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विशेष सेवा और सुविधाएँ

भारत की जनगणना: नवप्रवर्तन की कहानी
विशेष लेख : जनगणना 2011

विशेष लेख : जनगणना 2011 

            

      भारत की जनगणना एकमात्र ऐसा जरिया है जिससे भारत के लोगों के बारे में विभिन्‍न जानकारियां एकत्र की जाती हैं। जनगणना, आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, आवास और घरेलू सुख सुविधाओं, शहरीकरण, जन्‍म दर और मृत्‍यु दर, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, भाषा,धर्म, पलायन, विकलांगता और अनेक अन्‍य सामाजिक-सांस्‍कृतिक और जनगणना संबंधी आंकड़ों के बारे में सांख्यिकीय जानकारी जुटाने का सबसे विश्‍वसनीय स्‍त्रोत है।

      पिछले 130 साल से अधिक समय से चल रही इस कवायद के हर 10 साल में सटीक नतीजे सामने आते हैं। भारत के विभिन्न भागों में 1872 में पहली जनगणना हुई ।

      हाल में देश में 15 वीं राष्ट्रीय जनगणना 2011 संपन्न हुई। आजादी के बाद यह सातवीं जनगणना थी। यह बात गौर करने लायक है कि युद्ध, महामारियों, प्राकृतिक आपदा और राजनैतिक उथल-पुथल जैसी प्रतिकूल पस्थितियों के बावजूद जनगणना कराने की परंपरा को जारी रखा गया। दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं जो ऐसी शानदार परंपरा पर गौरवान्वित महसूस कर सकते हैं।

        जनगणना कराने की जिम्मेदारी भारत सरकार के गृहमंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयन कार्यालय और जनगणना आयुक्त की है। इसमें संकल्‍पना, योजना और देश में जनगणना के काम को अमल में लाना शामिल है। संगठन के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ( केन्द्र शासित दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जो गुजरात कार्यालय से संबद्ध है) में फील्ड अधिकारी हैं। इन फील्ड अधिकारियों के प्रधान जनगणना कार्य निदेशक होते हैं जो अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जनगणना कराते हैं।

 

कार्य प्रणाली

       भारत की जनगणना एक दशक में एक बार कराई जाती है। इसके अंतर्गत घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति के बारे में जानकारी एकत्र की जाती है और तीन सप्ताह की अवधि के लिए एक प्रश्नावली दी जाती है। इसके बाद पुनरीक्षण का काम किया जाता है। पुनरीक्षण के दौरान यदि गणनाकार के सर्वेक्षण और संदर्भ की तारीख/समय के बीच जन्म, मृत्यु और पलायन के कारण कोई परिवर्तन होता है तो उसे ठीक किया जाता है।

        वर्ष 2011 की जनगणना का कार्य दो चरणों में किया गया। पहले चरण में आवास के बारे में जानकारी को शामिल किया गया। इसमें मकान के इस्तेमाल, लोगों को उपलब्ध सुविधाएं और उनकी संपत्ति के बारे में जानकारी एकत्र की गई। यह कार्य विभिन्न राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से सितम्बर 2010 के बीच किया गया। इसका इस्तेमाल फरवरी 2011 में दूसरे चरण की जनगणना का खाका तैयार करने के लिए किया गया जिसे जनसंख्या गणना नाम दिया गया। दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती का कार्य देशभर में 9 से 28 फरवरी, 2011 के बीच हुआ। इस अवधि के दौरान जनगणना अघिकारी करीब 24 करोड़ घरों में गये और इनमें रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बारे में जानकारी एकत्र की। 28 फरवरी, 2011  को बेघर लोगों की गिनती की गयी। इसके बाद पुनरीक्षण का काम किया गया ताकि आधी रात के बाद एक मार्च, 2011 को जन्म और मृत्यु के बारे में सूचना डाली जा सके।

 

नवप्रवर्तन अपनाए गए    

भारत में जनसंख्या, आर्थिक विकास और नई टेक्नोलॉजी अपनाने खासतौर से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पिछले दशकों की तुलना में काफी बदलाव देखा गया। इससे जनगणना के प्रत्येक चरण का पुनर्मूल्यांकन करने और संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रक्रियाओं में बदलाव और उनके अधिकतम इस्तेमाल का अवसर मिला। योजना बनाने से लेकर जनगणना का कार्य करने तक प्रमुख उद्देश्‍य यह था कि सभी इलाकों से आंकड़े बिना किसी पूर्वाग्रह के एकत्र किये जाएं और इन्‍हें जल्‍द से जल्‍द जनता के लिए उपलब्‍ध कराया जाए.

