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आवास और भवन निर्माण में बांस का इस्‍तेमाल
वि‍शेष लेख

वि‍शेष लेख                                                   

*आलोक देशवाल

      भवन निर्माण और अन्‍य प्रकार के निर्माण कार्यों में एक साझा सामग्री के रूप में सदियों से लकड़ी का इस्‍तेमाल होता रहा है। उसी प्रकार विश्‍व के कटिबंधीय और उप-कटिबंधीय क्षेत्रों में निर्माण सामग्री के रूप में बांस के इस्तेमाल की दीर्घकालिक और स्‍थापित परंपरा रही है। ब‍ढ़ती हुई वैश्‍विक चिंताओं के बीच बांस एक महत्‍वपूर्ण संसाधन है, जो कार्बन के प्रभावकारी पृथक्‍करण के साथ-साथ ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन में कमी लाने में मददगार है।  आधुनिक परिवेश में वनाच्‍छादित क्षेत्र तेजी से घट रहे हैं और इससे लकड़ि‍यों की उपलब्‍धता भी घट रही है। पिछले कई दशकों के दौरान संचालित अनुसंधान और विकास कार्यों से यह तथ्‍य प्रमाणित हुआ है कि बांस, लकड़ी का एक व्‍यावहारिक विकल्‍प हो सकता है और यह आवास और भवन निर्माण क्षेत्र के साथ ही कई बुनियादी कार्यों के लिए कई अन्‍य पारम्‍परिक सामग्रियों का स्‍थान ले सकता है। औद्योगिक प्रसंस्‍करण के माध्‍यम से इसके इस्‍तेमाल से उन मिश्रित सामग्रियों और घटकों के उत्‍पादन के लिए काफी संभावना का पता चला है, जो किफायती हैं और आवास और भवन निर्माण में ढांचागत तथा गैर-ढांचागत इस्‍तेमालों के लिए सफलतापूर्वक उपयोग में लाए जा सकते हैं। बांस की कुछ मुख्‍य विशेषताएं हैं, जो इन्‍हें भवन निर्माण के लिए एक संभावित सामग्री के रूप में लाता है, उसमें इसकी उच्‍च तन्‍यता शक्ति और वजन तथा मजबूती का बहुत अच्‍छा अनुपात होना शामिल है। यह 3656 किलोग्राम/वर्ग सेमी. तक दबाव झेल सकता है। सरल औजारों और मशीनों के द्वारा इसे आसानी से परखा जा सकता है। मजबूती और वजन के बीच बेहतर अनुपात होने के कारण बांस का इस्‍तेमाल एक भवन निर्माण सामग्री के रूप में होना स्‍वाभाविक है, क्‍योंकि यह हवा की तेज गति और भूकंप के समय भी मजबूती से टिका रहता है। इसके अलावा बांस कृषि-वानिकी क्षेत्र का एक पुनर्नवीकरणीय कच्‍चे माल के रूप में एक ऐसी सामग्री है, जिसको यदि समुचित रूप से उपचारित किया जाए और औद्योगिक रूप से प्रसंस्‍कृत किया जाए, तो इस प्रकार बांस से बनी सामग्रियां 30 से 40 वर्षों तक टिकाऊ हो सकती हैं। हालांकि प्रजातियों और उपचारों के प्रकार के अनुसार बांस के टिकाऊपन में काफी अंतर पाया जाता है,‍ फिर भी भवन निर्माण में विभिन्‍न इस्‍तेमालों के कारण बांस को एक पर्यावरण हितैषी, ऊर्जा-साधक और किफायती निर्माण सामग्री माना जाता है। निर्माण कार्यों में इस्‍तेमाल होने वाली बांस की कुछ प्रजातियों में बाम्‍बूसा बालकूआ, बाम्‍बूसा बाम्‍बोस, बाम्‍बूसा टुल्‍डा, डेन्‍ड्रोकलामुस गिगांसस, डेन्‍ड्रोकलामुस हेमिलटोनी, डेन्‍ड्रोकलामुस एस्‍पर आदि शामिल हैं। बांस एक अत्‍यधिक बहुपयोगी संसाधन है और यह व्‍यापक तौर पर उपलब्‍ध भी है। इस कारण गृह निर्माण और अन्‍य प्रकार के भवनों के निर्माण के लिए एक अभियंत्रण सामग्री के रूप में भी इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। दरवाजों के पर्दे, फर्श, छप्‍पर आदि तैयार करने में बांस का धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल होता है। पिछले कई वर्षों के दौरान निर्माण से जुड़े कई छोटे और मझौले ढांचा-प्रदर्श तैयार किए गए हैं। ये ढांचा-प्रदर्श विभिन्‍न प्रकार की जलवायु में बेहतर साबित हुए हैं। व्‍यापक तौर पर आवास और भवन निर्माण में बांस का इस्‍तेमाल बढ़ाने के क्रम में व्‍यावसायिकों और मकान मालिकों के बीच जागरूकता और आत्‍म-विश्‍वास कायम करना जरूरी है। इसकी स्‍वीकार्यता बढ़ाने और समुचित निर्माण के प्रयोगों को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से इसके प्रदर्शन और मानकीकरण पर आधारित संगठित कार्य की जरूरत है।     सरकार, आवास क्षेत्र को एक ऐसे माध्‍यम के रूप में महत्‍व देती है, जो पर्यावरण हितैषी और कि फायती भवन निर्माण सामग्रियों के उत्‍पादन को बढ़ाकर अधिकाधिक रोजगार के अवसर उपलब्‍ध कराता है। आवास और भवन निर्माण उद्योग प्राकृतिक खनिज संसाधनों और वनों के लिए सबसे बड़े उपभोक्‍ताओं में से एक है और यह लगातार महसूस किया जा रहा है कि उन अभिनव भवन निर्माण सामग्रियों और निर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, किफायती निर्माण और ऊर्जा संरक्षण के लिए अनुकूल है। देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में आवास की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यह एक सर्वश्रेष्‍ठ विकल्‍प हो सकता है। देश का लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र भूकंप, चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वाला है। इस कारण सरकारी नीतियों में भी आवास के लिए भूकंप-रोधी प्रौद्योगिकियों की रूपरेखा तैयार करने और उसे विकसित करने पर जोर दिया जाता है। भूकंप-रोधी आवास के लिए बांस के इस्‍तेमाल वाली निर्माण तकनीक को सबसे उपयुक्‍त माना जा रहा है।

