विज्ञप्तियां उर्दू विज्ञप्तियां फोटो निमंत्रण लेख प्रत्यायन फीडबैक विज्ञप्तियां मंगाएं Search उन्नत खोज
RSS RSS
Quick Search
home Home
Releases Urdu Releases Photos Invitations Features Accreditation Feedback Subscribe Releases Advance Search
हिंदी लेख
माह वर्ष
  • सरदार पटेल- जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया (31-अक्टूबर,2017)
  • पटेल: जीवन, सन्देश, एवं उनकी अनंत प्रासंगिकता (30-अक्टूबर,2017)
  • हस्‍तशिल्‍प निर्यात संवर्धन परिषद के बढ़ते कदम (17-अक्टूबर,2017)
  •  भारतीय गौरवशाली गणराज्य के रचयिता – सरदार वल्लभ भाई पटेल (25-अक्टूबर,2017)
  • समर्पित आत्‍मा : सिस्‍टर निवेदिता, आज के भारत के लिए एक प्रेरणा  (25-अक्टूबर,2017)
  • 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस 2017 का जश्न (24-अक्टूबर,2017)
  • रो-रो फेरी सेवा और परिवहन एवं लॉजिस्टिक्सय पर उसका प्रभाव (23-अक्टूबर,2017)
  • कारीगरों और बुनकरों की चिंता (14-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्व: भारत की विविधता के अन्वेषण का एक विशेष अवसर (13-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्वः सब देखो अपना देश (13-अक्टूबर,2017)
  • किसानों को खेती में प्रवृत्त रखने की चुनौती (12-अक्टूबर,2017)
  • अहिंसक पथ के प्रेरक : महात्‍मा गांधी (11-अक्टूबर,2017)
  • ग्रामीण भारत में बदलाव (11-अक्टूबर,2017)
  • देश में अपराधी न्याय प्रणाली को फास्ट ट्रैक बनाने के लिये सीसीटीएनएस डिजिटल पुलिस पोर्टल का शुभारंभ (11-अक्टूबर,2017)
  • बेहतर जल प्रबंधन समय की जरूरत (05-अक्टूबर,2017)
  • गांधी जी के लिए अहिंसा स्‍वच्‍छता के समान थी (03-अक्टूबर,2017)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

डिजाइन क्‍लीनिक योजना – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विशेष लेख

विशेष लेख

 

    

     डिजाइन क्‍लीनिक योजना क्‍या है ?

     राष्‍ट्रीय डिजाइन संस्‍थान (एनआईडी) ने डिजाइन क्‍लीनिक योजना तैयार की है। इसका उद्देश्‍य सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उपक्रमों में उनके उत्‍पादों, विधियों, संचालन सेवाओं और व्‍यापार की गुणवत्‍ता सुधारने के लिए डिजाइन का इस्‍तेमाल करते हुए, डिजाइन से जुड़ी सोच, दर्शन और इस्‍तेमाल से जुड़े कार्यों को आसान बनाया है।

     इस योजना के उद्देश्यों में एम.एस.एम.ई. क्‍लस्‍टरों और डिजाइन विशेषज्ञता को एक साझे मंच पर लाना है, ताकि डिजाइन से जुड़ी समस्‍याओं का शीघ्र समाधान हो सके।

 

एम.एस.एम.ई के अधीन क्‍या-क्‍या हैं ?

कोई विनिर्माण/सेवा उपक्रम जो सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उपक्रम विकास (एम.एस.एम.ई. डी) अधिनियम, 2006 के अधीन निर्धारित और एम.एस.एम.ई. के अधीन समय-समय पर अधिसूचित विनिर्माण/सेवा उपक्रमों के लिए संयंत्र और मशीन/उपकरण में निवेश के लिए निर्धारित सीमा पर आधारित हो। यह योजना डीसी एमएसएमई द्वारा मान्‍य कलस्‍टरों/औद्योगिक कलस्‍टरों के भीतर लगे उपक्रमों पर भी लागू है।

 

डिजाइन की प्रासंगिकता क्‍या है और यह एमएसएमई की मदद कैसे करता है ?

डिजाइन, अभिनवता और विकास-दैनिक इस्‍तेमाल के लिए उन्‍नत और विविधतापूर्ण उत्‍पादों के लिए आपस में संबंधित हैं। डिजाइन से जुड़े समाधानों और विधियों के इस्‍तेमाल से एमएसएमई को उत्‍पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और उत्‍पादों की स्‍वीकार्यता के संदर्भ में मदद मिलती है। एक अभिनव विषय के रूप में डिजाइन एमएसएमई को प्रतिस्‍पर्धी बाजार में सतत विकास तथा नए व्‍यापारिक अवसर उपलब्‍ध कराने में मददगार है।

 

डिजाइन क्‍लीनिक योजना के व्‍यापक क्षेत्र क्‍या हैं ?

