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विदेशी ऋण : परिभाषाएं और अवधारणाएं
विशेष लेख

विशेष लेख

शमीमा सिद्दिकी *

विदेशी ऋण

·         सकल विदेशी ऋण को समय में एक बिंदु पर उस बकाया राशि के रुप में परिभाषित किया गया है जो वास्तव में मौजूदा ऋण हो,  न कि संभाव्य ऋण, जिसके मूल और/अथवा ब्याज का भुगतान भविष्य में किसी समय पर कर्जदार द्वारा किया जाना हो और जो किसी अर्थव्यवस्था के निवासियों द्वारा गैर-निवासियों को दिया गया हो। (विदेशी ऋण सांख्यिकी- संकलको और उपयोगकर्ताओं के लिए सूचना पुस्तिका, अंतर-राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), 2003)

 

मूल और अवशिष्ट परिपक्वता

·         वास्तविक परिपक्वता को वित्तीय दायित्व से लेकर अंतिम परिपक्वता तिथि के व्यापक बहुमूल्य समय की अवधि के रुप में परिभाषित किया गया है।

·         अवशिष्ट परिपक्वता (अथवा शेष परिपक्वता) के तहत ऋण में एक वर्ष तक की अवधि की वास्तविक परिपक्वता के जरिए लघु अवधि ऋण शामिल है, जिसमें एक संदर्भ तिथि तक बारह माह की अवधि के भीतर वास्तविक परिपक्वता द्वारा दीर्घावधि से लेकर मध्यावधि ऋण कर्ज अदायगी को समाविष्ट किया गया है।

 

दीर्घ और लघु अवधि

·         विदेशी ऋण को वर्गीकृत करने का एक तरीका दीर्घ और लघु अवधि के रुप में है। एक वर्ष से अधिक के वास्तविक परिपक्वता के साथ ऋण को दीर्घ-अवधि ऋण के रुप में परिभाषित किया जाता है, जबकि मांग पर कर्ज अदायगी अथवा एक वर्ष या इससे कम की वास्तविक परिपक्वता के साथ ऋण को लघु अवधि ऋण के रुप में परिभाषित किया गया है।

·         आपूर्तिकर्ताओं के ऋण को 180 दिनों तक के लिए शामिल कर और सरकार खजाने के बिल में एफ-II निवेश तथा अन्य उपकरणों द्वारा 2005-06 में लघु अवधि राशि को पुनः परिभाषित किया गया था। बैंकिग प्रणाली के विदेशी ऋण दायित्व और विदेशी केन्द्रीय बैंको तथा अंतर-राष्ट्रीय संस्थानों के द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को शामिल कर मार्च 2007 में इसे एक बार फिर पुनः परिभाषित किया गया।

 

बहुपक्षीय और द्विपक्षीय ऋण

·         बहुपक्षीय लेनदार प्राथमिक रुप से बहुपक्षीय संस्थान होते हैं जैसे कि- अंतर-राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए), अंतर राष्ट्रीय पुनःनिर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) आदि। द्विपक्षीय लेनदार वो संप्रभु देश होते हैं जिनके साथ संप्रभु और गैर- संप्रभु व्यवस्थाएं होती हैं जो आपस में हरेक के लिए अलग-अलग ऋण प्रबंध में प्रवेश करती है। भारत के कुछ द्विपक्षीय लेनदार जो संप्रभु और गैर-संप्रभु दोनों कर्जदारों को ऋण मुहैया कराते हैं उनमें जापान, जर्मनी, संयुक्त राष्ट्र, फ्रांस, नीदरलैंड, रुसी संघ आदि शामिल है।

 

संप्रभु  (सरकारी) और गैर-संप्रभु (गैर-सरकारी) ऋण

·         सरकारी ऋण में शामिल है (i) बाहरी सहायता कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा प्राप्त ऋण पर बाहरी ऋण बकाया और रुपए के ऋण का असैन्य घटक (ii) अन्य सरकारी ऋण जिसमें अंतर-राष्ट्रीय मुद्रा कोष, रुपए के ऋण का सैन्य ऋण घटक और साथ ही विदेशी मुद्रा सैन्य ऋण शामिल हो तथा (iii) सरकारी प्रतिभूतियों में एफ-II निवेश है। गैर-सरकारी ऋण में विदेशी ऋण के अन्य शेष घटक शामिल हैं।

 

वाणिज्य ऋण/निर्यात ऋण

·         सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं, बैंक और वित्तीय संस्थानों द्वारा निर्यात के लिए सीधे तौर पर दिया जाने वाला कर्ज अथवा ऋण वाणिज्य/निर्यात ऋण है। वित्त के स्रोत पर आधारित यह ऋण आपूर्तिकर्ता अथवा खरीदार का ऋण हो सकता है।

