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आदिवासी मामलों के मंत्रालय

वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत 27 लाख से अधिक दावों का निपटारा
संदर्भ सामग्री

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       अनुसूचित जनजाति एवं अन्‍य पारंपरिक वनवासी (वनाधिकार की मान्‍यता) अधिनियम 2006 के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति और पारंपरिक वनवासियों के वनाधिकार को मान्‍यता दी गई है। इस अधिनियम के अंतर्गत वे सभी लोग आ जाते हैं, जो कई पीढि़यों से वनों में रहते आए हैं, और जिनके अधिकारों को अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत 32.22 लाख से अधिक दावे दायर किए गए, जिनमें से 37 लाख, 36 हजार 827 दावों का निपटारा किया जा चुका है। इस तरह कुल 86 प्रतिशत दावों का निपटारा हो चुका है। यह सूचना 31 मई, 2012 को प्राप्‍त रिपोर्ट पर आधारित है।

       अधिनियम की धारा तीन के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति और अन्‍य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों को मान्‍यता दी जानी है। उक्‍त धारा में जिन वनाधिकारों का उल्‍लेख किया गया है, उनमें से एक अधिकार स्‍वामित्‍व, वनों की छोटी-मोटी पैदावारों को जमा करने, उनका इस्‍तेमाल करने और उनके उपभोग से संबंधित है। ये पैदावारें पारंपरिक रूप से गांव की सीमा के अंदर या बाहर जमा की जाती रही हैं। दिसंबर 2007 से यह अधिनियम लागू कर दिया गया। अधिनियम की शर्तों और नियमों के अनुसार अधिनियम को कार्यान्वित करने की जिम्‍मेदारी राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। इस अधिनियम के अंतर्गत वनाधिकार के दावे अनुसूचित जनजाति एवं अन्‍य पारंपरिक वनवासी (वनाधिकार की मान्‍यता) नियम 2008 के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। नियमों को 01 जनवरी, 2008 को अधिसूचित किया गया। अधि‍नियम के कार्या‍न्‍वयन और दावों को खारिज किए जाने वाली समस्‍या के हल के लिए मंत्रालय ने निम्‍नलिखित उपाय भी किए है -

1. राज्‍य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी रद्द होने वाले दावों का वर्गीकरण करें और उसे एकरूपता प्रदान करें। ये सभी कार्य ग्राम सभाओं और उपखंड  स्‍तरीय समितियों पर आधारित होंगे, ताकि दावों के खारिज होने के कारणों का पता लगाया जा सके।

2. राज्‍य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे ग्राम सभाओं के सहयोग से दावेदारों की कठिनार्इयों को दूर करें, ताकि उनके दावों का सही अनुमान लगाया जा सके।

3. राज्‍य सरकारों को यह सलाह भी दी गई है कि स्‍वाभाविक न्‍याय के तहत दावे दायर करने की तारीख उस दिन से मानी जाए, जिस दिन आदेश जारी किया गया है। इसी तरह जनपदीय स्‍तर की समिति द्वारा रद्द किए गए दावों पर भी यही नियम लागू होगा।

4. दावों के खारिज होने के कारणों और उनके वर्गीकरण को तय करने के लिए नई दिल्‍ली में राज सचिवों तथा जनजातीय कल्‍याण विकास विभाग के आयुक्‍तों की एक समीक्षा बैठक भी बुलाई गई थी।

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वि.कासोटिया/अरूण/तारा - 177

 

 



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