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विशेष सेवा और सुविधाएँ

लंबी अवधि के लिए कृषि विकास को बढ़ावा देने हेतु कदम

विशेष लेख

भारतीय किसानों का अदम्य साहस

http://pibphoto.nic.in/documents/rlink/2016/dec/i2016123027.jpg

                                                                *गार्गी परसाई

    वर्ष 2016 में कृषि सरकार की प्राथमिकता सूची में रहा, पर वर्ष के अंत में सरकार की विमुद्रीकरण नीति के कारण यह फीका पड़ गया। गौरतलब है कि लगातार दो वर्षों का सूखा भी किसानों के अदम्य साहस को कमजोर नहीं कर पाया जिन्होंने फसल वर्ष 2015-16 के चौथे अग्रिम अनुमान को गलत साबित करते हुए 252.22 मिलियन टन खाद्यान का उत्पादन किया जो पिछले वर्ष 252.02 मिलियन टन के उत्पादन से कहीं ज्यादा है।

    मानसून की कमी के कारण इस वर्ष देश के कुछ हिस्सों में खरीफ की फसल बर्बाद हो गई, जिससे धान, मोटे अनाज, तिलहन, दलहन और कपास के उत्पादन में मामूली गिरावट दर्ज की गई। कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने 29 दिसंबर को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हालांकि रबी में गेहूं की उपज फसल वर्ष 2015-16 में 93.5 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया गया था जो पिछले वर्ष 86.53 मिलियन टन था और प्राप्ति निर्धारित लक्ष्य की तुलना में कम रहा। आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने निजी अकाउंट में शून्य प्रतिशत की ड्यूटी पर गेहूं आयात की अनुमति देने का निर्णय लिया है।   

    सरकार ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए ज्यादा से ज्यादा खाद्यान की खरीद करेगी और गेहूं उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, जो सरकार ने फसल वर्ष 2016-17 के लिए 1625 रूपया प्रति क्विंटल तय किया है, हेतु तेजी से बाजार में हस्तक्षेप भी करेगी।

    इस तरीके से 2016 में कृषि के क्षेत्र में भी तेजी से डिजिटलीकरण का विकास हुआ है जिसके परिणामस्वरूप मोबाइल एप की शुरूआत की गई है। कृषि मंत्रालय ने मौसम की जानकारी, बाजार की कीमतों और फसल रोगों की जानकारी देने के लिए किसान सुविधाएप का शुभारंभ किया; पूसा कृषि एप बीज की नई किस्मों और नवीनतम तकनीक की जानकारी उपलब्ध करा रहा है; कृषि बाजार एप किसानों को 50 किलोमीटर के दायरे में मंडी की कीमतों के बारे में जानकारी देता है; फसल बीमा एप फसल बीमा से संबंधित सारी जानकारी देता है; फसल को काटने संबंधित जानकारी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट्स एप के जरिए मिलती है। लाखों किसान इन सारे एप्स को डाउनलोड कर लाभान्वित हो रहे हैं।

    इस वर्ष सिर्फ किसानों के लिए बैंकिंग प्रणाली द्वारा कृषि क्षेत्र को ऋण देने की सीमा बढ़ाकर 9 लाख करोड़ की गई है बल्कि विमुद्रीकरण के बाद सरकार ने भुगतान के लिए कैशलेस लेन-देन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को प्रोत्साहित करने हेतु भी कई पहल की हैं। यदि ऐसा होता है तो मंडी संचालन में मीडिल मैन/कमीशन एजेंटों से किसानों को मुक्ति मिलेगी जिससे इन्हें अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने में सुविधा होगी जो इन सब किसानों के लिए बड़ा कदम होगा।          

     जैसा हमने देखा कि वर्ष 2016 में सरकार ने कृषि क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी, ताकि उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल से प्रभावित हो रहे क्षेत्रों जैसे मृदा स्वास्थ्य (मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नीम लेपित यूरिया और जैविक खेती), जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से किसानों की आय के प्रभाव को कम करने के लिए (फसल बीमा योजना), निर्बाध व्यापार के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक मंच (राष्ट्रीय कृषि -मार्केट) तथा ज्यादा-से-ज्यादा भूमि को सिंचित खेती के तहत लाने के लिए (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना) कदम उठाये गये। इसके साथ ही अन्य संबंधित क्षेत्रों जैसे दलहन, तिलहन, बागवानी, मत्स्य, पशुपालन, दुग्ध, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।

