विज्ञप्तियां उर्दू विज्ञप्तियां फोटो निमंत्रण लेख प्रत्यायन फीडबैक विज्ञप्तियां मंगाएं Search उन्नत खोज
RSS RSS
Quick Search
home Home
Releases Urdu Releases Photos Invitations Features Accreditation Feedback Subscribe Releases Advance Search
हिंदी लेख
माह वर्ष
  • गैर-संचारी रोगों की रोकथाम (20-फरवरी,2017)
  • भारत में भाषा विविधता का संरक्षण (20-फरवरी,2017)
  • विश्‍व सामाजिक न्‍याय दिवस के अवसर पर भारत निष्‍पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्‍प (20-फरवरी,2017)
  • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (16-फरवरी,2017)
  • रेडियो आप हैं (13-फरवरी,2017)
  • समय के साथ कदमताल मिलाता रेडियो (12-फरवरी,2017)
  • राष्ट्रीय डीवॉर्मिंग दिवस (10-फरवरी,2017)
  • रियल स्‍टेट और आवास के लिए परिवर्तनकारी बजट (09-फरवरी,2017)
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (07-फरवरी,2017)
  • आदित्य नौका: स्वच्छ ऊर्जा के लिए वाईकॉम का नया सत्याग्रह (06-फरवरी,2017)
  • बजट: प्रचार पर कम; वास्तयविकता पर अधिक जोर (06-फरवरी,2017)
  • इस्पात उद्योग: विकास की बाधाओं को दूर करना (03-फरवरी,2017)
  • बजट में किसानों की आय बढ़ाए जाने पर फोकस (03-फरवरी,2017)
  • सस्ती स्वास्थ्य सुविधा (03-फरवरी,2017)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

गैर-संचारी रोगों की रोकथाम

 

1.png

* संतोष जैन पासी

** आकांक्षा जैन

 

"हर इंसान का स्वास्थ्य या बीमारी स्वयं उसके हाथ में ही है"

                                                                                                                           - भगवान बुद्ध

 

 

हमारा देश बीमारी के दोहरे भार से ग्रस्त है। गैर – संचारी रोग (एनएसडी) एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। एक ओर गरीबी, अभाव और पर्यावरण की घटिया स्थिति से जुड़ी हुई पोषक तत्वों की कमी / संक्रामक रोगों की भरमार है जबकी दूसरी ओर भोजन की अधिकता / असंतुलन और चयापचय गड़बड़ियों के कारण होने वाली गैर – संचारी बीमारियां मौजूद हैं। गैर – संचारी रोगों की महामारी मुख्य रूप से आधुनिकीकरण, शहरीकरण, निष्क्रिय जीवन शैली और लंबी आयु की देन हैं। शरीर का अधिक वजन /  मोटापे, हृदय रोग की बीमारियां और टाइप-2 मधुमेह, कैंसर, सांस की बीमारियों और मानसिक बीमारियों में लगातार वृद्धि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह तथ्य उजागर किया है कि अगर यह स्थिति इसी तरह जारी रही तो 2030 तक विश्व स्तर पर एनसीडी के कारण होने वाली वार्षिक मृत्यु दर 55 मिलियन के स्तर को छू लेगी।

 

2.png

 

डब्ल्यूएचओ की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में एनसीडी के कारण 60 प्रतिशत लोगों की मृत्यु होती है और हर 4 में एक व्यक्ति को एनसीडी के कारण 70 साल की उम्र से पहले मरने का खतरा मंडरा रहा है। डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, क्षेत्रीय निदेशक, डब्ल्यूएचओ-एसईएआर ने यह टिप्पणी की है कि एनसीडी युवा पीढ़ियों को भी प्रभावित कर रही है जिसके कारण सामाजिक आर्थिक विकास बाधित हो रहा है। संभावनाओं से पूर्ण उत्पादक वर्षों (34 से 64 वर्ष तक) की हानि के कारण घरबार, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारी नुकसान हो रहा है।

 

3.png

 

 