एमएसएमई की डिजाइन विशेषज्ञता के लिए योजना वितरण हेतु निम्‍नलिखित तीन प्रारूपों का इस्‍तेमाल किया जाता है :1. एमएसएमई क्लस्‍टरों के डिजाइनों  को प्रचारित करने के लिए डिजाइन जागरूकता सेमिनार

2. डिजाइन जागरूकता कार्यक्रम में शामिल है :

·         समुचित डिजाइन कार्य नीतियों को विकसित करने के लिए एमएसएमई क्लस्‍टरों का डिजाइन आवश्‍यकता मूल्‍यांकन सर्वेक्षण और

·         डिजाइन क्‍लीनिक कार्यशाला के माध्‍यम से डिजाइन समस्‍याओं के लिए तत्‍क्षण परामर्श देकर क्लस्‍टरों की डिजाइन संबंधी जरूरतों को पूरा करना

3. एमएसएमई की जरूरतों के अनुसार डिजाइन परामर्शी परियोजनाओं के माध्‍यम से एमएसएमई की डिजाइन संबंधी विशेष जरूरतों को पूरा करना।

     डिजाइन जागरूकता सेमीनार क्‍या है ? इसे कैसे आयोजित करे ?

     एमएसएमई क्लस्‍टर संघों की ओर से डिजाइन विशेषज्ञों अन्‍य विशेषज्ञों के साथ अपने सदस्‍यों का संपर्क कायम करने के उद्देश्‍य से ऐसे सेमीनार आयोजित किए जाते हैं। इसमें भाग लेने वालों को डिजाइन प्रक्रिया और डिजाइन के लाभों के बारे में जानकारी देकर एमएसएमई क्लस्‍टरों में डिजाइन को प्रचारित किया जाता है। यह सेमीनार एक दिन का होता है, जिसमें प्रतियोगियों को योजना और डिजाइन जागरूकता के बारे में जानकारी दी जाती है, जो क्लस्‍टरों की डिजाइन संबंधी जरूरतों के लिए मामलों से जुड़े अध्‍ययनों और बेहतर डिजाइन परंपराओं तथा डिजाइन रणनीति के माध्‍यम से किया जाता है।

     डिजाइन जागरूकता सेमीनार आयोजित करने के लिए संबंधित एमएसएमई क्लस्‍टर संघ संकाय/विषय विशेषज्ञ सेवाओं के लिए निर्धारित प्रपत्र में डिजाइन क्‍लीनिक योजना के साथ पंजीकरण करा सकते हैं। सेमीनार पर आने वाली लागत को पूरा करने के लिए इस योजना से संघ को अधिकतम 60 हजार रूपये वित्‍तीय सहायता दी जाएगी।

     डिजाइन जागरूकता कार्यक्रम क्‍या है ?

     डिजाइन जागरूकता कार्यक्रम में शामिल है :क. क्लस्‍टरों का डिजाइन आवश्‍यकता मूल्यांकन सर्वेक्षण और

ख. सामान्‍य रूप से डिजाइन से जुड़ी समस्‍याओं और कलस्‍टरों की जरूरतों के लिए तत्‍काल समाधान उपलब्‍ध कराना

(क) मूल्‍यांकन सर्वेक्षण की जरूरत क्‍यों ?

     क्लस्‍टर की डिजाइन संबंधी जरूरतों और डिजाइन संबंधी समस्‍याओं को समझने के क्रम में विशेषज्ञ डिजाइनर एक सघन डिजाइन अनुसंधान संचालित करते हैं, ताकि वार्तालाप शिक्षण, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्‍यम से कलस्‍टरों में डिजाइन शामिल करने के लिए मौजूदा परिदृश्‍य और अवसरों का एक रेखाचित्र तैयार किया जा सके। क्लस्‍टर की डिजाइन संबंधी सामान्‍य जरूरतों को पूरा करने और निम्‍नलिखित डिजाइन क्‍लीनिक कार्यशाला में डिजाइन से जुड़े समाधानों को तैयार करने के लिए यह एक आधार के रूप में कार्य करता है।

 

(ख) एमएसएमई को डिजाइन क्‍लीनिक कार्यशाला से लाभ किस प्रकार मिलता है ?

