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रक्षा मंत्रालय26-जून, 2014 16:40 IST

नौसेना का विस्तार एवं भावी विकास मुख्य रुप से आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण तकनीक पर केंद्रित रहेगा- एडमिरल आर. के. धोवन

नौसेना कमांडरों का दिवार्षिक सम्मेलन 24-26 जून 2014 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री अरूण जेटली ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया और भारतीय नौसेना के चहुमुंखी कार्य निष्पादन के लिए इसकी प्रशंसा की।

इस सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ नौसेना कमांडरों ने परिचालन संबंधी तैयारियों, समुद्रतटीय सुरक्षा, रखरखाव नीति, प्लेटफार्म की लड़ाकू निपुणता, बुनियादी ढांचा विकास और विदेशी सहयोग पहल जैसे अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।

एडमिरल आर के धोवन ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कमांडरों के प्रथम सम्मेलन में नौसेना के शीर्षस्थ अधिकारियों को संबोधित किया। नौसेना अध्यक्ष ने तीन अंत:संबद्ध प्राथमिकताओँ अर्थात सतत सामरिक तत्परता, भविष्य के लिए क्षमता का निर्माण तथा मानव संसाधनगत चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

नौसेना अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि बेडे की सामरिक तैयारी और अन्य संचालन प्रतिस्थापनाओं का बहुत महत्व है और नौसेना का एक शक्तिशाली, बहुआयामी सेना के रुप में सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की आवश्यकता है। विक्रमादित्य के इंटेग्रल लडाकू विमानों के साथ शामिल होने से नौसेना की क्षमताओं में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंन इस बात पर जोर दिया कि निकट भविष्य में कोलकाता (पी 15-ए विध्वंसक) और (कमोरटा पी-28 एएसडब्लयू फ्रीगेट) के नियोजित समावेश से नौसेना की सतह क्षमता में कई गुणा वृद्धि होने वाली है।

सीएनएस ने नौसेना में पी-8 आईएलआरएमआर हवाई जहाज, एएलएच स्कैवड्रन के शुरु होने और एजेटी हवाई जहाज शामिल किए जाने से उड्ड्यन शाखा की परिसंपत्तियों में भारी वृद्धि पर संतोष जाहिर किया। आगामी एलसीए नौसेना परियोजना पर भी विचार विमर्श हुआ। पुराने हो रहे पनडुब्बी बेडे, बेडे में इंटेग्रल हैलीकॉप्टरों की कमी और माइन काउंटर मेज़र वैसल्स (एनसीएमवी) की आवश्यकता पर भी विचार विमर्श हुआ।

श्री धोवन ने नौसेना के आत्मनिर्भरता कार्यक्रम का जिक्र किया तथा प्लेटफार्म, हथियारों, सेंसरों और उपकरणों का सार्वजनिक के साथ-साथ निजी क्षेत्रों के माध्यम से स्वदेशीकरण किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भता और स्वदेशीकरण के मामले में नौसेना का विस्तार और विकास जारी रखने के लिए रोड मैप महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन में तटीय सुरक्षा निर्माण की समीक्षा में एफआइसी, आइसीबी और एनसी-3 आई परियोजना शुरु करने से तटीय सुरक्षा उपकरणों की मजबूती में हुए विकास पर संतोष व्यक्त करते हुए सक्रिय तालमेल के माध्यम से तटीय सुरक्षा जिम्मेदारियों की ओर जागरुकता बरतने और उचित ध्यान देने की आवश्यकता बताई गयी।

हमारी विदेशी सहयोग पहल और नियोजनों में काफी बढोतरी हो रही है और पिछले प्रयासों से विभिन्न रुपों में लाभ मिला है। सम्मेलन के दौरान सीएनएस ने चल रही विभिन्न ढांचागत परियोजनाओं में हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि ये क्षमता निर्माण में भारी योगदान देंगी। सतत हरित प्रौद्यौगिकी, रि-साइकलिंग और अपशिष्ट प्रबंधन अपनाए जाने की आवश्यकता है ताकि अपने देश के ऊर्जा लक्ष्यों के अनुपालन में बेसों के कार्बन फुट प्रिंट कम किए जा सकें।

भारतीय नौसेना को आवंटित संसाधनों के उपयोग पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि पुर्जों, उपकरणों और मशीनरी की खरीददारी में लागत जागरुकता के अनुपालन द्वारा प्रत्येक रुपये का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।

मानव संसाधन विकास और प्रबंधन पर ध्यान देते हुए बताया गया कि पुरुष और महिलाएं हमारी सबसे बडी परिसंपत्तियां हैं और उनका मनोबल और उनकी भलाई पर सदैव ध्यान दिया जाना चाहिए। कैरियर के सभी चरणों में जीवन की उच्च गुणवत्ता उपलब्ध कराने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करके अच्छी मानव शक्ति को आकर्षित किए जाने की आवश्यकता है।

नौसेना मानव संसाधनों के बडे घटक नागरिक कर्मचारियों के योगदान की तारीफ करते हुए उन्होंने दुरुस्त, प्रभावी और प्रसन्न नेवी बनाने के अपने दृष्टिकोण को दोहराया। सम्मेलन में नौसेना कमांडरों के लिए रक्षा मंत्रालयों के अधिकारियों और सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह, एयर चीफ मार्शल अरुप राहा जैसे सर्विस प्रमुखों से बातचीत करने का अवसर उपलब्ध रहना इसकी विशेषता थी।

सम्मेलन में भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों उनकी व्यवसायिकता, देशभक्ति और राष्ट्र द्वारा सामने आ रही समुद्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में नौसेना और उनकी तैयारी की प्रशंसा की गई। उन्होंने नौसेना को अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए मिलजुलकर पतवार चलाने की आवश्यकता बताई।

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वि. कासोटिया/एएम/एसके/आईपीएस/एएस-2136
(Release ID 28484)


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