      इस दिशा में उठाये गये कुछ कदम इस प्रकार है:

संपूर्ण जनगणना - जनगणना करते समय देश के भौगोलिक क्षेत्र को पूरी तरह शामिल करना जरूरी है। इसके लिए राज्यों से लेकर गांवो/कस्बों की सभी प्रशासनिक इकाईयों की सीमाएं दुरूस्त करना जरूरी है। सरकारी अधिसूचनाओं और मानचित्र के साथ 2011 की जनगणना में 35 राज्यों /केन्द्र शासित प्रदेशों, 640 जिलों, 5924 उप जिलों, 7935 कस्बों और 6,40,867 गांवों की प्रशासनिक सीमाओं के दायरे में परिवर्तन के बारे में सूचनाएं एकत्र की गयी। इन परिवर्तनों को डिजीटल मानचित्र में रिकॉर्ड किया गया। इसके साथ ही जनगणना  संगठन ने देश के 33 राजधानी शहरों के विस्तृत डिजीटल नक्शे तैयार करने का काम पूरा किया। इन नक्शों मे इमारतों, मकानों, अन्य भवनों, सड़कों और महत्वपूर्ण जगहों को विस्तार से दिखाया गया है।

 

विषय वस्‍तु की गुणवत्ता - जनगणना समय सारणी का डिजाइन- दो चरणों की जनगणना के लिए दो प्रश्नावली तैयार की गयी। इसका डिजाइन तैयार करने का काम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद को सौंपा गया, जिसने ऐसे डिजाइन तैयार किये जो इस्तेमाल करने में आसान थे। इसमें बार कोड़, यूनीक फार्म नम्बर और रंग जैसे अनोखे फीचर थे। इनसे गुणवत्ता के साथ सूचनाएं एकत्र में मदद मिली।

 

प्रशिक्षण - जनगणना कराने के लिए महत्वपूर्ण कार्य फील्ड अधिकारियों को सूचनाएं एकत्र करने के बारे में प्रशिक्षण देना है। जब तक 27 लाख कर्मचारी इसका तरीका नहीं समझेंगे तब तक आंकडें ठीक से एकत्र नहीं किये जा सकते। पहली बार स्थानीय भाषाओं में प्रशिक्षण देने के लिए गैर सरकारी संगठनों की सहायता ली गई। प्रशिक्षण की त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई। जिसमें राष्‍ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय प्रशिक्षक (90)  राज्य स्तर का मास्टर प्रशिक्षक (725) और जिला स्तर पर मास्टर प्रशिक्षक (54,000) शामिल किये गये। मास्टर प्रशिक्षक की यह जिम्मेदारी थी कि वह निचले स्तर पर 27 लाख गणना करने वाले/निरीक्षकों को प्रशिक्षण दें। एक मास्टर प्रशिक्षक के हिस्से में 50 गणना करने वाले आये। प्रशिक्षण के लिए ई-लर्निंग मॉड्यूल की भी शुरूआत की गई।

 

जनगणना में प्रचार अभियान - प्रचार अभियान एक महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि जनगणना का उद्देश्य देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बारे में व्यक्तिगत जानकारी हासिल करना है। यह भी जरूरी है कि गणनाकार जनसंख्या में लिंग और विकलांगता के बारे में जानकारी हासिल करें। घर-घर जाकर गणना करने वाले विशेषज्ञों के अभाव में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की सहायता से देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों को यह काम सौंपा गया। जनसंचार, लोगों तक पहुंचने और डिजीटल मीडिया के जरिये व्यापक प्रचार किया गया। हिन्दी में तैयार जानकारी का देश के विभिन्न भागों में इस्तेमाल करने के लिए 12भाषाओं में अनुवाद किया गया।

 

स्कूल कार्यक्रम में जनगणना- जनगणना 2011 के बारे में छात्रों को जानकारी देने के लिए देश भर में एक प्रगतिशील कार्यक्रम शुरू किया गया। जिसमें विशेष रूप से तैयार आकर्षक डिजाइन वाले स्कूल किट 593 जिलों में प्रत्येक जिले के करीब साठ से अस्सी स्कूलों में भेजे गए। इस किट में प्रत्येक स्कूल से अनुरोध किया गया कि वह छात्रों को जनगणना के महत्व के बारे में जानकारी दें। छठी,सातवीं और आठवीं  कक्षा के छात्रों पर विशेष ध्यान दिया गया जिनके लिए विशेष पाठ भेजे गये।

 

