Releases Hindi Releases Urdu Releases Photos Invitations Features Hindi Features Accreditation RSS Feedback Subscribe Releases Search Advance Search
Quick Search
home Home
हिंदी लेख
माह वर्ष
  • युवाओं के लिए रोजगार अवसरों का सृजन (22-मई,2013)
  • देशी रोटावायरल टीके से हर साल बचाये जा सकते हैं लाखों बच्‍चे (21-मई,2013)
  • नियंत्रण मुक्‍त चीनी - गन्‍ना किसानों, उपभोक्‍ताओं और चीनी क्षेत्र के हितों की रक्षा (20-मई,2013)
  • बेहतर स्‍कूली शिक्षा तक सबकी पहुंच के लिए समावेशी पहलें (20-मई,2013)
  • हास्‍य व्‍यंग्‍य शैली के जादूगर अल्‍हड़ बीकानेरी (16-मई,2013)
  • 'इस्‍पात' परिदृश्‍य

    (16-मई,2013)
  • वर्ष 2013: जल संरक्षण वर्ष
    (16-मई,2013)
  • जिला और अधीनस्‍थ न्‍यायालयों का कम्‍प्‍यूटरीकरण (09-मई,2013)
  • तंजौर और मैसूर की कलाकृतियां (08-मई,2013)
  • आयकर लोकपाल: अपनी शिकायतें दूर करने के लिए इनकी मदद लें (07-मई,2013)
  • 'ज्ञान से मज़बूती': रक्षा प्रयोगशाला, जोधपुर में अनुसंधान और विकास (06-मई,2013)
  • स्‍पीक मैके- पारंपरि‍क भारतीय शास्‍त्रीय संगीत और संस्‍कृति के उत्‍थान का महत्‍वपूर्ण अंतरराष्‍ट्रीय मंच (01-मई,2013)
  • गुना में स्थित मसाला पार्क का काम शुरू (01-मई,2013)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

चिनाब रेल पुल विश्‍व में सबसे ऊंचा होगा
विशेष लेख

विशेष लेख

रेल

*एच सी कुंवर

 

      जम्‍मू-कश्‍मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर विश्‍व का सबसे लंबा रेल पुल बनाया जा रहा है। रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक उपक्रम कोंकण रेलवे कारपोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) इसके निर्माणकार्य में जुटा है। वर्ष 2016 तक इसका निर्माणकार्य पूरा होने की संभावना है। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल संपर्क (यूएसबीआरएल) परियोजना पर होगा, जो कश्‍मीर की मनोरम घाटी को रेल संपर्क उपलब्‍ध कराने के लिए एक राष्‍ट्रीय परियोजना है। कोंकण रेलवे ने दिसंबर 2002 में कटरा से लेकर धरम तक ‍यूएसबीआरएल परियोजना के एक हिस्‍से के निर्माणकार्य को अपने हाथ में लिया है। चिनाब पुल संभवत: एक सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण परियोजना है क्‍योंकि इसका निर्माण 359 मीटर की ऊंचाई तक होना है (कुतुब मीनार की ऊंचाई 72 मीटर है और एफिल टावर की ऊंचाई 324 मीटर है)। चिनाब पुल का मध्‍यवर्ती विस्‍तार 457 मीटर है। निर्माणकार्य पूरा होने के बाद यह पुल नदी तल से सबसे ऊँचा रेल पुल हो जायेगा। इस समय विश्‍व का सबसे ऊँचा रेल पुल फ्रांस की टैम नदी पर बना है, जिसका सबसे ऊँचा पीलर 340 मीटर का है, जबकि इस पर जहां रेलगाड़ी चलती है उसकी वास्‍तविक ऊँचाई 300 मीटर है। इस पुल का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है ताकि यह आंधी के झोंके को सहन कर सके। इस पुल की यह विशेषता अंतर्राष्‍ट्रीय तौर पर अद्वितीय है। इस पुल की पेंटिंग 35 वर्ष के लिए की जाती है और 120 वर्ष के इसके जीवनकाल में केवल तीन बार पेंटिंग करने की जरूरत होगी।

      नदी पर बनने वाले इस पुल के मेहराब के हिस्‍से के निर्माण के लिए एक नई निर्माण प्रक्रिया का इस्‍तेमाल किया जा रहा है जिसमें केबल कार की मदद ली जा रही है। यह केबल कार 54 एम.एम. की तार पर चलती है जो नदी घाटी के आर-पार लगाई गई है तथा नदी के एक किनारे को दूसरे किनारे के साथ 127 मीटर ऊंची मीनार के माध्‍यम से जोड़ा गया है। इस परियोजना के लिए इस्‍पात का काफी इस्‍तेमाल किया जा रहा है। चिनाब पुल के निर्माण में आधार के निर्माण के लिए 46 हजार सीयूएम कंक्रीट, 3600 टन रिइनफोर्समेंट स्‍टील और 25 हजार टन स्‍ट्रक्‍चरल स्‍टील का इस्‍तेमाल किया जा रहा है जो किसी फुटबाल के मैदान के आकार की जमीन पर 54 मंजिले भवन के आकार के समतुल्‍य है। इस्‍पात संरचना को आपस में जोड़ने के लिए अत्‍याधुनिक वैल्डिंग प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

