विशेष लेख
विभिन्न
राज्यों और
केंद्र शासित
क्षेत्रों
में बिजली आपूर्ति,
सड़क परिवहन
और सिंचाई
सहित ढांचागत
सेवाएं उपलब्ध
कराने में राज्य
स्तरीय सार्वजनिक
उद्यमों ने
महत्वपूर्ण
भूमिका
निभार्इ है। भारी
उद्योग और
सार्वजनिक
उपक्रम
मंत्रालय
द्वारा
आयोजित राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उद्यमों (2007-08) के
दूसरे राष्ट्रीय
सर्वेक्षण
में समाज में
इन उद्यमों के
योगदान, राजस्व
जुटाने की
क्षमता और
मुनाफा बनाए
रखने की
क्षमता का
आकलन किया
गया।
भारत में काम
कर रहे राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उद्यमों की कुल
संख्या 849 है
तथा उनमें 18
लाख से अधिक
लोग काम कर
रहे हैं। 579
कंपनियों
द्वारा
ऑनलाइन दी गई
जानकारी पर
आधारित राष्ट्रीय
सर्वेक्षण से
पता चलता है
कि अनेक बाधाओं
के बावजूद इन
उपक्रमों ने
राज्य सरकार
के खजाने में
महत्वपूर्ण
योगदान दिया
है।
इन
उपक्रमों में
ज्यादातर
निवेश ढांचागत
परियोजनाओं
में हुआ है जो
प्राय: सार्वजनिक
सुविधाओं के
रूप में हुआ। 579
उद्यमियों
में से 357 राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रमों ने
मुनाफा कमाया
जबकि 190 को
नुकसान हुआ। भारी
उद्योग
मंत्री श्री
प्रफुल्ल
पटेल ने इस
नुकसान के
बारे में कहा
कि हालांकि इन
उपक्रमों का
प्राय:
एकाधिकार है
लेकिन वे कीमत
के लिहाज से
उन्हें
नुकसान होता
है क्योंकि
उन्हें
प्रशासित
मूल्य के तहत
कार्य करना
पड़ता है।
निवेश लागत
में व़ृद्धि
होने के
बावजूद इन
उपक्रमों के
माल एवं
सेवाओं की
कीमत
अपेक्षाकृत
रूप से नहीं
बढ़ रही है।
राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रमों में
निवेश का 67
प्रतिशत
बिजली और
ऊर्जा
क्षेत्र में
हुआ। इसके बाद
उद्योग का स्थान
है जहां लगभग 9
प्रतशित
निवेश हुआ।
वित्तीय
सेवाओं में 8
प्रतिशत
निवेश हुआ
जिनमें हथकरघा
और हस्तशिल्प
विकास, मत्स्य
पालन और
वानिकी विकास
जैसे विभिन्न
क्षेत्रों की
जरूरतें पूरी
करने वाले
विवधि संस्थान
शामिल हैं।
इसके बाद कुल 5
प्रतिशत
निवेश के साथ
परिवहन
सेवाओं का स्थान
है। खनन क्षेत्र
में 4.5
प्रतशित और व्यापार
एवं विपणन और
अन्य सेवाओं
में 3.5
प्रतशित तथा
कृषि में 2
प्रतिशत
निवेश हुआ।
579 राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उद्यमों में कुल
3,29,079 करोड़
रुपये निवेश
किए गए। इसमें
1,15,588 करोड़
रुपये चुकता
पूंजी तथा 1,83,256
करोड़ रुपये दीर्घावधि
ऋण के रूप में
हैं। तदनुसार
ऋण इक्विटी
अनुपात 1.6:1
बैठता है।
राज्य-वार
महाराष्ट्र
इस सूची में
सबसे ऊपर रहा
जहां कुल 63,129
करोड़ रुपये
का निवेश हुआ।
इसके बाद
गुजरात,
कर्नाटक,
आंध्र प्रदेश
और पश्चिम
बंगाल का स्थान
रहा।
वर्ष 2007-08
में राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उद्यमों में
निवेश के
मामले में
चोटी के पांच
राज्य इस
प्रकार हैं :-
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
