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  • समर्पित आत्‍मा : सिस्‍टर निवेदिता, आज के भारत के लिए एक प्रेरणा  (25-अक्टूबर,2017)
  • 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस 2017 का जश्न (24-अक्टूबर,2017)
  • रो-रो फेरी सेवा और परिवहन एवं लॉजिस्टिक्सय पर उसका प्रभाव (23-अक्टूबर,2017)
  • कारीगरों और बुनकरों की चिंता (14-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्व: भारत की विविधता के अन्वेषण का एक विशेष अवसर (13-अक्टूबर,2017)
  • पर्यटन पर्वः सब देखो अपना देश (13-अक्टूबर,2017)
  • किसानों को खेती में प्रवृत्त रखने की चुनौती (12-अक्टूबर,2017)
  • अहिंसक पथ के प्रेरक : महात्‍मा गांधी (11-अक्टूबर,2017)
  • ग्रामीण भारत में बदलाव (11-अक्टूबर,2017)
  • देश में अपराधी न्याय प्रणाली को फास्ट ट्रैक बनाने के लिये सीसीटीएनएस डिजिटल पुलिस पोर्टल का शुभारंभ (11-अक्टूबर,2017)
  • बेहतर जल प्रबंधन समय की जरूरत (05-अक्टूबर,2017)
  • गांधी जी के लिए अहिंसा स्‍वच्‍छता के समान थी (03-अक्टूबर,2017)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

संस्‍कृत को प्रोत्‍साहित कर रहा है : राष्‍ट्रीय संस्‍कृत विद्यापीठ
विशेष लेख

विशेष लेख

                                            

    राष्‍ट्रीय संस्‍कृत विद्यापीठ को संस्‍कृत शिक्षा, अनुसंधान, प्रकाशन, प्रचार और प्रसार के क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों के लिए जिन विशिष्‍ट पुरस्‍कारों से अलंकृत किया गया है, उनके नाम हैं

·         परम्‍परागत शास्‍त्रों के विषय में विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उत्‍कृष्‍ट केन्‍द्र  के रूप में मान्‍यता देना।

·         राष्‍ट्रीय मूल्‍यांकन एवं प्रमाणन परिषद (एनएएसी) ने 2003 में ए प्‍लस  स्‍तर की मान्‍यता प्रदान की।

·         विद्यापीठ को देश में सर्वश्रेष्‍ठ स्‍थान प्रदान किया गया।

·         मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन सम-विश्‍वविद्यालयों की गुणवत्‍ता का मूल्‍यांकन करने के लिए नियुक्‍त प्रोफेसर टंडन समिति ने अभी हाल में राष्‍ट्रीय संस्‍कृत विद्यापीठ की शैक्षिक श्रेष्‍ठता, अनुसंधान कार्यक्रमों, आधारभूत संरचना, पाठ्यक्रम एवं विस्‍तार गतिविधियों का मूल्‍यांकन किया था। ये बड़े हर्ष और गर्व की बात है कि विद्यापीठ को देश में सर्वश्रेष्‍ठ स्‍थान प्रदान किया गया है। अन्‍य कुछ उत्‍कृष्‍ट संस्‍थान हैं-टीआईएफआर, मुंबई, बिट्स पिलानी, आईआईटी बैंगलौर।

परंपरागत शास्‍त्रों का उत्‍कृष्‍ट केन्‍द्र

विद्यापीठ को उसकी उपलब्धियों, परंपरागत शास्‍त्रों के शिक्षण एवं अनुसंधान में अर्जित शैक्षिक श्रेष्‍ठता और भविष्‍य में विकास की उसकी संभावनाओं के आधार पर यूजीसी ने उसे लगातार दूसरे वर्ष परंपरागत शास्‍त्रों में उत्‍कृष्‍ट केन्‍द्र के रूप में मान्‍यता प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत विद्यापीठ ने निम्‍नलिखित गतिविधियों का आयोजन किया

 