      आवास के निर्माण में भवन निर्माण सामग्रियों की लागत लगभग 60 से 65 प्रतिशत होती है। भवन निर्माण की पारम्‍परिक सामग्रियों में निरंतर मूल्‍य वृद्धि और हमारी जनसंख्‍या के एक बड़े हिस्‍से की गृह निर्माण सामग्री पर आने वाली लागत को पूरा करने में असमर्थता के कारण हमें अन्‍य विकल्‍पों की तलाश करना भी जरूरी है, क्‍योंकि हमारी जनसंख्‍या का 30-35 प्रतिशत से अधिक भाग निम्‍न आय वर्ग है।

      बांस एक अत्‍यधिक बहुपयोगी संसाधन है और यह व्‍यापक तौर पर उपलब्‍ध भी है। इस कारण आवासों और अन्‍य भवनों के निर्माण के लिए एक अभियंत्रण सामग्री के रूप में इसे अपनाने की जरूरत है। बांस पर केंद्रित राष्‍ट्रीय मिशन के मुख्‍य उद्देश्‍यों में एक है- उन मूल्‍य संवर्द्धित उत्‍पादों को बढ़ावा देना, जिन्‍हें वाणिज्यिक और औद्योगिक तौर पर उत्‍पादित किया जा रहा है। बांस के इस्‍तेमाल पर आ‍धारित प्रदर्श परियोजनाओं से गृह निर्माण के लिए एक सामग्री के रूप में बांस के प्रयोग के बारे में काफी जागरूकता पैदा होगी। एक बार इसकी मांग उभरने के बाद उद्यमियों की ओर से निवेश होने पर स्‍वत: ही बांस आधारित सामग्रियों और घटकों की उपलब्‍धता अपने-आप बढ़ जाएगी।

      आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के अधीन भवन निर्माण सामग्री और प्रौद्योगिकी संवर्द्धन परिषद (बीएमटीपीसी) की ओर से बांस आधारित प्रौद्योगिकियों को विकसित करने का प्रयास निरंतर जारी है। यह परिषद विशेषकर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र और बांस के उत्‍पादक अन्‍य क्षेत्रों में इन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए बांस की चटाई के उत्‍पादन के लिए केंद्र स्‍थापित कर रही है। इसके बल पर बांस पर आधारित उत्‍पादों, प्रदर्श गृहों के निर्माण आदि के लिए बांस के प्रसंस्‍करण और उसके वाणिज्यिक उत्‍पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह परिषद बांस के प्रसंस्‍करण में स्‍थानीय कारीगरों को प्रशिक्षित करने के काम में भी जुटी है।

      बीएमटीपीसी ने भारतीय प्‍लाईवुड उद्योग अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्‍थान (आईपीआईआरटीआई), बंगलौर के साथ मिलकर बम्‍बू मैट कॉरूगेटिड शीट (बीएमसीएस) के निर्माण के लिए एक प्रौद्योगिकी विकसित की है, जो टिकाऊ, मजबूत, जलरोधी होने के साथ-साथ सड़नरोधी, कीटाणुरोधी, और अग्निरोधी भी है। मेघालय के बिरनीहाट में इसका वाणिज्यिक उत्‍पादन शुरू किया गया है। उपभोक्‍ताओं ने इस उत्‍पाद को हाथों-हाथ लिया है और यह देश के पूर्वोत्‍तर भाग में दिनों-दिन छप्‍पर का एक लोकप्रिय विकल्‍प बन रहा है। एक अनुमान के अनुसार पूरी क्षमता प्राप्‍त कर लेने के बाद यह इकाई बांस उत्‍पादन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 7,000 लोगों के लिए आजीविका का सृजन करेगी।

