 - 15

शून्य

137612000/-

2015 - 16

169147000/-

135238000/-

2016 - 17

497500000/-

497500000/-

2017 - 18

शून्य

-

 

 

Ø  आवेदकों को वित्तीय सहायता पीएमबीजेपी केंद्र खोलने के लिए आवेदकों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता इस प्रकार है :

 

() सरकारी अस्पतालों/ मेडिकल कॉलेज परिसरों में पीएमबीजेपी केंद्र खोलने के लिए 2.50 लाख रुपये तक की एक मुश्त वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसका विवरण इस प्रकार है :

(i) फर्नीचर और अन्य सामानों के संबंध में 1 लाख रुपये की अदायगी।

(ii) शुरूआत में मुफ्त दवाओं के रूप में 1 लाख रुपये।

(iii) कम्प्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर, स्कैनर आदि के लिए 50 हजार रुपये की अदायगी।

     

() बीपीपीआई द्वारा उपलब्ध साफ्टवेयर के इस्तेमाल से चलने वाले इंटरनेट के जरिये बीपीपीआई मुख्यालयों से जुड़े जो निजी उद्यमी/ फार्मासिस्ट / एनजीओ / धर्मादा संगठन/ पीएमबीजेपी केंद्र चला रहे हैं, उन्हें 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। यह धनराशि उन्हें 15 प्रतिशत मासिक बिक्री पर मिलेगी जिसकी मासिक सीमा 10 हजार रुपये होगी और कुल सीमा 2.5 लाख रुपये होगी।

                                     

() पूर्वोत्तर राज्यों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों में प्रोत्साहन दर 15 प्रतिशत होगी और उसकी मासिक सीमा 15,000 रुपये और कुल सीमा 2.5 लाख रुपये होगी।

 

() अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति/ दिव्यांग आवेदकों को 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि के दायरे में 50,000 रुपये की कीमत की दवाइयां दी जायेंगी। यह धनराशि उन्हें 15 प्रतिशत मासिक बिक्री पर मिलेगी जिसकी मासिक सीमा 10 हजार रुपये होगी और कुल सीमा 2.5 लाख रुपये होगी।

 

Ø  रोजगार सृजन की क्षमता : पीएमबीजेपी से स्व रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं। इससे व्यापार शुरू करने के लिए बेराजगार फार्मसिस्टों को सहायता मिलेगी।

 

Ø  योजना शुरू होने से अब तक की प्रगति :

 

पैमाना

2008-14

2014-17

योजना का नाम

जन औषधि योजना (जेएवाई)

प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना  (पीएमबीजेपी)

31 मार्च को क्रियाशील प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि केंद्रों की संख्या

2008-09 - 7

2009-10 - 36

2010-11 - 43

2011-12 - 55

2012-13 – 98

2013-14 - 104

2014-15 - 99

2015-16 - 269

2016-17 - 1080

2017-18 -  1253

(30 अप्रैल, 2017 तक)

संचालन एजेंसियों की पात्रता शर्तें

केवल सरकारी अस्पतालों में खुले केंद्र

अस्पतालों के परिसरों के बाहर भी केंद्र खोले जा सकते हैं। सभी एनजीओ/धर्मादा सोसाइटी/ संस्थान/ स्वः सहायता समूहों/ बेरोजगार फार्मासिस्टों/ डाक्टरों/ पंजीकृत डॉक्टरों को भी औषधि केंद्र खोलने के लिए पात्रता दी गई

योजना कवरेज-मौजूदगी

16 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश

29 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश

उत्पाद बास्केट

361 दवाइयां

600 दवाइयां और 154 शल्यचिकित्सकीय और खाने योग्य दवाइयां

उपलब्ध दवाइयां

90-100

561 दवाइयां और 128 शल्यचिकित्सकीय

उपचारात्मक समूहों का कवरेज

उत्पाद बास्केट अधूरा था

मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, हृदय रोग, कैंसर रोधी, आंत्रशोथ जैसे सभी 23 प्रमुख उपचारात्मक वर्ग संबंधी उत्पाद बास्केट  

आपूर्तिकर्ता

138 दवाओं के लिए सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम

सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम + 125 निजी आपूर्तिकर्ता

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

मौजूद नहीं

सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली

केंद्रीय भंडारण के प्रबंधन के लिए प्रोफेशनल एजेंसी

अद्यतन 8 सी एंड एफ और 43 वितरक

प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि केंद्रों के लिए व्यापार में मुनाफे का दायरा

16%

20%

वितरकों के लिए व्यापार में मुनाफे का दायरा

8%

10%

निजी पीएमबीजेपी केंद्रों के लिए प्रोत्साहन

1.5 लाख रुपये

2.5 लाख रुपये

सरकारी पीएमबीजेपी केंद्रों को सहायता अनुदान

सरकारी अस्पतालों के अंदर खोले गए पीएमबीजेपी केंद्र

रेलवे/ राज्य यातायात विभागों/ शहरी स्थानीय निकायों/ पंचायती राज संस्थानों/ डाकघरों/ रक्षा/ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों आदि जैसे सरकारी निकायों के स्वामित्व वाली इमारतों में राज्य सरकार या सरकारी एजेंसियों द्वारा खोले गए पीएमबीजेपी केंद्रों तक विस्तार

अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ दिव्यांग व्यक्तियों को सहायता

 

लागू नहीं

अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति/ दिव्यांग आवेदकों को 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि के दायरे में 50000 रुपये की कीमत की दवाइयां दी जायेंगी। यह धनराशि उन्हें 15 प्रतिशत मासिक बिक्री पर मिलेगी जिसकी मासिक सीमा 10 हजार रुपये होगी और कुल सीमा 2.5 लाख रुपये होगी।

 

 

Ø  राज्यों में क्रियाशील प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि केंद्र (पीएमबीजेपीके) :

 

क्र. स.

राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश

30 अप्रैल, 2017 तक क्रियाशील पीएमबीजेपीके

1

आन्ध्र प्रदेश

65

2

असम

19

3

अरुणाचल प्रदेश

20

4

बिहार

11

5

चंडीगढ़

4

6

छत्तीसगढ़

149

7

दादर और नगर हवेली

5

8

दिल्ली

18

9

गुजरात

119

10

हरियाणा

23

11

हिमाचल प्रदेश

17

12

जम्मू और कश्मीर

18

13

झारखंड

24

14

कर्नाटक

38

15

केरल

193

16

मध्य प्रदेश

37

17

महाराष्ट्र

84

18

मणिपुर

5

19

मिजोरम

3

20

नगालैंड

11

21

ओडिशा

31

22

पंजाब

31

23

राजस्थान

40

24

तमिलनाडु

53

25

तेलंगाना

22

26

त्रिपुरा

8

27

उत्तर प्रदेश

169

28

उत्तराखंड

30

29

पश्चिम बंगाल

6

कुल

1253

 

******

वीएल/आरआरएस/एसएस/एकेपी/सीडी/एमबी



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