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प्रधानमंत्री कार्यालय28-अप्रैल, 2012 12:32 IST

गुरू गोबिंद सिंह तेल शोधक कारखाना देश को समर्पित करने के अवसर पर आयोजि‍त समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का सम्‍बोधन
> ज़मीं की गोद भरती है तो क़ुदरत भी चहकती है नए पत्तों की आमद से ही

    प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज बठिंडा में गुरू गोबिंद सिंह तेल शोधक कारखाना देश को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का अनूदित पाठ इस प्रकार हैः

 

     "गुरू गोबिंद सिंह तेल शोधक कारखाना देश को समर्पित करने के लिए यहां उपस्थित होकर मुझे बेहद खुशी हो रही हैं। यह तेल शोधक कारखाना पंजाब के लोगों के लंबे समय से देखे जा रहे सपने को साकार करेगा तथा राज्य के आर्थिक विकास में बहुत योगदान देगा। वर्ष 2004 में यह परियोजना शुरू होने से ही हमारी सरकार इसकी प्रगति की नियमित रूप से निगरानी करती रही है तथा मुझे खुशी है कि पंजाब के लोगों के प्रति हमारी लंबे समय से चली रही प्रतिबद्धता आखिरकार पूरी हो गई।

 

        इस परियोजना पर कुल 20,000 करोड़ रुपये की राशि निवेश की गई है। इसकी प्रति वर्ष 9  मिलियन टन तेल शोधन करने की क्षमता है।  मुझे विश्वास है कि यह तेल शोधक कारखाना इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र एक दूसरे की भागीदारी में क्या हासिल कर सकते हैं।

 

        मैं इस बेहद महत्वपूर्ण उपक्रम के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की नव रत्न कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड और श्री लक्ष्मी मित्तल के वैश्विक नेतृत्व में मित्तल इनर्जी इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिटेड के एक साथ आने के लिए प्रशंसा करता हूं।

 

         मैं समझता हूं कि यह परियोजना 42 महीनों के रिकार्ड समय में पूरी कर ली गई है। यह सराहनीय उपलब्धि है। मैं प्रोमोटर्स और आप्रेटिंग टीम को बधाई देता हूं जिन्होंने इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए अथक कार्य किया है। मुझे आशा है कि इस परियोजना ने जो बेंचमार्क स्थापित किए हैं, वे भविष्य में ऐसी परियोजना के लिए उदाहरण के रूप में कार्य करेंगे।

 

         मुझे यह भी बताया गया है कि यह तेल शोधन कारखाना आधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस है। भारत स्टेज 3 और 4 ईंधन उपलब्ध कराने की इसकी क्षमता आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने के समय अपने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उपाय करने की हमारी प्रतिबद्धता को दुहराती है। इस तेल शोधक कारखाने के उत्पादों से देश के उत्तरी क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को पाटने में खासतौर से मदद मिलेगी।

 

        देश में तेल शोधक कारखाने के क्षेत्र में गजब की वृद्धि हुई है तथा भारत तेल शोधन क्षेत्र का केंद्र बनकर उभरा है। 1998 में 62 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता से बढ़कर आज देश की तेल शोधन क्षमता 213 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है, जो करीब साढ़े तीन गुणा वृद्धि को दर्शाती है। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सक्षम होने के लिए हमारे पास पर्याप्त तेल शोधन क्षमता है।

 

        ऊर्जा क्षेत्र में हमारे सामने कठिन चुनौतियां हैं। हमें किफायती कीमतों पर ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति की जरूरत है। कच्चे तेल और गैस के घरेलू स्रोत हमारी तेजी से विस्तार करती अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांग को पूरी करने के लिए अपर्याप्त है हमारी कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब 80 प्रतिशत आयात से पूरा किया जाता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने हमारे आयात बिल पर गंभीर दबाव डाला है। आम आदमी को तेल की बढ़ती कीमतों के असर से बचाने के लिए सरकार को डीजल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतें बाजार भाव से कम रखने के लिए भारी सब्सिडी देनी पड़ती है।

 

          हमें दुर्लभ ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के लिए कदम उठाने की जरूरत है  कि‍सी भी ईंधन का चाहे वह पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल या गैस हो, बर्बादीपूर्ण ढंग से इस्तेमाल स्‍वीकार्य नहीं है। हमें बेहतर प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत है तथा उपभोक्ताओं को ईंधन संरक्षण के फायदों के बारे में जागरूक बनाया जाना चाहिए। हमें कीमतों को तर्कसंगत बनाने के साथ ही यह सुनिश्चित करने की भी जरूरत है कि कीमतों को तार्किक बनाने के इन प्रयासों में गरीबों और जरूरतमंदों के हितों की सुरक्षा हो।