      बीएमटीपीसी ने मिजोरम और त्रिपुरा में से प्रत्‍येक राज्‍य में बांस के इस्‍तेमाल पर आधारित प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाले 10 प्रदर्श ढांचों के निर्माण का काम अपने हाथ में लिया है। इनमें आवास, ओपीडी भवन, पुस्‍तकालय भवन, पिकनिक स्‍थल, स्‍कूल आदि शामिल हैं। पारम्‍परिक निर्माण की तुलना में विभिन्‍न प्रकार के निर्माण कार्यों पर बांस आधारित प्रौद्योगिकियों का इस्‍तेमाल करने पर निर्माण कार्य की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आती है। विभिन्‍न प्रकार के ढ़ांचों के निर्माण के दौरान स्‍‍थानीय ठेकेदारों, राज-मिस्त्रियों और कारीगरों को भवन निर्माण में बांस के इस्‍तेमाल पर आधारित प्रशिक्षण दिया गया। इनके उपयोग की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

·         बांस के उपचारित स्‍तम्‍भ और बीम,

·         बांस के ग्रीड पर फेरसमेंट वाल,

·         बांस के उपचारित ट्रस, राफ्टर और पर्लिन,

·         दरवाजे के लिए लकड़ी के फ्रेम में तैयार बांस की चटाई,

·         बम्‍बू मैट कॉरूगेटिड रूफिंग शीट,

·         दरवाजे और खिड़की के फ्रेम के लिए स्‍थानीय तौर पर उपलब्‍ध लकड़ी,

·         आईपीएस फर्श आदि।

      बीएमटीपीसी ने बेंत और बांस प्रौद्योगिकी केंद्र (सीबीटीसी), गुवाहाटी, और राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय राज्‍यों में से प्रत्‍येक में बांस की चटाई के उत्‍पादन के लिए दो केंद्र स्‍थापित करने का विचार कर रहा है। इन केंद्रों का मुख्‍य उद्देश्‍य बांस आधारित भवन निर्माण के घटकों की विनिर्माण इकाइयों के लिए बांस की चटाइयों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि इनकी उत्‍पादकता और गुणवत्‍ता बढ़ सके और चटाई उत्‍पादन प्रक्रिया में प्रशिक्षण प्रदान करने तथा पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सके। पहले चरण में यह परिषद त्रिपुरा के कोवैफुंग, मिजोरम के सायरंग और बुआलपुई तथा मेघालय के सोखर नांगतलूह गांव में बांस की चटाई के उत्‍पादन के लिए केंद्र स्‍थापित करेगी। परिषद ने त्रिपुरा के कोवैफुंग में और मिजोरम के सायरंग में बांस की चटाई के उत्‍पादन के लिए केंद्रों की स्‍थापना का काम पहले ही पूरा कर लिया है। सीबीटीसी के सहयोग से यह परिषद बांस की चटाई के उत्‍पादन के प्रत्‍येक केंद्र से कारीगरों को बांस की चटाई के उत्‍पादन पर प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है। प्रत्‍येक उत्‍पादन केंद्र की उत्‍पादन क्षमता 300 चटाई प्रतिदिन होगी। एक अनुमान के अनुसार, प्रत्‍येक केंद्र 35 रूपए प्रति चटाई की दर से चटाई के उत्‍पादन में सक्षम होगा, जिसे 45 रूपए प्रति चटाई की दर से बेचा जा सकेगा। इस प्रकार प्रतिदिन लगभग 150 व्‍यक्ति प्रतिदिन का रोजगार सृजन हो सकेगा, जो प्रति वर्ष और प्रति केंद्र 45,000 श्रम दिवस प्रति वर्ष होता है। इसके अलावा ये केंद्र बांस के कचरे से बनी बांस की छडि़यों की आपूर्ति करके आयकर सृजन भी कर सकते हैं, जिनका उपयोग कारीगरों द्वारा हस्‍त-शिल्‍प के सामान बनाने में किया जा सकेगा। बांस की चटाई के उत्‍पादन केंद्रों द्वारा तैयार चटाइयों का इस्‍तेमाल उन विभिन्‍न निर्माताओं द्वारा किया जाना संभावित है, जो बम्‍बू मैट कॉरूगेटिड रूफिंग शीट, बम्‍बू मैट बोर्ड आदि का उत्‍पादन कर रहे हैं।* उप निदेशक (मीडिया और संचार), पसूका, नई दिल्‍ली

वि‍.कासोटि‍या/सुधीर/आजाद-202 

पूरी सूची - 03.11.2011



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