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  • 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस 2017 का जश्न (24-अक्टूबर,2017)
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  • कारीगरों और बुनकरों की चिंता (14-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्व: भारत की विविधता के अन्वेषण का एक विशेष अवसर (13-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्वः सब देखो अपना देश (13-अक्टूबर,2017)
  • किसानों को खेती में प्रवृत्त रखने की चुनौती (12-अक्टूबर,2017)
  • अहिंसक पथ के प्रेरक : महात्‍मा गांधी (11-अक्टूबर,2017)
  • ग्रामीण भारत में बदलाव (11-अक्टूबर,2017)
  • देश में अपराधी न्याय प्रणाली को फास्ट ट्रैक बनाने के लिये सीसीटीएनएस डिजिटल पुलिस पोर्टल का शुभारंभ (11-अक्टूबर,2017)
  • बेहतर जल प्रबंधन समय की जरूरत (05-अक्टूबर,2017)
  • गांधी जी के लिए अहिंसा स्‍वच्‍छता के समान थी (03-अक्टूबर,2017)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

कानूनी सहायता क्‍लीनिक योजना
विशेष लेख

विशेष लेख

      * के. के. पंत

      जैसा कि भारत अपने गांवों में रहता है, यह आवश्‍यक है कि ग्रामीणों को अपने गांवों में ही प्रभावशाली कानूनी सहायता दी जाए। अभी-भी यह विदित ही है कि ज्‍यादातर कानूनी सेवा संस्‍थाएं शहरी तथा अर्द्धशहरी क्षेत्र में स्थि‍त हैं, जिनका ग्रामीण लाभ नहीं उठा पाते। इस कमी को दूर करने के लिए कानूनी सहायता क्‍लीनिक की योजना गरीबों तथा समाज के पिछड़े वर्गों को कानूनी सहायता दिए जाने के लिए बनाई गई है। राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नाल्‍सा) की राष्‍ट्रीय कार्रवाई योजना के अंतर्गत योजना को पिछले वर्ष दिसम्‍बर में अपनाया गया, जिसे विधि सेवा संस्‍थाओं (ताल्‍लुका/उप मंडल/मंडल विधि सेवा समितियों, जिला विधि सेवा प्राधिकरण, उच्‍च न्‍यायालय विधि सेवा समितियों, राज्‍य विधि सेवा प्राधिकरण एवं उच्‍चतम न्‍यायालय विधि सेवा समिति, जो विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत स्‍थापित) के माध्‍यम से इसको पूरे देश में अमल में लाया जा रहा है। नाल्‍सा की पूरे देश के गांवों में कानूनी सहायता क्‍लीनिक स्‍थापति किए जाने की योजना है। नाल्‍सा की पंचवार्षिक दूरंदेशी एवं रणनीति दस्‍तावेज में कानूनी सहायता क्‍लीनिक खोलने पर बल दिया गया है।

      प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों, जहां पर डॉक्‍टर तथा अन्‍य सहायक चिकित्‍सा स्‍टाफ गांवों में रहने वाले गरीब लोगों के मूलभूत स्‍वास्‍थ्‍य की देख-भाल करता है, उसी प्रकार से कानूनी सहायता क्‍लीनिक में वकील लोगों को कानूनी सेवा प्रदान करेगा। योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य गरीबों, हाशियेदारों, विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा-12 के अंतर्गत वर्गीकृत समाज के कमजोर लोगों, खासकर ऐसे लोगों, जो कि दूर-दराज स्‍थानों में रह रहे हैं, जो विधि सेवा संस्‍थाओं के कार्यालय तथा न्‍याय की सीटों से परे हैं, उन्‍हें कानूनी सहायता दिया जाना है। योजना का लक्ष्‍य मूलभूत प्रकृति की कानूनी सेवाएं जैसे कि कानूनी सलाह, पेटीशनों की ड्राफ्टिंग करना, नोटिस देना, उत्‍तर देना, कानूनी महत्‍व के अन्‍य दस्‍तावेज तथा आवेदन तैयार करना, इसके साथ ही साथ स्‍थानीय लोगों के झगड़ों का निपटान करना तथा उन्‍हें कोर्ट में जाने से रोकना है। ऐसे मामले जहां उच्‍च स्‍तर की कानूनी सहायता अपेक्षित है, उन्‍हें विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत स्‍थापित विधि सेवा संस्‍था को प्रेषित किया जा सकता है।  कानूनी सहायता क्‍लीनिक में सामान्‍य लोगों की समस्‍याओं के प्रति प्रतिबद्ध, समझदार तथा संवेदनशील वकील तथा पैरा-लीगल स्‍वयंसेवक (विधि सेवा प्राधिकरण द्वारा चयनित तथा प्रशिक्षित) होंगे। पैरा-लीगल स्‍वयंसेवक कानूनी सेवा क्‍लीनिक के काम-काज के घंटों के दौरान उपलब्‍ध रहता है। कानूनी सहायता क्‍लीनिक ऐसे स्‍थान पर होता है, जहां स्‍थानीय लोग आसानी से पहुचं सके। स्‍थानीय निकाय के कार्यालय भवन जैसे कि गांव पंचायत के अंदर एक कमरा लेना आदर्श समझा गया है। स्‍थानीय विधि सेवा प्राधिकरण, ग्राम पंचायत, मंडल/ब्‍लाक पंचायत, म्‍युनिसपल्‍टी एवं कारपोरेशन आदि जैसे स्‍थानीय संस्‍थाओं से आग्रह कर रहा है कि वे कानूनी सहायता क्‍लीनिक के कार्य के लिए एक कमरा दिला दें। चूंकि कानूनी सहायता क्‍लीनिक स्‍थानीय लोगों के हित में कार्य करता है, अत: स्‍थानीय निकाय संस्‍थाओं को इससे सहयोग करने की आवश्‍यकता के लिए अनुरोध किया जाता है तथा यह अहसास दिलाया जाता है कि कानूनी सहायता क्‍लीनिक का लक्ष्‍य शांति स्‍थापित करना तथा स्‍थानीय लोगों का कल्‍याण करना है।

      कानूनी सहायता क्‍लीनिक नजदीकी विधि सेवा संस्‍था के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में आता है, जिसका कि क्षेत्राधिकार है। जिला विधि सेवा प्राधिकरण जिले के भीतर कार्य कर रहे सभी कानूनी सहायता क्‍लीनिकों की निगरानी तथा सलाह देने की शक्तियां रखता है। राज्‍य विधि सेवा प्राधिकरण इन क्‍लीनिकों की कार्य-प्रणाली के बारे में मार्ग-निदेश जारी करने का अधिकार रखता है।

      राज्‍य विधि सेवा प्राधिकरण कानूनी सहायता क्‍लीनिकों की सेवाओं में सुधार लाने के लिए समय-समय पर निदेश जारी करता है, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सेवाएं प्रभावशाली ढंग से मिल सके। राज्‍य विधि सेवा प्राधिकरण से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर काम कर रहे कानूनी सहायता क्‍लीनिकों की कार्य-प्रणाली के बारे में तिमाही रिपोर्ट राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करें।

* उप निदेशक (मीडिया एवं संचार), पसूका, राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण से प्राप्‍त जानकारी के आधार पर।न्‍हें   तथा आवेदन तैयार करना,

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वि‍. कासोटि‍या/यादराम/आजाद-211

     



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