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परमाणु ऊर्जा विभाग13-दिसंबर, 2012 17:49 IST

परमाणु उर्जा विनियामक बोर्ड (ए.ई.आर.बी.) का कार्य-निष्‍पादन

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन तथा प्रधान मंत्री कार्यालय में राज्‍य मंत्री श्री वी नारायणसामी ने आज राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि परमाणु उर्जा अधिनियम, 1962 की धारा 30(3) के अनुसार ‘इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम यह उपबंध कर सकते हैं कि नियमों का उल्‍लंघन, इस अधिनियम में जैसा अन्‍यथा अभिव्‍यक्‍त रूप से उपबंधित है उसके सिवाए, जुर्माने से जो 500 रूपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।‘ तथापि, अधिनियम की धारा 24 के अनुसार, धारा 17 के अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्‍लंघन (सुरक्षा के बारे में विशेष उपबंध) कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडनीय होगा। अंत: अधिनियम की धारा 24 में गम्‍भीर उल्‍लंघनों के लिए उपयुक्‍त और न्‍यायपूर्ण दंड के लिए अन्‍यथा अभिव्‍यक्‍त रूप से उपबंध किए गए हैं, जबकि धारा 30(3) के अंतर्गत, मामूली प्रशासनिक चूकों के लिए उपबंध किया गया है। इसको ध्‍यान में रखते हुए, सरकार ने इस जुर्माने को संशोधित करने के बारे में विचार नहीं किया है। परमाणु उर्जा नियामक परिषद को यह शक्ति भी प्राप्‍त है कि, वह अनुपालन न किए जाने की किस्‍म के आधार पर, किसी नाभिकीय तथा विकिरण सुविधा का लाइसेंस रद्द कर सकती है। किसी सुविधा का प्रचालन करने के संबंध में सहमति का वापस लिया जाना अपने आप में एक अत्‍यधिक कठोर आर्थिक शास्ति है और इसमें, लाइसेंसधारी की वित्‍तीय स्थिति पर गम्‍भीर रूप से प्रभाव डालने की क्षमता है। यह सही है कि देश में बहुत बड़ी संख्‍या में नैदानिक एक्‍स-किरण यूनिट/सुविधाएं हैं, और ये सभी यूनिट परमाणु उर्जा नियामक परिषद के विनियामक नियंत्रण के अधीन नहीं है। तथापि, ऐसी सुविधाओं में विकिरण का अंतर्निहित खतरा बहुत कम है। इन सुविधाओं के विनियमन में, परमाणु उर्जा नियामक परिषद की पद्धति, मूलत: उपस्‍कार के डिजाइन में अंतर्निहित सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे यूनिटों के विनिर्माण/बिक्री के दौरान गुणवत्‍ता आश्र्वासन बनाए रखना सुनिश्चित करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं/विनिर्माताओं पर विनियामक नियंत्रण रखा जाता है ताकि, अंतिम उपभोक्‍ताओं के स्‍थान पर उपयोग के दौरान संतोषजनक कार्यनिष्‍पादन किया जा सके। यह पद्धति विश्र्वभर में अपनाई जा रही पद्धति के अनुरूप है।

परमाणु उर्जा नियामक परिषद ने, अपने विनियामक नियंत्रण को सुदृढ़ बनाने के लिए एक आधुनिकतम वेब आधारित सेवा ‘विकिरण अनुप्रयोगों की ई-लाइसेंसिंग (E-LORA) को क्रियान्वित करने के लिए कदम उठाए हैं। परमाणु उर्जा नियामक परिषद ने, अपने पनधारकों के बीच विकिरण संरक्षा के संबंध में जन-जागरूकता पैदा करने के लिए अपने प्रयासों को भी, इलैक्‍ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के माध्‍यम से तेज किया है।

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वि.कासोटि‍या/जुयाल/रामकिशन—6066
(Release ID 19443)


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