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जल संसाधन मंत्रालय19-फरवरी, 2017 17:30 IST

तृतीय राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा सम्‍मेलन आयोजित

उत्‍तराखंड जल विद्युत निगम एवं आईआईटी रूड़की के सहयोग से केन्‍द्रीय जल आयोग द्वारा आयोजित तृतीय राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा सम्‍मेलन आज रूडकी में सम्‍पन्‍न हो गया। इस सम्‍मेलन में बांध सुरक्षा के क्षेत्र में प्रमुख चुनौतियों पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया, जिनका सामना वर्तमान में जारी बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के कार्यान्‍वयन में करना पड़ रहा है। विभिन्‍न राष्‍ट्रीय एवं विदेशी विशेषज्ञों द्वारा ज्ञान, अनुभव, नवोन्‍मेषन, नवीन प्रौद्योगिकियों आदि साझा किये जाने से बांध डिजाइन, निर्माण, परिचालन एवं रख-रखाव से जुड़ी अनिश्चितताओं को कारगर ढंग से प्रबंधित करने के लिए कार्य नीतियों को आकार देने में और मदद मिली।

     इस सम्‍मेलन को काफी उत्‍साहवर्धक प्रतिक्रिया प्राप्‍त हुई, जिसमें 400 से अधिक शिष्‍टमंडलों ने भाग लिया तथा देश के भीतर और देश के बाहर के विशेषज्ञों के 70 से अधिक तकनीकी शोध पत्र प्रस्‍तुत किये गये। लगभग 40 राष्‍ट्रीय एवं विदेशी संगठनों ने सम्‍मेलन स्‍थल पर आयोजित प्रदर्शनी के जरिए अपनी प्रौद्योगिकियों, उत्‍पादों एवं सेवाओं को प्रदर्शित किया। इस समारोह में अमरीका, ऑस्‍ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्‍पेन, नीदरलैंड तथा जर्मनी के पेशेवर व्‍यक्तियों ने हिस्‍सा लिया।

    सम्‍मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय में सचिव डॉ. अमरजीत सिंह द्वारा उत्‍तराखंड सरकार के मुख्‍य सचिव श्री एस. रामस्‍वामी, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एनएमसीजी के महानिदेशक श्री यू.पी. सिंह, आईआईटी रूडकी के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी एवं केन्‍द्र सरकार, राज्‍य सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों तथा डीआरआईपी कार्यान्वित करने वाले अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

     प्रतिभागियों के बीच अंत:संपर्कों, संगठनों द्वारा अपनी प्रौद्योगिकियों तथा अपने उत्‍पाद पेश किये जाने तथा विशेषज्ञों द्वारा शोध पत्र प्रस्‍तुत किये जाने से बांधों की बेहतर निगरानी, संचालन एवं रख-रखाव तथा पुनर्वास के लिए कार्य नीतियों को और अधिक निर्धारित करने में बांध सुरक्षा पेशेवर व्‍यक्तियों एवं प्रबंधनों को मदद मिलेगी। सम्‍मेलन के दौरान किये गये विचार विमर्शें से उत्‍पन्‍न प्रमुख अनुशंसाओं को हितधारकों तथा कार्यान्‍वयन के लिए नीति निर्माताओं को वितरित किये जाएंगे। सम्‍मेलन के लिए प्राप्‍त चुने हुए शोध पत्रों को बांधों के डिजाइन, निर्माण, परिचालन एवं रख-रखाव के लिए जिम्‍मेदार राज्‍य एजेंसियों के पुस्‍तकालयों में एक स्‍थायी संदर्भ उपलब्‍ध कराने के लिए एक सार संग्रह के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।

     बांधों ने तेज एवं सतत कृषि तथा ग्रामीण प्रगति और विकास को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाई है, जोकि आजादी के बाद से भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। पिछले 70 वर्षों के दौरान भारत ने खाद्य, ऊर्जा एवं जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशयों में सीमित सतही जल संसाधनों को प्रबंधित एवं भंडारण करने के लिए आवश्‍यक अवसंरचना में उल्‍लेखनीय रूप से निवेश किया है। लगभग 283 बिलियन क्‍यूबिक मीटर की कुल भंडारण क्षमता के साथ बड़े बांधों की संख्‍या के लिहाज से दुनिया में चीन और अमरीका के बाद भारत का तीसरा स्‍थान है। लगभग 80 प्रतिशत बड़े बांधों ने 25 वर्ष की उम्र पार कर ली है और उनमें से कई के सामने अब विलंबित रख-रखाव की चुनौती खड़ी हो गई है। इनमें से कई बांध बेहद पुराने हैं (लगभग 170 बांधों की उम्र 100 वर्ष से अधिक है) और उनका निर्माण ऐसे समय में हुआ था, जिनके डिजाइन प्रचलन एवं सुरक्षा संबंधी विचार वर्तमान डिजाइन मानकों एवं मौजूदा सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

     इनमें से कई बांधों के सामने कठिनाइयां उत्‍पन्‍न हो रही हैं और उनकी संरचनात्‍मक सुरक्षा तथा परिचालनगत कुशलता सुनिश्चित करने के लिए उन पर तत्‍काल ध्‍यान दिये जाने की आवश्‍यकता है। बड़े बांधों की विफलता बांधों द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही सेवाओं को बाधित करने के अलावा गंभीर रूप से जान, माल एवं पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है। इसके महत्‍व को महसूस करते हुए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने 2012 में विश्‍व बैंक की सहायता से 6 वर्षींय बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) की शुरूआत की। इसमें संस्‍थागत सुधारों एवं सुरक्षित तथा वित्‍तीय रूप से टिकाऊ बांध परिचालनों से संबंधित नियामकों उपायों को मजबूत बनाने के साथ भारत के 7 राज्‍यों में 225 बड़ी बांध परियोजनाओं में व्‍यापक पुनर्वासएवं सुधार के प्रावधान हैं। इस परियोजना का कार्यान्‍वयन 7 राज्‍यों (झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्‍य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु एवं उत्‍तराखंड) में किया जा रहा है।

    डीआरआईपी नवीन समाधानों एवं प्रौद्योगिकियों को लागू करने के द्वारा इस गंभीर समस्‍या का समाधान करने तथा बांध सुरक्षा मुद्दों पर जागरूकता के प्रचार-प्रसार करने में सफल रही है। चूंकि यह परियोजना केवल पांच प्रतिशत बड़े बांधों एवं 7 राज्‍यों से ही संबंधित है, इसलिए विभिन्‍न राज्‍यों में एक वार्षिक समारोह के रूप में बांध सुरक्षा क्षेत्रों में ज्ञान एवं अनुभव को साझा करने के लिए गैर-डीआरआईपी राज्‍यों के पेशेवर व्‍यक्तियों, शिक्षाविदों, उद्योगों तथा वैश्विक विशेषज्ञों के साथ राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा सम्‍मेलनों (एनडीएससी) का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार के सम्‍मेलन नये बांधों के डिजाइन एवं निर्माण के लिए तकनीकों, उपकरणों, सामग्रियों आदि तथा मौजूदा बांधों के अनुवीक्षण, निगरानी, परिचालन, रख-रखाव एवं पुनर्वास की अवधारणाओं को प्रचारित करेंगे।

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वीके/एसकेजे/वाईबी-457



 

(Release ID 59626)


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