     विशेषज्ञ डिजाइन द्वारा संचालित वार्तालाप कार्यशाला में कलस्‍टर के सदस्‍य समस्‍याओं के समाधान की सृजनात्‍मक तकनीक डिजाइन प्रक्रिया सीखते हैं, ताकि वे अवसरों का लाभ ले सके और समाधान तैयार कर सके। वार्तालाप और कार्यशाला की गतिविधियों के माध्‍यम से समाधान उपलब्‍ध होते हैं। यह कार्यशाला क्लस्‍टरों की जरूरतों और आवश्‍यकता मूल्‍यांकन सर्वेक्षण के अधीन शामिल इकाइयों की संख्‍या के आधार पर एक से पाँच दिनों की हो सकती है।

 

(ग) एक डिजाइन जागरूकता कार्यक्रम का प्रबंधन कैसे करना है और एमएसएमई के लिए वित्‍तीय और सहायता मिल सकती हैं?

   या तो क्‍लस्‍टर डिजाइन जागरूकता सम्‍मेलन को संचालित करने वाले डिजाइन विशेषज्ञ से सीधे संपर्क कर सकते हैं अथवा योजना के अंतर्गत सहायता के लिए एक प्रस्‍ताव पर कार्य के लिए योजना के पैनल में शामिल डिजाइनरों में से एक का चयन कर सकते हैं और एसोसिएशन के साथ एक समझौता कर सकते हैं।

   इस योजना के तहत एसोसिएशन को तीन लाख रुपये तक की सीमा तक के वास्‍तविक खर्च के 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जाती है और शेष खर्चों को या तो एसोसिएशन द्वारा स्‍वयं वहन करना होता है अथवा समूह के सहभागी सदस्‍य से योगदानों के माध्‍यम से अथवा सेंसरशिप के माध्‍यम से अदा किया जाता है।

 

एमएसएमई पेशेवर डिजाइन सहायता कैसे प्राप्‍त कर सकती हैं?

 यह योजना एमएसएमई इकाइयों की विशेष डिजाइन विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइनर सहायता और वित्‍तीय सहायता प्रदान करती है। डिजाइन पेशेवर अपने विशिष्‍ट क्षेत्रों में एमएसएमई के साथ करीब से कार्य करने की आशा रखते हैं ताकि वे डिजाइन समाधान, डिजाइन विवरण और सुझाए गए डिजाइन उपायों को विकसित करने के लिए अथवा नए उत्‍पादों के विकास अथवा वर्तमान उत्‍पादों/सेवाओं की गुणवत्‍ता और बाजार उपलब्‍धता में सुधार और विभिन्‍न उत्‍पादों एवं डिजाइन के माध्‍यम से विभिन्‍न उत्‍पादों और सेवाओं की अवधारणा को विकसित कर सकें।

यह योजना एक-एकल/तीन एमएसएमई के समूह के लिए नौ लाख रुपये तक और चार अथवा अधिक एमएसएमई के समूह के लिए 15 लाख रुपये तक की सीमा वाली डिजाइन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए इनमें होने वाले वास्‍तविक व्‍यय के 60 प्रतिशत तक वित्‍तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें डिजाइनरों के शुल्‍क और व्‍यय, माल लागत और प्रारूप लागत शामिल है।

 

डिजाइन परियोजना प्रस्‍ताव को कौन बनाता है और इसका प्रारूप क्‍या होता है?

डिजाइन परियोजना प्रस्‍तावों को डिजाइन विशेषज्ञ और एमएसएमई इकाईयों द्वारा संयुक्‍त रूप से तैयार किया जाता है, जो डिजाइन समस्‍या कार्यक्षेत्र, प्रयोजन और अपेक्षित डिजाइन विवरण से संबंधित होते हैं। एमएसएमई इकाई डिजाइन विशेषज्ञ को बजट विवरणों के साथ डिजाइन परियोजना प्रस्‍ताव को बनाने के कार्य को भी सौंप सकती है और योजना के अंतर्गत सहायता के लिए भेजने से पूर्व इसकी अनुमति दे सकती है।

छात्र डिजाइन परियोजनाओं के लिए, एमएसएमई डिजाइन से जुड़ी समस्‍याओं के अध्‍ययन के लिए अंतिम वर्ष के डिजाइन छात्रों की सेवाओं पर उनका प्रारूप तैयार कर सकती है। छात्र एमएसएमई डिजाइन जरूरतों के लिए डिप्‍लोमा, लेख आदि पर काम करेंगे। यह किसी संकाय निर्देशक के साथ छात्रों के लिए कक्षा परियोजना भी हो सकती है। एमएसएमई बजट विवरणों के साथ परियोजना प्रस्‍ताव तैयार करने के लिए एक छात्र की सेवाएं ले सकती है और इसे ही स्‍वीकृति के लिए डिजाइन क्‍लीनिक योजना के लिए आगे बढ़ा सकती है। विकल्‍प के तौर पर, छात्र आवश्‍यक बजट सहायता के साथ एक परियोजना प्रस्‍ताव विकसित कर सकते हैं और इसे ही उस चयनित एमएसएमई को सौंप सकते हैं जो स्‍वीकृति के लिए वास्‍तविक लागतों का 75 फीसदी वहन करने पर सहमत हो।

