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रक्षा मंत्रालय16-अगस्त, 2014 18:50 IST

प्रधानमंत्री ने ‘आईएनएस कोलकाता’ भारतीय नौसेना को सौंपा

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मुंबई स्थित नौसेना गोदी में आयोजित एक रंगारंग समारोह के दौरान ‘आईएनएस कोलकाता’ भारतीय नौसेना को सौंप दिया। आईएनएस कोलकाता देश में डिजाइन किए गए और निर्मित कोलकाता-श्रेणी के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों में अग्रणी है, जिनका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक लिमिटेड ने किया है। प्रधानमंत्री के आगमन पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. के. धवन ने उनकी अगवानी की और युद्धपोत के जलावतरण समारोह से पहले उन्हें 100 व्यक्तियों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया जिसमें भारतीय नौसेना की परंपराओं को अपनाया गया। इस मौके पर अऩेक हस्तियां मौजूद थीं जिनमें महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री के. शंकरनारायणन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री पृथ्वीराज चव्हाण, रक्षा मंत्री श्री अरुण जेटली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत कुमार डोभाल, सांसद श्री अरविन्द सावंत व श्रीमती पूनम महाजन, रक्षा सचिव श्री आर. के. माथुर, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमाडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल अनिल चोपड़ा और मझगांव डॉक्स लिमिटेड के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल आर. के. श्रावत (अवकाश प्राप्त) शामिल थे।

इस यादगार मौके पर एडमिरल आर. के. धवन ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया और नौसेना की ओर से आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि आईएनएस कोलकाता का जलावतरण नौसेना के आत्मनिर्भरता कार्यक्रम में मील का पत्थर है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के जरिए प्लेटफार्मों, हथियारों, संवेदकों और उपकरणों के स्वदेशीकरण पर आगे भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। उन्होंने बल देते हुए कहा कि नौसेना के विस्तार और विकास का खाका आगे भी आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण पर ही आधारित होगा।

परियोजना 15ए कोलकाता श्रेणी विध्वंसक प्रसिद्ध परियोजना 15 ‘दिल्ली’ के अनुवर्ती है जिन्हें नब्बे के दशक के अंत में सेवा में शामिल किया गया था। भारतीय नौसेना के नौसैनिक डिजाइन निदेशालय ने इन पोतों की परिकल्पना और डिजाइनिंग की है। इन पोतों का नामकरण भारत के प्रमुख बंदरगाह शहरों जैसे कोलकाता, कोच्चि और चेन्नई के नाम पर किया गया है। आईएनएस कोलकाता की नींव 26 सितंबर, 2003 को रखी गई थी और पोत का 30 मार्च, 2006 को जलावतरण हुआ था। इसे भारत में अब तक तैयार किया गया सर्वाधिक ताकतवर युद्धपोत माना जाता है। इस जानदार पोत की लंबाई 164 मीटर और चौड़ाई तकरीबन 18 मीटर है। इसकी पूर्ण भार विस्थापन क्षमता 7400 टन है। इस पोत में संयुक्त गैस और गैस (सीओजीएजी) प्रणोदन प्रणाली लगी हुई है, जिसमें चार शक्तिशाली रिवर्सिबल गैस टर्बाइन लगी हुई हैं और यह 30 नॉट से भी ज्यादा गति हासिल कर सकता है। चार गैस टर्बाइन जनरेटरों और एक डीजल आल्टरनेटर से इस पोत को बिजली सुलभ होती है। ये सभी मिलकर 4.5 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं जो एक छोटे शहर को रोशन करने में सक्षम है। इस पोत पर 30 अधिकारी और 300 नाविक तैनात किए जा सकते हैं।

आईएनएस कोलकाता में रडार से बच निकलने की नई डिजाइन अवधारणा अमल में लाई गई है। इस युद्धपोत में कई चीजें पहली बार शामिल की गई हैं जिनमें बेहद बड़ा स्वदेश निर्मित प्रतिरोधक अवयव भी शामिल है। यह पोत अत्यंत उत्कृष्ट अत्याधुनिक हथियारों और संवेदकों से लैस है, जिनमें लंबी दूरी तक भूमि से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआरएसएएम) एवं एमएफ-स्टार बहु-गतिशील चरण वाला ऐरे रडार भी शामिल हैं। यह पोत उन्नत सुपरसोनिक और लंबी दूरी तक भूमि से भूमि तक मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल से भी लैस है, जो भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है। स्वदेश निर्मित 76 एमएम सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) और एके 630 सीआईडब्ल्यूएस हवा और भूमि पर मौजूद लक्ष्यों पर निशाना साध सकते हैं। समस्त पनडुब्बी-रोधी हथियार और इसमें लगे संवेदक सेट समुद्र में जंग लड़ने के लिए स्वदेश में किए गए प्रयासों के अनुपम उदाहरण हैं, जिनमें स्वदेश निर्मित रॉकेट लांचर (आईआरएल), स्वदेश निर्मित ट्वीन-ट्यूब टॉरपीडो लांचर (आईटीटीएल) और नई पीढ़ी के एचयूएमएसए सोनार शामिल हैं। संवेदक सूट में अन्य उन्नत भूतल एवं वायु सर्विलांस रडार और स्वदेश निर्मित इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। एक अत्याधुनिक काम्बेट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस-15ए) को इस पोत में लगे हथियारों और संवेदकों से एकीकृत किया गया है। इस पोत में दो सीकिंग या चेतक हेलिकॉप्टरों का परिचालन करने की सुविधा है।