 

        तेल शोधन कारखाने जिन क्षेत्रों में होते हैं वहां वे औद्योगिक वृद्धि और विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करते हैं। मुझे यकीन है कि यह तेल शोधन कारखाना अनेक बड़े उद्योग और मशीनरी इकाइयां स्थापित करने की प्रेरणा देगा तथा बठिंडा में और उसके आसपास टिकाऊ वृद्धि और विकास होगा।

 

        पंजाब हरित क्रांति का ध्वजवाहक रहा है। इस राज्य ने हमारे देश की खाद्य सुरक्षा में बहुत योगदान दिया है। पंजाब के मेहनतकश किसान राष्ट्र को भोजन उपलब्ध कराते हैं। राज्य में खासतौर से  लघु और मझौले क्षेत्रों में औद्योगिक वृद्धि का भी शानदार इतिहास रहा है। पंजाब के प्रायः हर कस्बे और शहर को विशिष्ट औद्योगिक उत्पादों के लिए जाना जाता है जैसे लुधियाना को साइकिलों और होजरी के लिए, बटाला और लुधियाना को मशीन टूल्स के लिए, जालंधर को खेल के सामान के लिए इत्यादि। हालांकि पिछले दो दशकों में पंजाब उद्योग के अनेक क्षेत्रों में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका खो चुका है। आज राज्य को औद्योगीकरण की नई लहर की जरूरत है। राज्य की आर्थिक वृद्धि में योगदान के अलावा ऐसे औद्योगीकरण से पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

  

        हमें पंजाब में ज्यादा दक्ष लोगों की जरूरत है ताकि वे उद्योगों की वृद्धि को दिशा दे सकें। इसके लिए हमें राज्य में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रयासों पर  बहुत बल देना होगा। पंजाब ने सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता का लाभ नहीं उठाया है तथा हमें इस स्थिति को दुरुस्त करने की जरूरत है। हमें पंजाब में बुनियादी ढांaचा भी सुधारने की जरूरत है- बेहतर सड़कें और परिवहन सुविधाएं, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति इत्यादि। जब से केंद्र में हमारी सरकार बनी तब से ही हमने पंजाब के हितों को ध्यान में रखा है तथा यह तेल शोधक कारखाना उस महत्व का एक उदाहरण है जो हमने इस खूबसूरत राज्य की प्रगति को दिया है। मैं आज आपको आश्वासन देता हूं कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कार्य करना जारी रखेंगे कि पंजाब विकास की नई बुलंदियां छुए।

 

        आज जो परियोजना राष्ट्र को समर्पित की गई है ऐसी परियोजनाओं से पंजाब में औद्योगीकरण की प्रक्रिया में मदद मिलेगी। समर्पित मालभाड़ा गलियारा परियोजना के जरिए पंजाब से पूर्वी और पश्चिमी बंदरगाहों तक जल्दी पहुंचना सुगम हो जाएगा। इन और ऐसी ही अन्य परियोजनाओं से पंजाब एक बार फिर उद्योग का केंद्र बन सकता है तथा सदियों से निभाई गई अपनी पारंपरिक भूमिका को फिर से हासिल कर सकता है।

 

        औसत पंजाबी को अपने हृष्ट-पुष्ट स्वास्थ्य और उच्च उत्पादकता के लिए जाना जाता है। हालांकि अब पंजाब में कैंसर के मामले बढ़े हैं। मैं जानता हूं कि राज्य के इस भाग में अनेक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। बाबा फरीद स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय फरीदकोट ने बठिंडा में आधुनिक नैदानिक एवं शोध केंद्र की स्थापना की अनुमति का अनुरोध किया था। तब परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड ने तीन प्रस्तावित केंद्रों में से दो की स्थापना की अनुमति प्रदान की, तीसरे के लिए प्रक्रिया जारी है। हमने राष्ट्रीय मधुमेह कार्डियो-वस्कुलर रोग और आघात एवं कैंसर निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत होशियारपुर एवं मनसा के अतिरिक्त बठिंडा को भी एक जिले के रूप में शामिल किया है।

 

          मैं इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने पर एक बार फिर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय, हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड और श्री लक्ष्मी मित्तल एवं उनकी कंपनी तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एवं उनकी टीम को बधाई देता हूं। मैं इस परियोजना के हर चरण में मदद के लिए राज्य सरकार और पंजाब एवं बठिंडा के लोगों को भी धन्यवाद देता हूं।

 

        इन शब्दों के साथ ही मैं गुरू गोबिंद सिंह तेल शोधन कारखाना राष्ट्र को समर्पित करता हूं। '' 

 

***

मीणा/प्रदीप/इन्‍द्रपाल/बि‍ष्‍ट- 1913

 

(Release ID 15046)


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