फीचरजानकारी
*डॉ. के. परमेश्वरन
·
वेस्टर्न
घाट एक पर्वतीय
श्रृंखला है, जो
भारत के पश्चिमी
किनारे पर स्थित
है।
·
दक्कनी
पठार के पश्चिमी
किनारे के साथ-साथ
यह पर्वतीय श्रृंखला
उत्तर से दक्षिण
की तरफ 1600 किलोमीटर
लम्बी है।
·
यह विश्व
में जैविकीय विवधता
के लिए बहुत महत्वपूर्ण
है और इसका विश्व
में 8वां नंबर है।
·
यह गुजरात
और महाराष्ट्र
की सीमा से शुरू
होती है और महाराष्ट्र,
गोवा, कर्नाटक,
तमिलनाडु तथा केरल
से होते हुए कन्याकुमारी
में समाप्त हो
जाती है।
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इन पहाडि़यों
का कुल क्षेत्र
160,000 वर्ग किलोमीटर
है।
·
इसकी औसत
उंचाई लगभग 1200 मीटर
(3900 फीट) है।
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इस क्षेत्र
में फूलों की पांच
हजार से ज्यादा
प्रजातियां, 139 स्तनपायी
प्रजातियां, 508 चिडि़यों
की प्रजातियां
और 179 उभयचर प्रजातियां
पाई जाती हैं।
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ऐसी जानकारी
प्राप्त हुई है
कि वेस्टर्न घाट
में कम से कम 84 उभयचर
प्रजातियां और
16 चिडि़यों की प्रजातियां
और सात स्तनपायी
और 1600 फूलों की प्रजातियां
पाई जाती हैं, जो
विश्व में और
कहीं नहीं हैं।
·
वेस्टर्न
घाट में सरकार
द्वारा घोषित कई
संरक्षित क्षेत्र
हैं। इनमें दो
जैव संरक्षित क्षेत्र
और 13 राष्ट्रीय
पार्क हैं।
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वेस्टर्न
घाट में स्थित
नीलागिरी बायोस्फियर
रिजर्व का क्षेत्र
5500 वर्ग किलोमीटर
है, जहां सदा हरे-भरे
रहने वाले और मैदानी
पेड़ों के वन मौजूद
हैं।
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केरल का
साइलेंट वैली राष्ट्रीय
पार्क वेस्टर्न
घाट का हिस्सा
है। यह भारत का
ऐसा अंतिम उष्णकटिबंधीय
हरित वन है, जहां
अभी तक किसी ने
प्रवेश नहीं किया
है।
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अगस्त,
2011 में वेस्टर्न
घाट पारिस्थितिकी
विशेषज्ञ पैनल
ने पूरे वेस्टर्न
घाट को पारिस्थितिकीय
रूप से संवेदनशील
क्षेत्र घोषित
किया है। पैनल
ने इसके विभिन्न
क्षेत्रों को तीन
स्तर पर संवेदनशील
बताया है।
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2012 में यूनेस्को
ने वेस्टर्न घाट
क्षेत्र के 39 स्थानों
को विश्व धरोहर
स्थल घोषित किया
है। (पसूका फीचर)
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* सहायक निदेशक,
पत्र सूचना कार्यालय,
मदुरै
वि.कासोटिया/अरूण/तारा
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