लिंग के बारे में जानकारी- हांलाकि 2001 की जनगणना में लिंग के बारे में आंकड़े एकत्र करने को प्राथमिकता दी गई। महिलाओं की संख्या, विवाहित है या नहीं, घर की मुखिया महिलाओं, महिलाओं में विकलांगता के बारे में आंक़डे एकत्र किये गये। 2001 की जनगणना में यह बात सामने आई कि अनेक गांवो/जिलों ने जिन थोड़ी सी महिलाओं के बारे में जानकारी दी, उनमें साक्षरता दर बहुत कम थी और कोई भी महिला नौकरी पेशा नहीं थी। सही-सही जानकारी हासिल करने के लिए जनगणना के विभिन्न चरणों में लिंग के मुद्दे को शामिल करने की कोशिश की गई। इनमें उन जिलों का पता लगाया गया जहां महिलाओं का लिंग अनुपात और साक्षरता कम है। इसके लिए 262 महत्वपूर्ण जिलों की पहचान की गई जिनके लिए प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेष आंकड़ा पत्र और पोस्टर तैयार किये गये और महिलाओं की स्थिति  के बारे में जानकारी देने के लिए इन्‍हें प्रत्येक प्रशिक्षक को दिखाया गया।  

 

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का इस्‍तेमाल - आज युवा वर्ग के बीच सोशल नेटवर्किंग साइटों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पहली 2011 की जनगणना में उन तक सीधे पहुंचने का प्रयास किया गया। फरवरी 2011 के पहले सप्‍ताह में फेसबुक और ट्विटर पर जनगणना 2011 समूह बनाया गया और इस पर लगातार सूचना डाली गई। इससे लोगों को जनगणना के बारे में प्रचार किया गया। बहुत कम अवधि में बहुत से लोग जिनमें अधिकांश युवा वर्ग शामिल था, इसके सदस्‍य बन गए। इस समय 20,000 से ज्‍यादा लोग इसके सदस्‍य हैं।

निर्धारित अवधि में फील्‍ड का काम पूरा करना और आंकड़े समय पर जारी करना

     जनगणना के आंकड़ों की प्रोसेसिंग करते समय जनगणना कार्यालय नवीनतम आंकड़े प्रोसेसिंग टेक्‍नोलॉजी अपनाने में आगे रहता है। आंकड़े जुटाने के लिए इस बार एक प्रमुख टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल किया गया ताकि आंकड़ों को पूरी तरह कम्‍प्‍यूटरीक़ृत किया जा सके। भारत दुनिया के उन बड़े देशों में से एक है जिसने आईसीआर टेक्‍नॉलॉजी का इस्‍तेमाल किया। जनगणना कार्यालय ने जब भारत में इस टेक्‍नोलॉजी को अपनाया था तब बहुत से लोग इसे जोखिम मान रहे थे क्‍योंकि इसका इस्‍तेमाल उस वक्‍त कुछ छोटे देश ही कर रहे थे और बड़े देशों ने इसका परीक्षण नहीं किया था। इससे न केवल आंकड़े जुटाने में समय की बचत हुई बल्कि आंकड़ों को सारणीबद्ध किया जा सका और लोगों को आंकड़े जल्‍द उपलब्‍ध कराए जा सके।

जनगणना सामग्री की सुपुर्दगी - वर्ष 2011 की जनगणना के लिए करीब 34 करोड़ जनगणना सूचीपत्रों, 60 लाख निर्देश पत्रों और अन्‍य प्रकाशित सामग्री और 18 भाषाओं का इस्‍तेमाल किया गया। करीब 2000 मीट्रिक टन सामग्री को देश की प्रत्‍येक तहसील के 17,000 स्‍थानों पर पहुंचाया गया। इसके बाद भरे हुए सूचीपत्रों को एकत्र करके 17 डेटा स्‍केनिंग सेंटर और 33 जनगणना कार्यालयों तक पहुंचाया जाना था। यह कार्य भारतीय डाक को दिया गया।

जन शिकायत और निगरानी - जनगणना से जुड़े विभिन्‍न मुद्दों पर जनता की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक कॉल सेंटर स्‍थापित किया गया। पुणे स्थित इस सुविधा का देशभर में 14 भाषाओं में विस्‍तार किया गया।

ग्रीन टेक्‍नोलॉजी अपनाना

     भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्‍त हर सप्‍ताह 640 जिलों के कलेक्‍टरों के साथ वीडियो कान्‍फ्रेंसिंग के जरिये जनगणना की प्रगति का निरीक्षण और निगरानी की।

खर्च

     जनगणना के दो चरणों पर करीब 2200 करोड़ रूपये खर्च किये गए। विश्‍व औसत की तुलना में यह राशि काफी कम है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सांख्यिकी प्रभाग द्वारा आयोजित 25वें जनसंख्‍या सम्‍मेलन के अनुसार दुनिया के देशों में जनगणना पर औसत खर्च 4.6 डॉलर प्रति व्‍यक्ति है। भारत में यह खर्च 0.5 डॉलर प्रति व्‍यक्ति है।  (पीआईबी फीचर)

* भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्‍त से प्राप्‍त जानकारी पर आधारित

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पंत/विनोद/कविता/मीना-136                      

             



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