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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय26-सितम्बर, 2014 20:18 IST

सीएसआईआर का 72वां स्‍थापना दिवस मनाया गया

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्‍कार 2014, सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार 2014 और स्‍कूली बच्‍चों के लिए सीएसआईआर नवाचार पुरस्‍कार 2013 प्रदान किए

कहा, भारत के युवा वैज्ञानिक सर्वाधिक भरोसेमंद, सर्वश्रेष्‍ठ साक्षात उदाहरण और सही अर्थों में ‘मेक इन इंडिया’ विजन की कुंजी हैं

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का 72वां स्‍थापना दिवस आज यहां सीएसआईआर-राष्‍ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) परिसर में मनाया गया। सीएसआईआर के 72वें स्‍थापना दिवस पर युवा वैज्ञानिक एवं नवाचार पुरस्‍कार के विजेताओं को संबोधित करते हुए विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), अंतरिक्ष विभाग और पीएमओ में एमओएस डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के युवा वैज्ञानिक सर्वाधिक भरोसेमंद, सर्वश्रेष्‍ठ साक्षात उदाहरण और सही अर्थों में ‘मेक इन इंडिया’ विजन की कुंजी हैं। ‘मेक इन इंडिया’ लक्ष्‍य को पाने की दिशा में ये वैज्ञानिक ही सर्वाधिक विकास सक्षम एवं संसाधन से भरपूर, भविष्‍य के लिए हमारा विश्‍वास तथा 21वीं सदी के लिए निर्णायक हैं।

युवा वैज्ञानिकों को युवा भारत का युवा राजदूत करार देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर भारत को वास्‍तव में अगले कुछ वर्षों में वैश्‍विक सुपर पावर बनने का लक्ष्‍य पाना है तो ठोस एवं संतुलित वैज्ञानिक नींव पर ही यह सपना साकार किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में किसी भी देश की आर्थिक ताकत का निर्धारण भी उसकी वैज्ञानिक ताकत एवं क्षमता के आधार पर ही किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिक्षकों एवं अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतियोगिता परीक्षाओं की दौड़ में शामिल होने से पहले स्‍कूली स्‍तर पर ही अभिनव दिमाग वाले युवाओं को वैज्ञानिक खोज की दिशा में उन्‍मुख कर देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि अगर हम अभिनव खोज की क्षमता रखने वाले युवाओं की पहचान करने एवं उन्‍हें इसके लिए तैयार करने में समर्थ हो जाते हैं, तो हम न केवल सर्वश्रेष्‍ठ प्रतिभाओं के बल पर वैज्ञानिक शोध को समृद्ध कर पाएंगे, बल्‍कि हम अपने युवाओं को उनके लिए सर्वाधिक उपयुक्‍त क्षेत्रों में कार्यरत भी कर सकेंगे। इस संदर्भ में उन्‍होंने मद्रास विश्‍वविद्यालय के कुलपति एवं विश्‍व स्‍तर पर जाने-माने स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ सर डॉ. लक्ष्‍मणस्‍वामी मुद्लियर का उदाहरण दिया। उनके बारे में बताया जाता है कि उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय के एक सर्वोत्‍तम छात्र को स्‍त्रीरोग विज्ञान के क्षेत्र में आने से इसलिए रोक दिया था क्‍योंकि उसकी अंगुलियां एवं हाथ ऑपरेशन इत्‍यादि करने के लिए उपयुक्‍त नहीं थे। इसके बजाय उस छात्र को उन्‍होंने विज्ञान की उस शाखा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जिसमें उसे महारथ हासिल थी।

पिछले कुछ महीनों में सीएसआईआर द्वारा हासिल की गई उपलब्‍धियों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उनके मंत्रालय ने सरकारी क्षेत्र में कार्यरत 5000 से ज्‍यादा वैज्ञानिकों के लिए स्‍कूलों एवं कॉलेजों में व्‍याख्‍यान देना अनिवार्य करने का फैसला किया है। इसके अलावा युवा महिला वैज्ञानिकों के लिए नई योजनाएं शुरू की गई हैं ताकि परिवारिक अथवा किसी अन्‍य कारण से उन्‍हें करियर के मध्‍य में ही इसे छोड़ना न पड़े। सीएसआईआर की गिनती आज विश्‍व भर के उसके जैसे 2740 संस्‍थानों में 81वें स्‍थान पर होती है।

सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार 2014 जैविक विज्ञान, रसायन विज्ञान, पृथ्‍वी, वायुमंडल, समुद्र और ग्रह विज्ञान, इंजीनियरिंग विज्ञान और भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में दिए गए।

2014 के लिए जैविक विज्ञान पुरस्‍कार लखनऊ स्‍थित सीएसआईआर-केंद्रीय दवा अनुसंधान संस्‍थान के राजेंद्र सिंह को एल्‍डोस रिडक्‍टेस की भूमिका समझने में योगदान के लिए दिया गया है, क्‍योंकि इससे गर्भनिरोध के लिए अनोखे अणुओें के विकास में मदद मिल सकती है।

2014 के लिए अन्‍य जैविक विज्ञान पुरस्‍कार दिल्‍ली स्‍थित सीएसआईआर जीनोमिक्‍स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी इंस्‍टीट्यूट के डॉ. विवेक टी. नटराजन को त्‍वचा जीव विज्ञान में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है। उनके इस योगदान से भावी इलाज में मदद मिल सकती है।

सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार 2014 से जम्‍मू स्‍थित सीएसआईआर-इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन के डॉ. परविन्‍दर पाल सिंह को नवाजा गया है। उन्‍हें यह पुरस्‍कार आयरन आधारित सी-एच क्रियाशील पद्धति के विकास के लिए दिया गया है।

सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार 2014 कराईकुदी स्‍थित सीएसआईआर-केंद्रीय विद्युत रसायन शोध संस्‍थान के डॉ. वी. गणेश को इलेक्‍ट्रोकैटेलिस्‍ट इत्‍यादि के क्षेत्र में इलेक्‍ट्रॉन ट्रांसपोर्ट के मॉड्यूलेशन में अहम योगदान के लिए दिया गया है।

पृथ्‍वी, वायुमंडल, समुद्र एवं ग्रह संबंधी विज्ञान पुरस्‍कार 2014 नई दिल्‍ली स्‍थित सीएसआईआर-राष्‍ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के डॉ. सुमित कुमार मिश्रा को वायुमंडल में मौजूद धूल कणों की प्रकाश संबंधी खासियतों के क्षेत्र में मौलिक योगदान के लिए दिया गया है। उन्‍होंने रेडिएटिव फोर्सिंग इफेक्‍ट का आकलन किया है जिससे वायुमंडल में बदलाव के आकलन पर पड़ने वाले असर को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

इंजीनियरिंग विज्ञान पुरस्‍कार 2014 भोपाल स्‍थित सीएसआईआर-एडवान्‍स्ड मैटेरियल्‍स एंड प्रोसेसेस रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के डॉ. मनमोहन दास गोयल को ब्‍लास्‍ट रोधी ढांचे से जुड़े शोध में मौलिक योगदान के लिए दिया गया है।

भौतिक विज्ञान पुरस्‍कार (यंत्रीकरण समेत) 2014 से बंगलुरू स्‍थित सीएसआईआर-राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला के श्री एन. सेल्‍वनकुमार को नवाजा गया है। उन्‍हें सोलर सेलेक्‍टिव कोटिंग तैयार करने में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए यह पुरस्‍कार दिया गया है।

सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार 2014 नई दिल्‍ली स्‍थित सीएसआईआर-राष्‍ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के डॉ. वेद वरुण अग्रवाल को कोलेस्‍ट्रॉल एवं खाद्य पदार्थों में निहित हानिकारक तत्‍वों की पहचान के वास्‍ते बायोसेंसर के विकास के लिए दिया गया है।

हर पुरस्‍कार के तहत एक प्रमाण पत्र, 50000 रुपए का नकद पुरस्‍कार और एक पट्टिका दी जाती है। सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार के तहत पांच वर्षों के लिए पांच लाख रुपए का अनुसंधान अनुदान भी हर साल दिया जाता है।

वर्ष 2013 तक 163 वैज्ञानिकों को सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कार मिले हैं, जिनमें 21 महिला वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इनमें से 16 वैज्ञानिक प्रतिष्‍ठित शांति स्‍वरूप भटनागर पुरस्‍कार से नवाजे गए हैं। वर्ष 2014 के लिए एक सलाहकार समिति ने सीएसआईआर युवा वैज्ञानिक पुरस्‍कारों के लिए आठ वैज्ञानिकों के नामों की सिफारिश की।

