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राष्ट्रपति सचिवालय06-जून, 2013 16:34 IST

अटल बि‍हारी वाजपेयी हि‍न्‍दी वि‍श्‍ववि‍द्यालय की आधारशि‍ला रखे जाने के अवसर पर राष्‍ट्रपति‍श्री प्रणब मुखर्जी का संबोधन

राष्‍ट्रपति‍श्री प्रणब मुखर्जी ने आज भोपाल में अटल बि‍हारी वाजपेयी हि‍न्‍दी वि‍श्‍ववि‍द्यालय की आधारशि‍ला रखी। इस अवसर पर उनके द्वारा कि‍ए गए संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है:-

1. मुझे आज, अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने के लिए, यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। हिंदी माध्यम से शिक्षा की सुविधा प्रदान करने के लिए यह एक अच्छी पहल है। इस शिक्षा संस्थान की स्थापना के लिए मैं, मध्य प्रदेश सरकार को बधाई देता हूं।

2. इस विश्वविद्यालय का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी पर रखा गया है। श्री वाजपेयी एक वरिष्ठ राष्ट्रीय राजनेता, उत्कृष्ट सांसद, प्रखर विद्वान तथा प्रभावशाली चिंतक हैं। उन्होंने बहुत सी यादगार कविताएं लिखी हैं। उनकी रचनाओं ने हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे उम्मीद है कि यह विश्वविद्यालय उनकी महान परिकल्पना तथा उच्च आदर्शों पर चलेगा।

3. सरकार तथा जनता के बीच भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सामाजिक कल्याण तथा विकास के कार्यक्रमों की सफलता भाषा पर निर्भर करती है। इसलिए हमें हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए। हमारे राष्ट्र को जोड़ने में हिंदी का अह्म योगदान है। यह भारत की सामाजिक तथा सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। वर्ष उन्नीस सौ उनचास में हिंदी हमारे देश की राजभाषा बनी। हिंदी भारत और विश्व के अन्य देशों में भी लोकप्रिय हो रही है। विदेशों में कई विश्वविद्यालय इस भाषा को सिखाने के काम कर रहे हैं। आज हमें हिंदी में शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं को सहयोग देने की जरुरत है। मुझे उम्मीद है कि यह विश्वविद्यालय इस कार्य को पूरा करेगा।

4. देवियो और सज्जनो, समाज और राष्ट्र के विकास में शिक्षा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। महिलाओं और बच्चों के प्रति बढ़ते अपराधों को देखते हुए उनकी सुरक्षा और हिफाजत के लिए कदम उठाना जरूरी है। इसके अलावा, हमारे समाज को आत्मचिन्तन करते हुए नैतिकता में हो रहे पतन को भी रोकने की जरूरत है। हमारे विश्वविद्यालयों को नैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक अभियान चलाना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे युवाओं में देश के प्रति प्रेम;दायित्वों का निर्वाह; सभी के प्रति करुणा; भिन्नताओं का सम्मान; महिलाओं और बुजुर्गों का आदर; जीवन में सच्चाई और ईमानदारी; आचरण में अनुशासन तथा कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी की भावना हो।

5. यदि हमारे देश को विकास के अपने रास्ते पर आगे बढ़ना है तो इसके लिए उच्च शिक्षा पर जोर देना होगा। हमने इस ओर अच्छी प्रगति की है क्योंकि हमारे पास छह सौ पचास से ज्यादा उपाधि प्रदान करने वाले संस्थान तथा तैंतीस हजार से अधिक कॉलेज हैं। इस सबके बावजूद, अच्छे संस्थानों की संख्या, मांग के मुकाबले कम है।

6. तेरहवीं शताब्दी तक, अनेक भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया भर में पठन-पाठन के लिए प्रसिद्ध थे। तक्षशिला, नालंदा,विक्रमशिला, वल्लभी, सोमपुरा और ओदान्तपुरी जैसे विश्वविद्यालय भारतीय, फारसी, यूनानी और चीनी सभ्यताओं का संगम स्थल बन गए थे। ये विश्वविद्यालय अपने कुशल प्रबंधन के लिए जाने जाते थे। परंतु आज के सर्वोत्तम दो सौ अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में भारत का कोई स्थान नहीं है। इस स्थिति को सुधारना होगा।

7. देवियो और सज्जनो, दो हजार दस से बीस तक के दशक को नवान्वेषण का दशक घोषित किया गया है। इसे जनसाधारण के लिए उपयोगी बनाने के लिए हमें तकनीकी और व्यावसायिक मार्गदर्शन देना होगा। इसमें विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी। पिछले महीने, मुझे उत्तर प्रदेश और असम के दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इन्नोवेशन क्लबों के उद्घाटन का अवसर मिला। मैंने विश्वविद्यालयों में आयोजित प्रदर्शनियों को भी देखा। मुझे अपने युवाओं की प्रतिभा को देखकर बहुत खुशी हुई। मैं इस विश्वविद्यालय से आग्रह करता हूं कि वह अपने यहां भी नवान्वेषण संस्कृति शुरू करने के लिए पहल करे।

8. मुझे बताया गया है कि यह विश्वविद्यालय तकनीकी, चिकित्सा, कला और वाणिज्य से जुड़े विषयों की शिक्षा प्रदान करेगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में, उच्च शिक्षा को गति प्रदान करेगा। इस विश्वविद्यालय की छवि इसके विद्यार्थियों पर निर्भर होगी। मैं इस विश्वविद्यालय की स्थापना में सहयोग देने वाले सभी लोगों को बधाई देता हूं और उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद,

जय हिंद!

1. वि. कासोटिया/अरुण/मनीषा-2660
(Release ID 22566)


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