निवेश (करोड़
रुपये में )
|
|
1
|
महाराष्ट्र
|
63,128.76
|
|
2
|
गुजरात
|
52,137.64
|
|
3
|
कर्नाटक
|
41,577.92
|
|
4
|
आंध्र
प्रदेश
|
33,154.22
|
|
5
|
पश्चिम
बंगाल
|
22,208.94
|
सरदार
सरोवर नर्मदा
निगम लिमिटेट
27,158 करोड़ रुपये
के निवेश के
साथ सबसे बड़ा
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम है।
वर्ष 2007-08
में निवेश के
मामले में
चोटी के पांच
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम इस
प्रकार हैं :-
|
क्रम संख्या
|
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम का
नाम
|
निवेश (करोड़
रुपये में )
|
|
1
|
सरदार सरोवर
नर्मदा निगम
लिमिटेट,
गुजरात
|
27,158.42
|
|
2
|
आंध्र
प्रदेश पॉवर
जनरेशन
कॉर्पोरेशन,
आंध्र
प्रदेश
|
13,297.21
|
|
3
|
महराष्ट्र
राज्य
बिजली बोर्ड
होल्डिंग
कंपनी
|
12,287.43
|
|
4
|
विदर्भ
सिंचाई
विकास,
महाराष्ट्र
|
9,936.89
|
|
5
|
कावेरी
|
9,660.03
|
वर्ष 2007-08
में सकल
कारोबार के
मामले में
चोटी के पांच
राज्य इस
प्रकार हैं :-
|
क्रम संख्या
|
राज्य
|
निवेश (करोड़
रुपये में )
|
|
1
|
गुजरात
|
42,037.94
|
|
2
|
महाराष्ट्र
|
35,725.48
|
|
3
|
आंध्र
प्रदेश
|
27,741.30
|
|
4
|
तलिनाडु
|
22,556.32
|
|
5
|
कर्नाटक
|
19,905.15
|
वर्ष 2007-08
में सकल
कारोबार के
मामले में
चोटी के पांच
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम इस
प्रकार हैं :-
|
क्रम संख्या
|
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम का
नाम
|
निवेश (करोड़
रुपये में )
|
|
1
|
महावितरण
|
20,158.61
|
|
2
|
गुजरात
ऊर्जा विकास
निगम
लिमिटेड
|
14,013.92
|
|
3
|
तमिलनाडु
राज्य
विपणन निगम
लिमिटेड
|
10,486.43
|
|
4
|
आंध्र
प्रदेश
बेवरेज निगम
लिमिटेड
|
8,429.85
|
|
5
|
महाजेनको
|
8,081.97
|
रोजगार
वर्ष 2007-08
में
श्रमशक्ति के
मामले में
चोटी के पांच
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम इस
प्रकार हैं :-
|
क्रम संख्या
|
राज्य स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रम का
नाम
|
निवेश (करोड़
रुपये में )
|
|
1
|
आंध्र
प्रदेश सड़क
परिवहन निगम
|
1,13,340
|
|
2
|
महाराष्ट्र
राज्य सड़क
परिवहन निगम
|
1,00,774
|
|
3
|
महा वितरण
|
80,950
|
|
4
|
सियाग्रेनी
कोलेरीज
लिमिटेड
|
75,579
|
|
5
|
गुजरात राज्य
सड़क परिवहन
निगम
|
44,891
|
आर्थिक
वृद्धि की दर
नटरी पर बनाए
रखने के लिए यह
सुनिश्चित
करना महत्वपूर्ण
है कि आपूर्ति
संबंधी कोई
अड़चन न रहे।
इसके लिए राज्य
स्तरीय
सार्वजनिक
उपक्रमों,
खासतौर से
ढांचागत
क्षेत्र के
उपक्रमों को
बहुत महत्वपूर्ण
भूमिका
नभिानी है।
इसलिए
संबंधित राज्य
सरकारों को
ऐसे उद्योगों
को प्रोत्साहन
देने के लिए
अनुकूल माहौल
तैयार करना चाहिए।
यह राष्ट्रीय
सर्वेक्षण
वेबसाइट http://dpeslpe.gov.in पर देखा जा
सकता है।
*****
वि. कासोटियो /
प्रदीप – 162
पूरी
सूची