इस पुरस्‍कार की शुरुआत वर्ष 2004 में प्रोफेसर जी. एन. रामचंद्रन की याद में हुई थी, जो प्रोटीन रसायन शास्‍त्र में अग्रणी के साथ-साथ भारत में संरचनात्‍मक जीव विज्ञान के संस्‍थापक जनक भी थे।

वर्ष 2014 के लिए इंजीनियरिंग समेत भौतिक विज्ञान के वास्‍ते सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्‍कार की श्रेणी में इससे हैदराबाद स्‍थित सीएसआईआर-भारतीय रसायन तकनीक संस्‍थान को नवाजा गया है। गर्भपात में उपयोगी दवा माइसोप्रोस्‍टॉल की प्रक्रिया विकसित करने के लिए उसे यह पुरस्‍कार दिया गया है।

नवाचार के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्‍कार 2014 देहरादून स्‍थित सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्‍थान को दिया गया है। एफसीसी गैसोलीन से जुड़े ‘सी6’ से अमेरिकी श्रेणी वाले गैसोलीन और उच्‍च शुद्धता वाले बेंजीन का एक साथ उत्‍पादन करने की प्रक्रिया विकसित करने के लिए उसे यह पुरस्‍कार दिया गया है।

सीएसआईआर- माइक्रोबियल प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएमटीईसीएच), चंडीगढ़ को अपने ज्ञान के व्यापार और बाजारों के महत्वपूर्ण विस्तार के लिए व्यापार विकास और प्रौद्योगिकी विपणन हेतु वर्ष 2014 का सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार दिया गया।

सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर को निम्न दर्जे वाले खनिज अवक्षेपों को लाभकारी बनाने के लिए कॉलम फ्लोटेशन प्रौद्योगिकी के विकास और वाणिज्यीकरण के लिए पंचवर्षीय योजना अवधि का सबसे महत्वपूर्ण सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार 2014 प्रदान किया गया।

सीएसआईआर के खोज पुरस्कारों की श्रेणी में वर्ष 2013 के लिए कोई प्रथम पुरस्कार नहीं दिया गया।

इस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार (50,000 रुपये) बोंगाबाड़ी गर्ल्स हाईस्कूल, पुरूलिया, पश्चिम बंगाल की दसवीं की छात्रा सुश्री देवाद्रिता मंडल को उनकी खोज “आम लोगों के लिए सस्ता घरेलू स्वस्थ पेय-होमलिक्स” के लिए दिया गया। इस खोज के माध्यम से कुपोषण से पीड़ित गरीब बच्चों के लिए स्वस्थ पेय के उत्पादन पर जोर दिया गया है।

कार्मेल कॉनवेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भेल, भोपाल के दसवीं और ग्यारहवीं की छात्राओं- एस सुष्मिता, सुश्री नंदना वार्ष्नेय, सुश्री स्वस्तिका पालित और सुश्री तनुश्री दुबे को उनकी उल्लेखनीय खोज “कृषि में स्वपोषित कीट प्रबंधन” के लिए पुरस्कृत किया गया। यह खोज कीटों के लिए पराबैंगनी-ब्लैकलाइट के माध्यम से दृष्टि संवेदना पर आधारित एक यांत्रिक संजाल तैयार करके समन्वित कीट प्रबंधन के इस्तेमाल से पौधा संरक्षण के लिए एक आत्मनिर्भर कीट प्रबंधन से संबंधित है। इस प्रणाली के संचालन के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। यह संजाल उपयोग के अनुकूल, किफायती और खेतों में इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक है।

तीसरा पुरस्कार (30,000 रुपये) श्रीमती दुर्गादेवी चौधरी विवेकानंदन विद्यालय शक्तिवेल नगर, कोलातुर, चैन्नई के नौवीं कक्षा के छात्र मास्टर एस. विशाल और द हिन्दू हायर सेकेंडरी स्कूल, चट्टीराम स्ट्रीट वाटराप, तमिलनाडु के ग्यारहवीं कक्षा के छात्र मास्टर एम. टैनिथ आदित्य को दिया गया।