     डिजाइन परियोजना के दोनों प्रस्‍तावों में दिए गए विवरण से डिजाइन की खास-खास बाते स्‍पष्‍ट हो जानी चाहिए और यह भी जाहिर होना चाहिए कि इस डिजाइन से एमएसएमई को क्‍या लाभ होंगे।

 

डिजाइन परियोजना प्रस्‍तावों पर अनुमोदन प्राप्‍त करने की प्रक्रिया क्‍या है ?

 

·         डिजाइन परियोजना प्रस्‍ताव जब मानक प्रारूप में स्‍वीकार कर लिया जाता है तो उसकी प्राथमिक जांच होती है। इस दौरान एमएसएमई/सबंधित डिजाइनर की ओर से आवश्‍यक या छूट गए विवरण मंगाये जाते हैं।

 

·         प्रस्‍ताव की दो/तीन स्‍वतंत्र डिजाइनर जांच करते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि परियोजना एमएसएमई के अनुरूप है कि नहीं, योजना के अंतर्गत आता है कि नहीं, प्रस्‍ताव से एमएसएमई को अपने उत्‍पादों/ सेवाओं की गुणवत्‍ता सुधारने में सहायक है या नहीं। इस जांच में खर्च के आकलन की भी जांच होती है। 

·         स्‍वतंत्र डिजाइन विशेषज्ञों की टिप्‍पणी के साथ ये प्रस्‍ताव परियोजना आकलन पैनल(पीएपी) के सामने रखे जाते हैं। पैनल ऐसे सभी प्रस्‍तावों की जांच करता है और कुछ चुने हुए प्रस्‍तावों को मंजूरी के लिए परियोजना निगरानी और सलाहकार समिति के समक्ष रखता हैं। अवलोकन/ स्‍पष्‍टीकरण के मामले में इन प्रस्‍तावों को वापस एमएसएमई/ संबंधित डिजाइनर के पास संशोधन/ स्‍पष्‍टीकरण/ पुनरीक्षण के लिए भेजा जाता है और आवश्‍यक सूचना मिलने के बाद इन प्रस्तावों को फिर से परियोजना आकलन पैनल के समक्ष रखा जाता है।

 

·         जब डिजाइन परियोजना को मंजूरी मिल जाती है तो इसे एमएसएमई/ संबंधित डिजाइनर के पास एमएसएम इकाई/डिजाइनर/एनआईडी के बीच त्रिपक्षीय समझौता संपन्‍न कराने के लिए भेजा जाता है। इसके बाद एमएसएमई/ डिजानर प्रस्‍ताव पर काम शुरू कर सकते हैं।

 

·         इस योजना के अंतर्गत वित्‍तीय मदद त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार एमएसएमर्इ द्वारा जारी अथवा अपने हिस्‍से की 40 फीसदी रकम खर्च करने और उसका बिल जमा करने के बाद तय चरणों में होता है।  डिजाइन क्‍लीनिक योजना का 60 फीसदी हिस्‍सा सीधे डिजाइनर को जारी करना हो तो डिजाइनर को 40 फीसदी हिस्‍सा भुगतान करने के सबूत के साथ डिजाइन  क्‍लीनिक योजना को एक आवेदन देना होगा।

 

·         जरूरत महसूस होने पर आकलन पैनल/एनआईडी डिजाइन परियोजना की कार्यप्रगति की भी जांच कर सकता। परियोजना को दी जाने वाली वित्‍तीय मदद की अगली किस्‍त का जारी होना इनकी जांच/आकलन और रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

·         वित्‍तीय मदद की अ्रंतिम किस्‍त परियोजना के सफल समापन और एमएसएमई को इसका नमूना देने और डिजाइन क्‍लीनिक योजना के पास सभी कागजात जमा करने के बाद ही जारी की जायेगी। र्भ

वि.कासोटिया/संजीव/सुधीर/अनिल/शुक्‍ल/तारा/सोनिका - 275                                                                    



विशेष लेख को कुर्तिदेव फोंट में परिवर्तित करने के लिए यहां क्लिक करें
डिज़ाइन एवं होस्‍ट राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी),सूचना उपलब्‍ध एवं अद्यतन की गई पत्र सूचना कार्यालय
ए खण्‍ड शास्‍त्री भवन, डॉ- राजेंद्र प्रसाद रोड़, नई दिल्‍ली- 110 001 फ़ोन 23389338