एनसीडी बोझ को उचित निवारक और उपचारात्मक कार्रवाई के माध्यम से बहुत कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य वर्धक भोजन, शारीरिक गतिविधियों में वृद्धि, वजन प्रबंधन और तंबाकू / नशीले पदार्थ और शराब का उपयोग न करना इन बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में  महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। 80 प्रतिशत से अधिक सीवीडी और टी2डीएम तथा 33 प्रतिशत कैंसर को जीवन शैली में बदलाव लाकर रोका जा सकता है। पोषक और संतुलित आहार लेना इन बीमारियों की रोकथाम में बहुत महत्वपूर्ण है।

 

आदर्श शरीर भार बनाए रखने, ली जाने वाली कुल ऊर्जा और ऊर्जा की कुल खपत को संतुलित किये जाने की जरूरत है। आहार में प्रोटीन पर्याप्त होना चाहिए। आहार में वसा और गुणवत्ता / मात्रा तथा एनसीडी के मध्य बहुत गहरा संबंध है। आहार में वसा / तेल, विशेष रूप से संतृप्त वसा के अधिक प्रयोग से सीएचडी, कैंसर, टी2डीएम और उच्च रक्तचाप का अधिक खतरा हो जाता है। संतृप्त वसा की जगह पीयूएफए युक्त तेलों के उपयोग से सीएचडी दरों को कम किया जा सकता है। खाने में वसा की मात्रा ग्लूकोज टोलरेंस और इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता पर भी प्रभाव डालती है। जैतून, सरसों और मूंगफली के तेलों जैसे पीयूएफए युक्त तेलों का उपयोग करने से सीएचडी और फेफड़ों / गले / स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर के खतरों को कम किया जा सकता है। इसके विपरीत ट्रांस वसा सीरम लिपिड पर अवांछनीय प्रभाव के माध्यम से सीएचडी जोखिम को कम किया जा सकता है।

 

एनसीडी की रोकथाम / प्रबंधन के लिए सब्जियों (एक दिन में दो – तीन बार) और फलों (एक दिन में दो बार) का अधिक प्रयोग करने से खाने में फाइबर, फाइटोकेमिकल्स, एंटीऑक्सिडेंट और विभिन्न विटामिन / खनिज की पर्याप्त मात्रा शरीर को उपलब्ध कराना आवश्यक है। खाने में फाइबर की उचित मात्रा मेदार्बुदजनक लिपो प्रोटीन, रक्तचाप और थ्रोंबोजेनेसिस पर उचित प्रभाव डालकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फाइबर युक्त खाने के नियमित सेवन से न केवल वजन प्रबंधन में मदद मिलती है बल्कि सीरम लिपिड को कम करने, ग्लूकोज चयापचय में सुधार लाने, रक्तचाप को नियमित करने और ऊतकों की कष्टदायी सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रोबायोटिक्स, प्रिबायोटिक्स और सिमबियोटिक्स से लिपिड प्रोफाइल और ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार होता है और कोलोरेक्टल कैंसर को भी रोका जा सकता है।

 

 

सभी प्रकार के तंबाकू और शराब के प्रयोग से एनसीडी, विशेष रूप से क्रोनिक प्रतिरोधी फेफड़े की बीमारी के लिए प्रमुख जोखिम कारक हैं। शारीरिक निष्क्रियता वैश्विक मृत्यु दर ( 6 प्रतिशत) और एनसीडी में मुख्य योगदान करती है। मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारक और भावनात्मक तनाव (अवसाद, चिंता और पुराने तनाव) भी एनसीडी के रोगजनन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

 

2012 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने 2025 तक 25 प्रतिशत एनसीडी मृत्यु दर घटाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण 25 तक 25  का लक्ष्य का समर्थन किया था। भारत ने इस लक्ष्य पर पहुंचने के लिए सबसे पहले निर्दिष्ट राष्ट्रीय लक्ष्य / संकेतकों को विकसित करने की पहल की है और एनसीडी से संबंधित समय से पहले होने वाली मौतों की संख्या को कम करने के लक्ष्य पर पहुंचा है।

 