मास्टर एस. विशाल की खोज - “लघु उद्योगों और सड़क किनारे की कार्यशालाओं के लिए सम्पूर्ण प्रदूषण नियंत्रण उपकरण” थी। इस खोज के माध्यम से उद्योगों से उत्सर्जित प्रदूषित वायु को शुद्ध करने पर जोर दिया गया है। इसके द्वारा एक उपकरण उपलब्ध कराया गया है, जो कार्बन जल और सामान्य एलम जैसी उपलब्ध सामग्रियों के इस्तेमाल से छोटे, काफी छोटे और सड़क किनारे बनी कार्यशालाओं आदि के लिए सरल, किफायती और सर्वाधिक उपयुक्त है।

मास्टर एम. टैनिथ आदित्य की खोज-“केले के पत्ते की संरक्षण प्रक्रिया” थी। इस खोज के द्वारा केले के पत्ते को लगभग एक वर्ष के लिए संरक्षित किया जाता है। जिसमें किसी प्रकार के रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता और इसके टिकाऊपन, तन्यता, तापमान को सहन करने की क्षमता में इतनी वृद्धि भी हो पाई है जितना किसी भी पत्ते की नहीं है। इसके साथ ही केले के पत्ते से बनी प्लेटों को तैयार करने में आसानी हुई है। यह शतप्रतिशत पर्यावरण अनुकूल है। इस प्रक्रिया में पत्ते को पांच मिनट तक ठंडे जल में भिगोया जाता है, फिर नियंत्रित तरीके से गर्म किया जाता है। इस प्रकार से प्राप्त पत्ते काफी मजबूत हो जाते हैं और इनमें वजन सहन करने की आश्चर्यजनक क्षमता पाई जाती है।

चौथा पुरस्कार (20,000 रुपये), श्री गुरू हरिकिशन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की नौवीं कक्षा की छात्रा सुश्री सृष्टि अस्थाना, पद्म सेशाद्री बाल भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल नूंगाम्बक्कर, चैन्नई के दसवीं कक्षा के छात्र मास्टर राहुल जीएस और मास्टर राघव आनंद और विंध्यांचल अकादमी, देवास, मध्य प्रदेश के दसवीं कक्षा के छात्र मास्टर यश शर्मा को दिया गया।

सृष्टि अस्थाना की खोज-“जिंक-आक्साइड के सूक्ष्मकणों के इस्तेमाल से अपशिष्ट जल में डिटर्जेंट का फोटो कैटेलिटिक मिनरलाइजेशन” थी। यह खोज अपशिष्ट जल के एक नये हरित विकल्प के रूप में दृश्य और सौर प्रकाश के इस्तेमाल से डिटर्जेंट का सूक्ष्म जिंक-आक्साइड की मदद से फोटो कैटेलिटिक डिग्रेशन दर्शाती है। जबकि मास्टर राहुल जीएस और मास्टर राघव आनंद की खोज का शीर्षक- “ऊर्जा संरक्षण के लिए सचल फॉल्स शीलिंग” था। उनकी खोज एसी के द्वारा बिजली के उपभोग में कमी लाने पर जोर देती है, जो मोटे तौर पर प्रतिवर्ष लगभग 1 ट्रिलियन केडब्ल्यूएच बिजली का उपभोग करता है। यह खोज शयनकक्षों में सचल फाल्स शीलिंग के निर्माण से संबंधित है।

यश शर्मा की खोज- “पौधे के आसपास गीली मिट्टी से जल की कमी की रोकथाम” थी।

पांचवां पुरस्कार (10,000 रुपये) दो उदीयमान वैज्ञानिकों- दिल्ली पब्लिक स्कूल आरकेपुरम के 12वीं कक्षा के छात्र मास्टर आकांक्षित खुल्लर को “रीडर फॉर एक्टिविज्म इन कंजरवेशन इलेक्ट्रीसिटी” के लिए और केन्द्रीय विद्यालय नंबर-2, सदरास, कलपक्कम, तमिलनाडु की आठवीं कक्षा की छात्रा सुश्री जननी आरजी को “धूलकण मुक्त स्वस्थ डस्टर” नामक खोज के लिए दिया गया।

इस अवसर पर प्रख्यात वैज्ञानिक और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव प्रो. के विजय राघवन ने न्यूरोबायोलॉजी पर स्थापना दिवस व्याख्या दिया, जबकि सीएसआईआर के महानिदेशक प्रो. पी.एस.आहुजा ने स्वागत भाषण देते हुए सीएसआईआर की हाल की गतिविधियों का लेखाजोखा पेश किया।

विजयलक्ष्मी कासोटिया/एएम/एसकेएस/आरआरएस/एसकेपी/डीसी– 3952
(Release ID 30573)


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