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विशेष सेवा और सुविधाएँ

खनिजों से संबंधित लेन-देन की ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली
विशेष लेखखान मंत्रालय

विशेष लेखखान मंत्रालय 

*संजीव कुमार सुंद्रियाल

 

      अधिकाधिक पारदर्शिता लाने के अपने सतत् प्रयास में खान मंत्रालय ने लौह अयस्‍क के मासिक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा के लिए खनिजों से संबंधित लेन-देन पर आधारित एमसीडीआर, 1988 के नियम 45 के अधीन एक ऑनलाइन पंजीकरण और रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित की है। खान राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री दिनशा जे. पटेल ने खनिजों से संबंधित लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली के पहले चरण की शुरूआत की। इसके माध्‍यम से देशभर में लौह अयस्‍क और मैंगनीज अयस्‍क जैसे खनिजों के लिए मासिक रिटर्न दाखिल करने पर विशेष जोर दिया जायेगा। अन्‍य खनिजों को इसमें सितंबर 2012 तक शामिल किया जायेगा। फिलहाल खनिज प्रशासन की मौजूदा प्रणाली और खनिज से संबंधित उत्‍तरदायित्‍व राज्‍य सरकार के पास है। मंत्रालय के पास सीमित अधिकार हैं जिसमें भारतीय खान ब्‍यूरो के माध्‍यम से खनिज संरक्षण और विकास नियमावली, 1988 (एमसीडीआर) का प्रशासन शामिल नहीं हैं। अब ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने में आासानी लाने के उद्देश्‍य से रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित की गई है। भारतीय खान ब्‍यूरो की ओर से पंजीकरण संख्‍याएं आवंटित की जायेंगी और उसका रिकॉर्ड रखा जायेगा, जिसका इस्‍तेमाल खनिजों के खनन, व्‍यापार, भंडारण, अंतिम उपयोग अथवा निर्यात से संबंधित सभी रिपोर्टिंग और पत्राचार के लिए किया जायेगा। सभी राज्‍य सरकार रिटर्नों में शामिल आंकड़े की जांच करने की प्रणाली तक पहुंच कायम करने में सक्षम होगी और आंकड़े की रिपोर्टिंग में गलती पाये जाने, रॉयल्‍टी की वंचना आदि से संबंधित त्रुटियों के मामले में कार्रवाई कर सकेगी।

      कुछ समय बाद मंत्रालय को इस बात की जानकारी मिली है कि राज्‍य स्‍तर पर कमजोर शासन के कारण खनन क्षेत्र में भ्रष्‍टाचार बढ़ा है जिससे अवैध खनन के मामले भी बढ़े हैं। इस प्रकार उत्‍पादित खनिज, व्‍यापार, भंडारण, उपभोक्‍ताओं द्वारा खरीद अथवा निर्यात के माध्‍यम से खनिज बाजार में आते हैं। इस स्थिति में सरकार के लिए ख‍नन और खनिज से संबंधित लेन-देन की निगरानी के लिए कड़े उपाय करना जरूरी हो गया है ताकि इस क्षेत्र में भ्रष्‍टाचार पर नियंत्रण किया जा सके।

       भविष्‍य में इस प्रणाली को रेलवे और बंदरगाह प्राधिकरणों के साथ जोड़ दिया जायेगा ताकि इस नियम के अधीन रिपोर्टिंग की सच्‍चाई की जांच हो सके।

      ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली को ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली से जोड़ा गया है। मुख्‍य रूप से रिपोर्टिंग प्रणाली को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग में नियोजन संबंधी विवरण के अलावा सामान्‍य जानकारी शामिल है। दूसरे भाग में मासिक रिपोर्टिंग प्रणाली शामिल है जिसमें खनिजों के दर्जे के अनुसार उत्‍पादन, उसे भेजने, भंडारण करने, उत्‍पादन बढ़ने अथवा घटने के कारण और विक्रय मूल्‍य से संबंधित विवरण शामिल हैं। रिपोर्टिंग प्रणाली के दूसरे भाग में खनिजों की खेप पाने वाले की पंजीकरण संख्‍या और विक्रय का उद्देश्‍य कि क्‍या इसका घरेलू इस्‍तेमाल होना है अथवा निर्यात किया जाना है और घरेलू इस्‍तेमाल के मामले में इसका सीमित उपयोग होना है अथवा बिक्री अथवा हस्‍तांतरण होना है।

      भारतीय खान ब्‍यूरो में ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली शुरू हो चुकी है और अब तक 4898 लीज धारकों (9390 खान शामिल), 2345 व्‍यापारियों, 476 निर्यातकों, 1033 स्‍टाकिस्‍टों और 1653 उपभोक्‍ताओं ने अपने विवरण पंजीकृत कराये हैं। इसके अलावा भारतीय खान ब्‍यूरो ने एमसीडीआर, 1988 के नियम 45 के प्रावधानों के अनुसार 1560 खनिजों के संचालनों को स्‍थगित कर दिया है। इसमें से 21 खानों के संबंध में लीज निरस्‍त करने के लिए राज्‍य सरकार के पास अनुशंसा भेजी गई है।

      संशोधित एमसीडीआर 1988 के नियम 45 में दोषी खान मालिकों के विरूद्ध दंडात्‍मक कार्रवाई का प्रावधान है और सभी खनन संचालनों के स्‍थगन के क्रम में राज्‍य सरकारों को अधिकृत किया गया है और राज्‍य सरकार समुचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के बाद स्‍थगन आदेश समाप्‍त भी कर सकती है, साथ ही मुकदमा शुरू करने और खनन लीज को निरस्‍त करने की अनुशंसा भी कर सकती है। इस नियम में यह भी प्रावधान शामिल किया गया है कि खनिजों के व्‍यापार अथवा भंडारण अथवा उपभोग अथवा निर्यात के काम में लगे दोषी लोगों के मामले में राज्‍य सरकार व्‍यापार लाइसेंस, परिवहन लाइसेंसों, खनिजों के भंडारण लाइसेंस और उपभोक्‍ता उद्योगों के लिए अनुमतियों आदि को निलंबित करने के लिए अधिकृत होगी। रिपोर्टिंग प्रणाली को इस प्रकार का तैयार किया गया है कि स्‍वत: ही उल्‍लंघन से जुड़ी शिकायतें सामने आ सकें और उन दोषियों को इसके बारे में पत्र जारी किया जा सके जो प्रत्‍येक माह की दस तारीख तक रिटर्न दाखिल करने में विफल रहते हैं। सख्‍त कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करने के क्रम में राज्‍य सरकार व्‍यापारियों, स्‍टॉकिस्‍टों, निर्यातकों और उपभोक्‍ताओं के साथ साझेदारी करेगी।

(पसूका विशेष लेख)

*मीडिया और संचार अधिकारी, पसूका, नई दिल्‍ली

वि. कासोटिया/सुधीर/भगवती 183

 

 



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