इस पोत को सही अर्थों में ‘नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स’ श्रेणी में रखा जा सकता है क्योंकि यह उत्कृष्ट डिजिटल नेटवर्क्स जैसे एटीएम आधारित एकीकृत पोत आंकड़ा नेटवर्क (एआईएसडीएन), सहायक नियंत्रण प्रणाली (एसीएस), स्वचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली (एपीएमएस) और प्रतिरोधक प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) से लैस है। एआईएसडीएन एक सूचना हाईवे है जिसमें सभी संवेदकों और हथियारों से जुड़े आंकड़े संजोए जाते हैं। जहां एक ओर सुदूर नियंत्रण और मशीनों की निगरानी एसीएस के जरिए की जाती है, वहीं दूसरी ओर जटिल ऊर्जा आपूर्ति प्रबंधन को एपीएमएस के जरिए अंजाम दिया जाता है। सीएमएस का इस्तेमाल खुद के आंकड़ा स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं को एकीकृत करने और अन्य प्लेटफार्मों से मिलने वाली सूचनाओं से सामंजस्य बिठाने में किया जाता है, ताकि समुद्र संबंधी सतर्कता सुनिश्चित की जा सके। इसमें स्वदेश निर्मित डाटा-लिंक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण इस पोत की खासियत है क्योंकि इसमें लगी ज्यादातर प्रणालियां स्वदेश निर्मित ही हैं। इससे भविष्य में बनने वाले पोतों के लिए अच्छा विक्रेता आधार सृजित हुआ है। आईएनएस कोलकाता में जो प्रमुख स्वदेश निर्मित उपकरण/प्रणालियां लगी हुई हैं उनमें सीएमएस, एसीएस, एपीएमएस, फोल्डेबल हैंगर डोर, हेलो ट्रैवर्सिंग सिस्टम और एचयूएमएसए एनर्जी प्रणाली प्रमुख हैं। आईएनएस कोलकाता की एक अन्य खासियत है कि यह नाविकगण के लिए अत्यंत आरामदेह है।

इस पोत का नामकरण भारत की सांस्कृतिक राजधानी एवं बंगाल की राजधानी कोलकाता के नाम पर किया गया है, जिसे ‘द सिटी ऑफ ज्वॉय़’ कहा जाता है। इस पोत के ऊपरी हिस्से में ‘हावड़ा ब्रिज’ पृष्ठभूमि में नजर आता है, जबकि नीली एवं श्वेत समुद्री तरंगों पर उछाल भरता ‘बंगाल टाइगर’ सामने के हिस्से में नजर आता है। ये दोनों ही कोलकाता शहर के प्रतीक हैं। पोत के नाविकगण इसके ऊपरी हिस्से में संस्कृत भाषा में लिखे ‘युद्ध सर्वसन्नध’ का पालन करते हैं जिसका मतलब है ‘सदा जंग के लिए तैयार रहो’।

कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन तरुण सोबती ने इस पोत की जिदंगी में पहली बार ‘कलर्स’ (राष्ट्रीय झंडा और समुद्री प्रतीक) को फहराने से पहले कमीशनिंग वारंट पढ़ा। जलावतरण के बाद आईएनएस कोलकाता को पश्चिमी समुद्री कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के परिचालनात्मक एवं प्रशासकीय नियंत्रण में रखा जाएगा। इस पोत में लगी प्रणालियों का समुद्र में कुछ अन्य परीक्षण पूरे हो जाने के बाद आईएनएस कोलकाता को पश्चिमी बेड़े में शामिल कर दिया जाएगा और उसके बाद उसे मुबंई के लिए रवाना किया जाएगा।

विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/एएम/आरआरएस/आरएसके-3214
(Release ID 29734)


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