    वर्ष 2021 तक किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार की प्रतिबद्धता के तहत वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने लंबी अवधि के उपायों की घोषणा की है और कृषि परिव्यय जो वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट में 15809 करोड़ रूपये था उसे बढ़ाकर 39884 करोड़ रूपये किया। अंतरिम बजट में कृषि कल्याण उपकर के जरिए भी इस क्षेत्र को 5000 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी।   

     इसके अलावे नाबार्ड के सहयोग से 20000 करोड़ रूपये की  राशि का एक अतिरिक्त कोष भी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बनाया गया है जिसके तहत हर खेत को पानी देने का उद्देश्य रखा गया है। इसके तहत वर्ष 2019 तक 76.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के तहत लाया जाना प्रस्तावित है।  

    किसानों को मानसून के प्रभाव से बचाने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने इस वर्ष से 5500 करोड़ रूपये की राशि के प्रावधान के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की है। इस योजना के तहत राज्य और केन्द्र सरकार मिलकर प्रीमियम की 90 प्रतिशत राशि का वहन करेंगे। इस खरीफ वर्ष में 21 राज्यों के 366.64 लाख किसानों को इसके दायरे में लाया गया है।  

    किसानों को उनकी उपज के विपणन और लाभकारी मूल्य प्राप्त करना सबसे बड़ा चिंता का विषय रहा है जिसके लिए सरकार ने 10 राज्यों के 250 से अधिक मंडियों को बेहतर कीमत वसूली और व्यापक पहुँच के लिए -एनएएन (राष्ट्रीय कृषि बाजार) पोर्टल के तहत एकीकृत किया है। पिछले सप्ताह तक इस इलेक्ट्रोनिक प्लेटफार्म के जरिए 713.21 करोड़ रूपये का लेन-देन सम्पादित किया गया है जिसे विपणन के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।   

    दाल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने आयात और घरेलू आपूर्ति के जरिए 2 मिलियन टन का बफर स्टॉक बनाया है। इसी समय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सरकार ने दालों के लिए ज्यादा आवंटन किया है और उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कई उपाय किए हैं।  सरकार ने अगले वर्ष 20.75 मिलियन टन दाल के उत्पादन का लक्ष्य रखा है जबकि पिछले वर्ष उत्पादन 16.47 मिलियन टन रहा था। इसके साथ ही गन्ना किसानों के बकाये का भी तेजी से भुगतान किया जा रहा है।    .   

    मानसून के प्रभाव का डर किसानों को हमेशा लगा रहता है। सरकार ने किसानों की फसलों को सूखा, बाढ़ और ओलों इत्यादि से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए मुआवजे के मानदंडों में संशोधन किया है। फसल क्षति ग्रस्त होने पर किसान 33 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत मुआवजे के पात्र होंगे। पिछले दो वर्षों में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के तहत राज्यों को 24556 करोड़ रूपये खर्च करने के लिए दिया गया है। क्षतिग्रस्त फसलों की तस्वीरें अपलोड करने के लिए स्मार्ट फोन और इसके आकलन के लिए ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल  किया जा रहा है।

      पूर्वी और उत्तर पूर्वी राज्यों में बढ़ती जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरी हरित क्रांति पर नए उत्साह के साथ ध्यान केंद्रित किया गया है। समग्र अर्थव्यवस्था के विकास के लिए इस क्षेत्र का विकास महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि इस वर्ष कृषि की विकास दर पिछले वर्ष की तुलना में 1.1 प्रतिशत अधिक होगा।

*गार्गी परसाई पुरस्कार विजेता लेखिका है हैं और  नई दिल्ली में स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के स्वयं के हैं।

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पूरी सूची – 30.12.2016


वीके/मंजू मीणा/पीकेपी/वाईबी-03



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