Ø      आपूर्तिकर्ता ऋण- उत्पादों के विदेशी आपूर्तिकर्ता द्वारा इस प्रकार का ऋण विलंबित भुगतान के रुप में होता है।

Ø      खरीदार ऋण- इस प्रकार का ऋण बैंक अथवा वित्तीय संस्थाओं द्वारा प्रदान किया जाता है और आम तौर पर ओईसीडी की शर्तों के आधार पर इसका संचालन किया जाता है तथा संबंधित देश की निर्यात ऋण एजेंसी द्वारा इसका बीमा होता है।

 

विदेशी वाणिज्यिक ऋण

·         वाणिज्यिक ऋण की परिभाषा में व्यावसायिक बैंकों, अन्य व्यावसायिक वित्तीय संस्थानों, प्रतिभूतिकृत उपकरणों के इश्यू जैसे बांड (इंडिया डेवलपमेंट बांड्स (आईडीबी) शामिल) और रिसर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स (आरआईबी) के द्वारा धन की प्राप्ति शामिल है। इसमें संबंधित देश, अंतर-राष्ट्रीय वित्त संगठन, वाशिंगटन [आईएफसी (डब्ल्यू)], नोर्डिक इंवेस्टमेंट बैंक तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) द्वारा निजी क्षेत्र को प्राप्त ऋण की खरीदार ऋण और आपूर्तिकर्ता ऋण प्रणाली के ज़रिए प्राप्त ऋण भी शामिल है।

 

अप्रवासी भारतीय जमा

·         अप्रवासी भारतीय जमा तीन प्रकार के होते हैं-

Ø      अप्रवासी (विदेशी) रुपए खाता {एनआर(ई)आरए} जमा की शुरुआत 1970 से हुई। कोई भी अप्रवासी भारतीय एनआरई खाता खोल सकता है जिसमें विदेश के बैंक के ज़रिए भारत में धन विप्रेषित किया जा सकता है। एक एनआरई खाते को भारतीय रुपए में संचालित।  किया जाता है और चालू, बचत अथवा सावधि जमा के रुप में इस खाते को खोला जा सकता है। इस खाते में जमा राशि को प्राप्त ब्याज के साथ प्रत्त्यावर्तित किया जा सकता है।

Ø      विदेशी मुद्रा अप्रवासी(बैंक) जमा {एफसीएनआर(बी)} का आरंभ 15 मई 1993 से हुआ। इस सावधि जमा को केवल पाउंड, स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, जापानी येन, कनाडाई डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के रुप में ही संचालित किया जा सकता है। 1999 के अक्टूबर से इस जमा की न्यूनतम परिपक्वता अवधि को छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया। 26 जुलाई 2005 से बैंकों को अधिकतम पांच वर्षों की परिपक्वता अवधि के लिए एफसीएनआर(बी) जमा के लिए मंजूरी प्रदान की गई जो पहले मात्र तीन वर्षों की सीमा के लिए हुआ करती थी।

Ø      अप्रवासी साधारण रुपया (एनआरओ) खाता- भारत से बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति अधिकृत डीलर अथवा अधिकृत बैंक में, भारतीय रुपए में प्रमाणित लेन-देन के उद्देश्य से एनआरओ खाता खोल सकता है और उसका संचालन कर सकता है। एनआरओ खाते को चालू,बचत,आवर्ति अथवा सावधि जमा क रुप में खोल/संचालित कर सकता है। भारतीय मूल के अप्रवासी भारतीय/व्यक्ति एनआरओ खाते की राशि में से प्रत्येक वित्त वर्ष में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक राशि का विप्रेषण नहीं कर सकते।

 

रियायती ऋण

·         किसी ऋण को आम तौर पर रियायती ऋण के रुप में तब परिभाषित किया जाता है जब यह 25 प्रतिशत या उससे अधिक के अनुदान का वहन करती है। भारत में बहुपक्षीय (अंतर-राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए)), कृषि विकास के लिए अंतर-राष्ट्रीय निधियन)) और द्विपक्षीय स्रोतों( रुपए के ऋण सहित जो आयात के निर्यात के माध्यम से सेवित होता है) का वर्गीकरण रियायत आधारित दीर्घावधि ऋण के रुप में किया जाता है, इसपर बाजार की दर की तुलना में कम ब्याज लगता है।

 

ऋण अदायगी अनुपात

·      ऋण अदायगी अनुपात को कुल ऋण भुगतान (यानि मूल अदायगी के साथ ही ब्याज भुगतान) के साथ भुगतान की बकाया की मौजूदा प्राप्तियों (आधिकारिक हस्तांतरण के अलावा) के रुप में मापा जाता है।

***

*निदेशक (मीडिया और संचार)

 

वि. कसोटिया/विजयलक्ष्‍मी/-289

पूरी सूची-30-12-2011



 



 



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