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माह वर्ष
  • भारत में भारी अभियंत्रण उपकरण एवं मशीन यंत्र उद्योग (13-जून,2013)
  • केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस (10-जून,2013)
  • चुनाव सुधारों पर परामर्श पत्र (07-जून,2013)
  • वर्ष 2012-13 के दौरान संगीत नाटक अकादमी की प्रमुख गतिविधियां (05-जून,2013)
  • सब्सिडीयुक्‍त अनाज उपलब्‍ध कराने के लिए योजनाएं (04-जून,2013)
  • युवा साथी-युवा वालंटीयर गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम (04-जून,2013)
  • संस्‍कृति मंत्रालय के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में कार्यक्रम (04-जून,2013)
  • संस्‍कृति मंत्रालय : शारीरिक दृष्टि से बाधित व्‍यक्तियों के कल्‍याण के उपाय 2012-13 (03-जून,2013)
 
आदिवासी मामलों के मंत्रालय

आदिवासी उत्पादों का विपणन विकास
संदर्भ सामग्री

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आदिवासी सहकारी विपणन विकास फेडरेशन लिमिटेड (ट्राइफेड) की स्थापना अगस्त 1987 में तत्कालीन कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बहु राज्य  सहकारी अधिनियम 2002 द्वारा की गई। स्थापना का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की लघु वन उपज (एमएफपी) और अधिशेष कृषि उपज (एसएपी) के व्यवसाय को संस्थागत बनाकर देश के आदिवासी समाज का सामाजिक आर्थिक विकास करना था, क्योंकि आदिवासी अपनी जीविका के लिए इन्ही प्राकृतिक उत्पादनों पर निर्भर करते हैं। कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि आदिवासी लोग बिचौलियों, भ्रष्ट व्यापारियों के कारण अपने उत्पादनों का उचित मूल्य नहीं प्राप्त कर पाते।

ट्राइफेड से यह अपेक्षा भी की गई थी कि उचित मूल्यों पर उत्पादनों की खरीदारी को सुनिश्चित करके आदिवासियों की सहायता हो सकेगी। इसके अतिरिक्त राज्य के आदिवासी सहकारी निगमों, राज्य वन विकास निगमों और आदिवासी उत्पादनों का व्यवसाय करने वाली अन्य राज्य स्तर की एजेंसियों को बाजार समर्थन उपलब्ध करना भी ट्राइफेड के दायित्वों में शामिल था। इसलिए ट्राइफेड ने अपनी स्थापना के बाद से ही लघु वन उपज (एसएफपी) और कृषि उत्पादों की खरीदारी पर ही ध्यान केंद्रित रखा है, ताकि आदिवासियों को उनके उत्पादनों के उचित मूल्य मिल सकें और उनके उत्पादों की खरीदारी करने वाली सदस्य सोसायटियों को इस माल की बिक्री के काम में सहायता की जा सके।

ट्राइफेड को व्यवसायिक तौर पर नहीं बल्कि कल्याणकारी गतिविधि के तौर पर एमएफपी का कारोबार चलाना था। इसके अलावा ट्राइफेड को सस्ते दामों पर व्यवसायिक उत्पादनों की खरीदारी और ज्यादा से ज्यादा दामों पर बेचे जाने की चिंता किये बिना एमएफपी का व्यवसाय करना था। परिणामस्वरूप ट्राइफेड को 31 मार्च 2003 तक 92.62 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा, जिसके कारण केंद्र द्वारा प्रदत्त इक्विटी शेयर पूंजी समाप्त हो गई।

 

 

 

ट्राइफेड को मूल्य समर्थन की पिछली योजना

ट्राइफेड को एमएफपी के व्यवसाय में हुए नुकसान की भरपाई के लिए आदिवासी मामलों के मंत्रालय द्वारा ट्राइफेड को केंद्र की समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत अनुदान के रूप में सहायता की जाती रही है। केंद्र सरकार की ओर से समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत 1990-91 से 2006-07 तक 51.40 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी थी।

ट्राइफेड के उद्देश्यों में परिवर्तन

      वर्ष 2003 में पिछले कार्यकलापों की गहराई से समीक्षा और ध्यानपूर्वक विचार-विमर्श के बाद ट्राईफेड की गतिविधियों नया रूप दिया गया। इस नई रणनीति के तहत ट्राइफेड एमएफपी और कृषि उत्पादों यानी एपी की थोक खरीदारी के बजाए आदिवासी उत्पादों के विपणन विकास पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। इस तरह अब ट्राइफेड ने अपने सदस्य संगठनों के लिए सेवा प्रदाता और आदिवासी उत्पादों और उत्पादनों के ‘’विपणन परिवर्धक’’ का रूप ले लिया।

ट्राईफेड राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी कला और शिल्प की सीधे रूप से प्राप्ति सहित सभी आदिवासी उत्पादनों के विपणन विकास के काम करने वाला, भारत सरकार का एकमात्र संस्थान है। इस तरह ट्राइफेड समाज के इस असंगठित वर्ग को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

ट्राइफेड अपनी ट्राइब्ज इंडिया नामक दुकानों और राज्य इम्पोरियम के माध्यम से कन्साइनमेंट के आधार पर आदिवासी उत्पादों का विपणन करता आ रहा है। यह वर्ष 2007-08 में शुरू होने वाली एक नई योजना है जो ट्राइफेड ने अपनी विपणन और अन्य गतिविधियां जारी रखने के उद्देश्य से पहली बार अपना कोई रोडमैप तैयार किया है जिसमें ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) में प्रस्तावित उसकी गतिविधियां शामिल की गईं हैं। योजना आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इस मंत्रालय ने आदिवासी उत्पादों/उत्पादनों का विपणन विकास योजना के अंतर्गत ट्राइफेड के इस नए रोडमैप को मंजूरी दे दी। इस नई योजना के रोडमैप के तहत ट्राइफेड 2007-12 की पंचवर्षीय योजना निम्न चार गतिविधियों पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा।

1.      फुटकर विपणन विकास कार्य

2.       एमएफपी विपणन विकास कार्य

3.      आदिवासी दस्तकारी/एमएफपी भंडारण करने वालों के व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन

4.      शोध विकास/बौद्धिक सम्पदा अधिकार कार्य

 

स्वीकृत रोडमैप के तहत केन्द्र सरकार, ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान ट्राइफेड को 69.59 करोड़ रुपए का अनुदान उपलब्ध कराएगी।

जिसकी गतिविधिवार विवरण इस प्रकार है -

 

 

(लाख रुपए में)

 

गतिविधि

2007-08

2008-09

2009-10

2010-11

2011-12

कुल पांच वर्षों के लिए

मंत्रालय से धन की आवश्यकता

खुदरा विपणन विकास

550

623

392

-10

-243

1312

एमएफपी विपणन विकास

761

710

500

380

414

2765

आदिवासी दस्तकारों और एमएफपी भंडारण करने वालों का व्यवसायिक प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन

371

403

438

488

530

2230

शोध एवं विकास

आईपीआर गतिविधि

187

146

119

99

101

652

 

कॉलम अ, ब, स, द के लिए वांछित धनराशि

 

 

 

 

 

 

 

 

     

इस योजना के अंतर्गत सहायता की शर्तों के अनुसार ट्राफेड ने वर्ष 2007-08 के लिए 26-11-2007 को आदिवासी मामलों के मंत्रालय साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

 

मीणा/शीराजी/अर्जुन -3306   

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 



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