चिनाब नदी के ऊपर रेलवे पुल बन जाने से बक्‍कल (कटरा) और कौरी (श्रीनगर) के किनारे आपस में जुड़ गए हैं। नदी के बहाव में बिना किसी अवरोध के पुल निर्माण करना एक चुनौती भरा काम था। प्रमुख आधारशिला तक पहुंचने के लिए लगभग पांच किलोमीटर लंबी जो सड़क बनाई जा रही है, वह बड़े दुर्गम इलाके में स्थित है। आधारशिला की स्थिरता के लिए ढलानों को इस तरह बनाया गया है ताकि कोई दिक्‍कत न हो। ये ढलानें चट्टानों को आपस में जोड़कर सुरक्षित की गई हैं। कटरा की तरफ से रेलवे लाइन 5.9 किलोमीटर लंबी सुरंग से गुजरती है और अन्‍य पुलों से होते हुए, सलाई-ए नामक स्‍टेशन पर पहुंचती है। चिनाब पुल से गुजरने के बाद, रेललाइन सलाई-बी हाल्‍ट स्‍टेशन पर तक आती है। ये दोनों स्‍टेशन नदी के दोनों किनारों पर रहने वाली स्‍थानीय आबादी की सुविधा के लिए बनाए जा रहे हैं।

पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह 266 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाले हवा के झोंकों को झेल सके। इसका परीक्षण डेन्‍मार्क में किया जा चुका है। बहरहाल, रेलगाड़ी को उस समय पुल पर जाने से रोक दिया जाएगा, जब हवा की गति 90 किलोमीटर प्रतिघंटे से अधिक होगी। हवा की गति नापने के लिए वायु मापक यंत्र लगाए जाएंगे। इसके अलावा भूकंप, तापमान की निगरानी आदि की अवस्‍था में भूगर्भीय गति को मापने के लिए गतिमापक यंत्र भी लगाए जाएंगे। ये दोनों यंत्र निकटवर्ती स्‍टेशन को खतरे की सूचना देने के लिए संवेदनशील स्‍थानों पर लगाए जाएंगे। पुल के लिए विभिन्‍न भू-तकनीकी जांचें की जा रही हैं, जिसमें मिट्टी की जांच, पुल की मेहराब आदि शामिल हैं।

कटरा से धरम तक के क्षेत्र का निर्माण कोंकण रेलवे कर रही है। यह पूरा क्षेत्र 70 किलोमीटर लंबा है। इसमें 59.457 किलोमीटर (85 प्रतिशत) रास्‍ता सुरंगों से, 6.6 किलोमीटर (9 प्रतिशत) रास्‍ता पुलों से और बाकी (6 प्रतिशत) रास्‍ता मोड़ों से होकर गुजरता है। इस स्‍थल तक पहुंचने के लिए कोंकण रेलवे को 166 किलोमीटर लंबी परियोजना-सड़क बनानी होगी, इसमें सुरंगों और अस्‍थायी पुलों का निर्माण भी करना होगा।

संरेखन की समीक्षा के लिए जुलाई 2008 में काम रूक गया था। समीक्षा के बाद सितंबर 2009 में काम फिर से शुरू हुआ। बदले नियम को ध्‍यान में रखते हुए अभी 28 किलोमीटर की दूरी का स्‍थानिक सर्वेक्षण का काम चल रहा है। परियोजना को दिसंबर 2017 तक पूरा करने का लक्ष्‍य है। परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए कोंकण रेलवे ने जम्‍मू में परियोजना मुख्‍यालय स्‍थापित किया है। इस परियोजना के शिविर रियासी, कौरी, दुग्‍गा और संगलधन में स्थित हैं। परियोजना को पूरा करने के लिए कोंकण रेलवे (केआरसीएल) ने 240 कर्मचारियों और इंजीनियरों के एक दल को लगा रखा है। निर्माण के लिए उपयुक्‍त मशीनें, सामग्री, आवश्‍यक तकनीक और कुशल एवं अकुशल श्रमशक्ति की व्‍यवस्‍था कोंकण रेलवे के ठेकेदार कर रहे हैं।

डिजाइन में मदद के लिए कई राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों को लगाया गया है। रेलवे के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए पथरीली जमीन पर 166 किलोमीटर लंबी संपर्क सड़क का निर्माण भी काफी चुनौतीपूर्ण काम है।

कोंकण रेलवे को रोहा से ठोकुर (मंगलौर के पास) तक 740 किलोमीटर के रेलमार्ग के निर्माण का अनुभव है। इस रेलमार्ग पर 85 किलोमीटर के बीच 91 सुरंग हैं। इसमें देश की सबसे लंबी 6.5 किलोमीटर लंबा कारबुडे परिवहन सुरंग भी शामिल है । पूरे कोंकण रेलवे मार्ग पर 179 बड़े पुल बनाए गये हैं जिनकी कुल लंबाई 19.8 किलोमीटर है। इस मार्ग पर सबसे बड़ा पुल 2 किलो मीटर लंबा शारवती नदी पर है।

***

 

वि.कासौटिया/सुधीर/अरूण/अनिल/भगवती/सुनीता/पवन -182



विशेष लेख को कुर्तिदेव फोंट में परिवर्तित करने के लिए यहां क्लिक करें
डिज़ाइन एवं होस्‍ट राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी),सूचना उपलब्‍ध एवं अद्यतन की गई पत्र सूचना कार्यालय
ए खण्‍ड शास्‍त्री भवन, डॉ- राजेंद्र प्रसाद रोड़, नई दिल्‍ली- 110 001 फ़ोन 23389338