·         शास्‍त्रीय अध्‍ययनों में आयार्चोत्‍तर प्रशिक्षण-शास्‍त्रवारिधि

·         प्रकाशन

·         ओडियो-वीडियो प्रलेखन

·         ओडियो-वीडियो रिकॉडिंग केन्‍द्र गतिविधियां

·         लिपि विकास प्रदर्शनी

·         प्राचीन लिपि सीखने के लिए इलेक्‍ट्रोनिक उपकरण

·         स्‍वयं संस्‍कृत सीखने की किट

·         शिल्‍प तथ्‍यों (आर्टिफैक्‍ट्स) का प्रलेखन

·         पांडुलिपियों का डिजिलिटीकरण

·         योगा, तनाव प्रबंधन एवं उपचार केन्‍द्र

·         सम्‍मेलन एवं कार्यशालाएं

·         कम्‍प्‍यूटर सांइस और संस्‍कृत भाषा प्रौद्योगिकी में मेल के लिए स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रम

रियायती भोजन योजना

     विद्यापीठ ने आनन्‍दम योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत विद्यापीठ छात्रों को 10 रुपये की दर से भोजन उपलब्‍ध करा रहा है।

महाभारत परियोजना     राष्‍ट्रीय संस्‍कृत विद्यापीठ तिरुपति द्वारा शुरू की गई महाभारत इलेक्‍ट्रोनिक मूल पाठ परियोजना एक प्रतिष्ठित एक वर्षीय परियोजना है, जिसे तिरुमाला तिरुपति देवस्‍थानम्, तिरुपति द्वारा प्रायोजित किया गया है। यह योजना हाईपर लिंक के साथ व मूल पाठ परिवर्तनों के साथ महाभारत का मानक मूल पाठ तैयार करने के लिए शुरू की गई है, जो अनुसंधान करने वालों के लिए बहुत लाभदायक होगा।

परियोजना के उद्देश्‍य

·         उपलब्‍ध दक्षिण भारतीय एवं उत्‍तर भारतीय संस्‍करणों को आधार मानकर मूल पाठ में परिवर्तनों के साथ महाभारत का एक मानक मूलग्रंथ तैयार करना।

·         अंग्रेजी, हिन्‍दी और तेलुगु भाषाओं में प्रत्‍येक पर्व का सरल लेकिन प्रमाणिक सारांश जोड़ना। महाभारत में धार्मिक, दार्शनिक, नीतिपरक, भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक, यौद्धिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर अनुसंधान करने के पहलुओं की सूची संलग्‍न करना।

·         चुनिंदा भागों एवं चित्रित वर्णन का हाईपर-लिंक के साथ इलेक्‍ट्रोनिक पाठ वेबसाइट पर प्रस्‍तुत करना।

अखिल भारतीय संस्‍कृत छात्र प्रतिभा मेला    विद्यापीठ द्वारा आयोजित किया जाने वाला अखिल भारतीय संस्‍कृत छात्र प्रतिभा मेला एक अनूठा आयोजन है। यह पहली बार फरवरी, 2007 में आयोजित किया गया था। उसके बाद से यह विद्यापीठ का एक नियमित और वार्षिक आयोजन बन गया है। चार दिन तक आयोजित होने वाले इस मेले में पूरे देश के संस्‍कृत संस्‍थानों से भागीदारों को आमंत्रित किया जाता है, ताकि छात्रों की छिपी हुई प्रतिभा/कौशल को प्रकाश में लाया जा सके।

वर्णमाल दीर्घा (गैलरी)     इस दीर्घा का उद्देश्‍य पूर्वकाल (3000 ई.पू.) से क्षेत्रीय लिपियों के विकास तक (नौवी ईस्‍वीं तक) भारत में वर्णमाला की उत्‍पत्ति, वृद्धि एवं विकास का पता लगाना है।

      सिंधु घाटी लेखों के ऐतिहासिक संबंध के लिए वस्‍तुओं का, विशेष रूप से मोहरों का जिन पर लिपि खुदी हुई थी, प्रदर्शन किया गया। ये मोहरे सिंधु घाटी स्‍थलों जैसे- पश्चिमी भारत में लोथल, नामक स्‍थान से 1950 से 1980 तक पुरातत्‍व विभाग द्वारा की गई खुदाई के दौरान प्राप्‍त हुई थीं। इस दीर्घा में अन्‍य सिंधु घाटी स्‍थलों जैसे मोहनजोदड़ो  (पाकिस्‍तान), कालीबंगा (भारत) के साथ-साथ प्राचीन पूर्वी स्‍थलों जैसे किश एवं बराक उर (समर-ईराक) हिसार एवं बहरीन से प्राप्‍त मोहरों के कुछ प्रतिरूप भी दर्शाय गए हैं। सिंधु घाटी की मोहरे, मुद्रांकन, शिल्‍प आदि के प्रतिरूप, तत्‍कालीन लोगों की जिंदगी के आंतरिक रूप का आभास कराते हैं और संस्‍कृत भाषा, वैदिक अवधारणों एवं परम्‍पराओं को ज्ञात स्‍तर की अपेक्षा उस समय के और पास ले जाते हैं।

