Releases Hindi Releases Urdu Releases Photos Invitations Features Hindi Features Accreditation RSS Feedback Subscribe Releases Search Advance Search
Quick Search
home Home
हिंदी विज्ञप्तियां
तिथि माह वर्ष
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
  • भारत-ईयू बीटीआईए वार्ता का एक अन्‍य दौर संपन्‍न  

 
उप राष्ट्रपति सचिवालय16-जुलाई, 2012 14:06 IST

स्‍व. ब्रिगे‍डियर मोहम्‍मद उस्‍मान के जन्‍मशती समारोह में उपराष्‍ट्रपति का संबोधन
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने कहा कि नौशेरा युद्ध के नायक स्‍व. ब्रिगे‍डियर मोहम्‍मद उस्‍मान स्‍वतंत्र भारत के सर्वाधिक प्रेरणादायक सैन्‍य अधिकारियों में से एक हैं। उन्‍होंने सेना की सर्वश्रेष्‍ठ परम्‍पराओं को निभाते हुए असाधारण साहस, कर्तव्‍य के प्रति समर्पण, मात्रभूमि के प्रति प्रेम का प्रदर्शन किया था। उनकी जन्‍म शताब्‍दी के अवसर पर सेना द्वारा आयोजित स्‍व. ब्रिगे‍डियर मोहम्‍मद उस्‍मान जन्‍मशती समारोह में बोलते हुए उन्‍होने कहा कि ब्रिगे. उस्‍मान ने देश के विभाजन के दौरान लोगों के दिल और दिमाग जीत लिये थे। उस समय वे मुल्‍तान के गैरिजन कमांडर के रूप में 50 हजार हिन्‍दू और सिख शरणार्थियों की जिम्‍मेदारी निभा रहे थे। वे हमेशा शां‍त रहते थे और धार्मिक रूप से गांधीजी के सिद्धान्‍तों का अनुपालन करते हुए गांधी जी द्वारा उपहार में दिये गये चरखे पर कातते हुए खुशी का अनुभव करते थे। जब वे वर्दी नहीं पहनते थे, तो गांधी जी की रचनाओं को पढ़ा करते थे।

श्री अंसारी ने कहा कि ब्रिगे. उस्‍मान का समर्पण और प्रतिबद्धता प्रशंसनीय थी। 27 दिसम्‍बर 1947 को जब झांगर का पतन हुआ, तो उन्‍होंने यह शपथ ली थी कि जब तक वे झांगर को पुन: जीत नहीं लेंगे, चारपाई पर नहीं सोएंगे। उन्‍होंने अपने वचन का अनुपालन किया और 1947-48 की सर्दियों के महीने में वे चटाई पर सोए। घमासान युद्ध के बाद जब 50 पैराशूट ब्रिगेड ने 18 मार्च, 1948 को झांगर पर दोबारा जीत हासिल की, तभी उन्‍होंने अपना वचन तोड़ा। इससे पहले उन्‍होंने नौ सेना की रक्षा में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उपराष्‍ट्रपति ने यह आशा व्‍यक्‍त की कि ब्रिगे‍. मोहम्‍मद उस्‍मान के बहादुरी के कारनामे भारतीय सेना को आने वाले वर्षों में प्रेरणा देते रहेंगे। उन्‍होंने लोगों से ब्रिगे. उस्‍मान को हमेशा याद रखने का आह्वान किया, जो 1947-48 में जम्‍मू-कश्‍मीर ऑपरेशन के दौरान श्रेष्‍ठ बलिदान देने वाले वरिष्‍ठ सैनिक अधिकारी थे। एक युद्धनायक के रूप में उनका नाम हमेशा भारत और भारतीय सेना के इतिहास में स्‍वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

मीणा/इन्‍द्रपाल/गीता-3192
(Release ID 16432)


  विज्ञप्ति को कुर्तिदेव फोंट में परिवर्तित करने के लिए यहां क्लिक करें
डिज़ाइन एवं होस्‍ट राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी),सूचना उपलब्‍ध एवं अद्यतन की गई पत्र सूचना कार्यालय
ए खण्‍ड शास्‍त्री भवन, डॉ- राजेंद्र प्रसाद रोड़, नई दिल्‍ली- 110 001 फ़ोन 23389338