लगातार बढ़ रहे एनसीडी बोझ को नियंत्रित करने के लिए हमारी सरकार ने राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम और कैंसर, मधुमेह, सीवीडी और हृदयघात की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीडीसीएस) सहित अनेक कार्यक्रमों की शुरूआत की है। एनपीडीसीएस का मुख्य उद्देश्य एनसीडी का जल्दी पता लगाना और नियंत्रण करना, जीवन शैली में परिवर्तनों पर जागरूकता पैदा करना, मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का क्षमता निर्माण और उसे मजबूती प्रदान करना है। एनएचएम के तहत एनसीडी क्लीनिक, जिला अस्पतालों / सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सीसीयू के माध्यम से निदान /  चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी।

 

मार्च 2017 के अंत (पहला चरण) तक, 100 जिलों (32 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों) में जनसंख्‍या आ‍धारित स्‍क्रीनिंग की जाएगी; मधुमेह, उच्‍च रक्‍तचाप और आम कैंसर के लिए परिचालनात्‍मक स्‍क्रीनिंग दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। जोखिम की अवस्‍था वाले लोगों के परामर्श के लिए डेटा एकत्र किए जाएंगे। इसके बाद प्रतिरोधी सांस की पुरानी बीमारियां भी इसमें शामिल की जाएंगी और इस प्रोग्राम को आगे बढ़ाया जाएगा। 

 

आयुष मंत्रालय ने योग प्रोटोकोल तैयार करने के लिए विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है और उसकी अनुसंधान संस्‍थाओं (केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद और केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद) ने एनपीडीसीएस के साथ आयुर्वेदिक, होम्‍योपैथी और यूनानी के एकीकरण के लिए पहल शुरू कर दी है। इसके बाद, लोगों में आहार संबंधी स्‍वस्‍थ आदतें/जीवनशैली के प्रति जागरूकता पैदा करने, उसे अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन - 'mDiabetes' शुरू किया गया है। एनसीडी संबंधित अनुसंधान/प्रशिक्षण गतिविधियों में सहायता के लिए विभिन्‍न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों को आपस में जोड़ने के लिए भारतीय एनसीडी नेटवर्क बनाया गया है।

मौजूदा समग्र स्‍वास्‍थ्‍य बजट (2017-18) को 39,879 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 48, 878 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जोकि कुल बजट का 2.27 प्रतिशत है।

 

ऐसी उम्‍मीद है कि निरोधी स्‍वास्‍थ्‍य वाले नजरिए को अपनाने से संबंधित जागरूकता पैदा करने के लिए पर्याप्‍त संसाधन प्रदान किए गए हैं। एनसीडी के प्राथमिक, गौण और तृतीय स्‍तर पर रोकथाम के लिए, जीवनशैली को बेहतर बनाने के उद्देश्‍य से आहार संबंधी व्‍यवहारों को सुधारने और शारीरिक सक्रियता पर जोर दिया जाएगा। साथ ही धुम्रपान/ तंबाकू के सेवन को खत्‍म करने, शराब पर रोक लगाने और उचित तनाव प्रबंधन पर भी जोर दिया जाएगा। यह संतोषजनक बात है कि सरकार ने इस दिशा में विभिन्‍न कदम उठाएं हैं, जिससे लोग जीवंतता के साथ स्‍वस्‍थ जिंदगी जी सकते हैं।  

*******

*डॉ. संतोष जैन पासी – सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण परामर्शदाता; पूर्व निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनोमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय

 

** सुश्री आकांक्षा जैन – पीएच-डी स्‍कॉलर, एमिटी विश्‍वविद्यालय, नोएडा, उत्‍तर प्रदेश; अनुसंधान अधिकारी – सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य पोषण विभाग, एलएसटेक वेंचर्स लिमिटेड, गुड़गांव, हरियाणा, भारत

 

इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं। 

 

***

वीके/आईपीएस/वीएस/सीएस – 27

पूरी सूची – 20.02.2017



विशेष लेख को कुर्तिदेव फोंट में परिवर्तित करने के लिए यहां क्लिक करें
डिज़ाइन एवं होस्‍ट राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी),सूचना उपलब्‍ध एवं अद्यतन की गई पत्र सूचना कार्यालय
ए खण्‍ड शास्‍त्री भवन, डॉ- राजेंद्र प्रसाद रोड़, नई दिल्‍ली- 110 001 फ़ोन 23389338