प्राचीन भारतीय विज्ञान प्रदर्शनी     प्राचीन भारतीय विज्ञान प्रदर्शनी विद्यापीठ की एक परियोजना है, जिसका उद्देश्‍य संस्‍कृत साहित्‍य में निहित वैज्ञानिक ज्ञान को प्रकाश में लाना है। इस उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए राष्‍ट्रीय संस्‍कृत विद्यापीठ तिरुपति के संस्‍कृत विज्ञान अध्‍ययन केन्‍द्र द्वारा संस्‍कृत-विज्ञान के क्षेत्र में मार्ग प्रशस्‍त करने वाला कार्य किया गया है। इस केन्‍द्र के सघन प्रयासों द्वारा एक सार्थक विशाल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

इस प्रदर्शनी में प्राचीन संस्‍कृत शोध प्रबंधों से समांतर साईंस की विभिन्‍न शाखाओं से सम्‍बन्धित लगभग 200 अवधारणाओं को प्रदर्शित किया गया। इसके तहत आयुर्वेद, खगोल शास्त्र, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, मौसम विज्ञान, गणित, रत्नशास्त्र, ध्वनि विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, सैरी प्लांट्स आदि शाखाएं शामिल हैं। देश के विभिन्न राज्यों में स्थित 26 विश्वविद्यालयों और विभिन्न महाविद्यालयों में पहियों पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

सीखने के दौरान अर्जित करें

   विद्यापीठ अपने विद्यार्थियों को सीखने के दौरान अर्जित करें योजना के तहत अंशकालीन नौकरी के अवसर प्रदान करता है। विद्यापीठ के अधिकांश विद्यार्थी जिन्हें कम्‍प्‍यूटर और अन्य तकनीकी कौशल का ज्ञान है वह कुछ अनुसंधान परियोजनाओं और विद्यापीठ के अन्य कार्यक्रमों में शामिल हैं। जिससे वह अपनी ज़रुरतों के लिए पर्याप्त राशि का अर्जन कर सकते हैं।

प्रकाशन

      विद्यापीठ ने अपने स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य में 50 प्रकाशनों को प्रस्तुत किया। कुल मिलाकर विद्यापीठ के बहुमूल्य 275 प्रकाशन हैं।

संस्थानों/व्यक्तियों को सम्मान और पुरस्कार

      वर्ष 2009 के दौरान विद्यापीठ के प्रोफेसर कोम्पेला रामासूर्यानारायण को राष्ट्रपति का सम्मान पत्र प्राप्त हुआ। वर्ष 2010 में यही सम्मान प्रोफेसर के. ई. गोविंदन को प्रदान किया गया। विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर हरेकृष्णा सत्पति को संस्कृत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डालमिया श्रीवाणी अंलकार न्यास से सम्मानित किया गया। 2011 के दौरान कुलपति को उनके बहुमूल्य प्रकाशन भरतयानाम के लिए केन्द्रीय साहित्य अकादमी सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मेलनों/संगोष्ठियों/परिचर्चाओं का आयोजन

      वर्ष के दौरान विद्यापीठ ने लगभग 25 सम्मेलनों, संगोष्ठियों. परिचर्चाओं, कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया। विद्यापीठ हर वर्ष संस्कृत की उच्च शिक्षा से संबंधित विषयों पर व्याख्यान आयोजित करने के साथ महाविद्यालय स्तर के शिक्षकों के लिए रिफ्रेशर पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। वर्ष 2010 के दौरान विद्यापीठ ने 45वे अखिल भारतीय ऑरिएंटल सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें भारत और विदेशों से 3500 प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की और अपना अनुसंधान पत्र प्रस्तुत किया। (पसूका विशेष लेख)

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार

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रतनानी/इंद्रपाल/विजयलक्ष्मी/यशोदा- 43पूरी सूची 07/02/2012

 

 

 

 



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