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विद्युत मंत्रालय02-जून, 2013 19:11 IST

भारत में विद्युत उत्‍पादन क्षमता
विद्युत उत्‍पादन के लक्ष्‍य वार्षिक आधार पर तय किये जाते हैं। वर्ष 2012-13 के 930 अरब यूनिट के विद्युत उत्‍पादन लक्ष्‍य के मुकाबले 911

विद्युत उत्‍पादन के लक्ष्‍य वार्षिक आधार पर तय किये जाते हैं। वर्ष 2012-13 के 930 अरब यूनिट के विद्युत उत्‍पादन लक्ष्‍य के मुकाबले 911.65 अरब यूनिट का लक्ष्‍य हासिल किया गया, जोकि लक्ष्‍य का 98 प्रतिशत बनता है। 9वीं पंचवर्षीय योजना के शुरूआत से देश में विद्युत कम्‍पनियों में कुल उत्‍पादन और भूटान से आयात निम्‍नलिखित रहा :

 वर्ष                       उत्‍पाद (अरब यूनिट)

2004-05                          587.4

2005-06                          617.5

2006-07                         662.52

2007-08                          704.5

2008-09                          723.8

2009-10                          771.6

2010-11                          811.1

2011-12                          876.9

2012-13                         911.65

 

31 मार्च, 2013 को विद्युत उत्‍पादन केन्‍द्रों की कुल अखिल भारतीय संस्‍थापित क्षमता 2,23,343.60 मेगावाट थी और मांग 1,35,453 मेगावाट थी।

वर्ष 2013-14 में विद्युत उत्‍पादन लक्ष्‍य हासिल करने के लिए सरकार द्वारा निम्‍न लिखित कदम उठाये गए/उठाये जा रहे हैं :

Ø               पुराने विद्युत संयंत्रों का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण

Ø               विद्युत क्षेत्र के लिए कोयला और गैस उपलब्‍ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं।

Ø               केन्‍द्रीय विद्युत राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), सचिव विद्युत मंत्रालय और केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्‍यक्ष के साथ उच्‍चतम स्‍तर पर विद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाती है, ताकि कठिनाई वाले क्षेत्रों की पहचान कर तेजी से समाधान निकालने में मदद दी जा सके। इसका मकसद परियोजनाओं को समय पर चालू करना हैं।

विद्युत क्षेत्र की 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में अनुकूल वृद्धि हुई है। इसने 2012-13 में 3.96 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की। 2012-13 वर्ष में अधिकतम कमी 9 प्रतिशत थी, जबकि 2011-12 में यह 10.6 प्रतिशत थी। उत्‍पादन क्षमता में 88,537 मेगावाट की वृद्धि करने, 8 लाख  20 हजार टन कोयले के आयात, पारेषण और वितरण हानि में कमी के फैसले से उम्‍मीद है कि अधिकतम मांग और अधिकतम आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरा किया जा सकेगा।

योजना आयोग के अनुसार 88,537 मेगावाट की क्षमता वृद्धि 12वीं पंचवर्षीय योजना में अखिल भारतीय स्‍तर पर पारंपरिक स्रोतों से किये जाने की योजना है।

देश में विद्युत की आवश्‍यकता पूरी करने के लिए किये गये उपाय निम्‍नलिखित हैं :

Ø      कार्यरत विद्युत परियोजना में क्षमता वृद्धि पर पूरी निगरानी।

Ø      विद्युत मंत्रालय द्वारा सीईए, उपकरण विनिर्माताओं, राज्‍य की कंपनियों/केन्‍द्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/परियोजना विकासर्ताओं आदि के साथ समीक्षा बैठकें करना, जिससे क्षमता वृद्धि में आ रही बाधाओं को पता लगाकर इनका समाधान निकालना।

Ø      मांग की पूर्ति के लिए क्षमता में वृद्धि की आवश्‍यकता बढ़ते जाने के मद्देनजर संयंत्र के प्रमुख उपकरणों की क्षमता विकसित करने का काम देश में किया गया है। इसके लिए देश में प्रमुख संयंत्र उपकरणों के विनिर्माताओं के साथ कई संयुक्‍त उपक्रम स्‍थापित किये गए हैं।

Ø      विद्युत क्षेत्र के लिए कोयला और गैस की उपलब्‍धता पर जोर।

Ø      नई और नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 12वीं योजना के दौरान इंटर एक्टिव नवीनीकरण क्षमता वृद्धि लगभग 30,000 मेगावाट है।

देश में विद्युत की मांग और पूर्ति के अंतर को कम करने के लिए सरकार ने निम्‍नलिखित कदम उठाए हैं : ‍

Ø      12वीं पंचवर्षीय अवधि (2012-17) के दौरान 88,537 मेगावाट की क्षमता वृद्धि की योजना।

Ø      कार्यरत उत्‍पादन परियोजनाओं में क्षमता वृद्धि पर पूरी निगरानी।

Ø      4,000 मेगावाट की प्रत्‍येक अत्‍याधुनिक विशाल विद्युत परियोजनाओं का विकास।

Ø      संयुक्‍त उपक्रम से विद्युत उपकरणों की स्‍वदेशी विनिर्माण क्षमता में वृद्धि।

Ø      वर्तमान उत्‍पादन क्षमता के अधिकतम उपयोग के लिए जल, ताप, परमाणु और गैस आधारित विद्युत केन्‍द्रों के समन्वित प्रचालन और रख-रखाव पर जोर।

Ø      ताप विद्युत केन्‍द्रों में स्‍वदेशी स्रोतों में कोयले की आपूर्ति में आ रही कमी को पूरा करने के लिए कोयले के आयात पर जोर।

Ø      पुरानी और अकुशल उत्‍पादन इकाईयों के जीवन काल को बढ़ाने के लिए उनका नवीनीकरण और आधुनिकीकरण।

Ø      उपलब्‍ध विद्युत के अधिकतम उपयोग के लिए अंतरराज्‍यीय और अंतरक्षेत्र स्‍तर पर पारेषण क्षमता को मजबूत बनाना।

 

देश में औसत तकनीकी और वाणिज्यिक क्षति (ए टी एंड सी) में 15 प्रतिशत तक कमी लाने और विद्युत वितरण क्षेत्र में सुधार के उद्देश्‍य से भारत सरकार ने जुलाई, 2008 में पुनर्गठित-तीव्र विद्युत सुधार और विकास कार्यक्रम (आर-एपीडीआरपी) लागू किया।  

***

वि. कासोटिया/प्रदीप/सतपाल/सुनील-2596

 

(Release ID 22496)


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