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विद्युत मंत्रालय08-अक्टूबर, 2014 12:14 IST

प्रकाश क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को प्रोत्‍साहित करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने अनेक कदम उठाए

ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) और ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा एलईडी (एलईडी) बल्‍ब खरीदने के लिए बिजनेस मॉडल का विकास

प्रकाश उत्‍सर्जक डायोड (एलईडी) प्रकाश के सबसे ऊर्जा दक्ष स्रोत के रूप में उभर रहा है। एलईडी बल्‍ब एक सामान्‍य बल्‍ब के मुकाबले 1/10 भाग तथा कॉम्‍पेक्‍ट फ्लोरिसेंट लैंप (सीएफएल) की तुलना में आधी ऊर्जा की खपत से इसके बराबर ही प्रकाश देता है। लेकिन मुख्‍य समस्‍या यह है कि इसकी कीमत बहुत अधिक है। पहला एलईडी लैंप 2010 में बनाया गया था और 1200 रूपये में बेचा गया था।

ऊर्जा मंत्रालय के अधीन ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) ने एलईडी की ऊर्जा बचत की संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए क्रमबद्ध प्रक्रिया शुरू की और जल्‍द से जल्‍द बड़े पैमाने पर इनका उत्‍पादन करने के लिए कदम उठाये। इसने प्रकाश उद्योग के सहयोग से एलईडी लैंपों की गुणवत्‍ता और विश्‍वसनीयता सुनिश्चित करने, शुरूआत में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक खरीदारी और उसके बाद लेबलिंग कार्यक्रम के माध्‍यम से एलईडी लैंपो के मूल्‍य घटाने और इस प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा उत्‍सर्जित प्रकाश के बारे में जागरूकता और तकनीक के जरिए इसके प्रदर्शन के लिए एक रोड़ मैप तैयार किया गया। बीईई ने एलईडी बल्‍बों और एलईडी स्‍ट्रीट लाइट की मांग बढ़ाने के लिए सभी राज्‍यों को प्रकाश व्‍यवस्‍था की गुणवत्‍ता और इस प्रौद्योगिकी द्वारा ऊर्जा बचत की प्रदर्शन परियोजनाएं स्‍थापित करने के लिए वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराई। एलईडी बल्‍बों की मांग को बढ़ाने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने यह निर्णय लिया कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को लगभग 3.4 मिलियन विद्युत कनेक्‍शन देते समय एलईडी प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए ये बल्‍ब उपलब्‍ध कराए जाएं। अनेक विद्युत वितरण कंपनियों ने भी अपने उपभोक्‍ताओं को उचित मूल्‍य पर एलईडी बल्‍बों की सप्‍लाई करने के लिए इन बल्‍बों के निर्माताओं के साथ अनुबंध किए हैं।

सभी प्रकाश निर्माताओं ने देश में एलईडी आधारित प्रकाश प्रणाली के लिए विनिर्माण सुविधाएं तैयार की हैं और प्रकाश इंजीनियरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा इस प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन के लिए विभिन्‍न भवनों में कार्यक्रम शुरू किए हैं। बीईई ने ईईएसएल (ऊर्जा दक्षता सेवाएं लिमिटेड, चार केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम क्षेत्र की कंपनियों का संयुक्‍त उपक्रम) के साथ मिलकर बिजनेस मॉडल विकसित करने के लिए विद्युत कंपनियों के साथ कार्य किया है। जिसके तहत ईईएसएल भारी मात्रा में एलईडी बल्‍बों की खरीदारी करके लोगों को दस रूपये में बेचता है जबकि इसका बाजार मूल्‍य चार सौ रूपये है। विद्युत वितरण कंपनियां ऊर्जा दक्ष प्रकाश प्रौद्योगिकी के उपयोग से हुई अपनी बचत से पांच से आठ वर्षों की अवधि में ईईएसएल को इस राशि का भुगतान करती हैं। ईईएसएल ने पहले ही वर्तमान स्‍ट्रीट लाइटों को ऊर्जा दक्ष एलईडी स्‍ट्रीट लाइटों में बदलने की अनेक परियोजनाएं पूरी कर ली हैं। इसके साथ –साथ पुद्दुचेरी में 7.5 लाख एलईडी बल्‍ब बदलने की परियोजना भी पूरी हो गई है। इसके परिणामस्‍वरूप वारंटी समेत एलईडी बल्‍बों की कीमत 400 रूपये से घटकर 310 रूपये हो गई है।

इस साल अगस्‍त में ईईएसएल और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर हुए। इसके बाद ईईएसएल ने पिछले सप्‍ताह बीस लाख एलईडी बल्‍बों की खरीदारी पूरी की। आयोजित बोली में पूरे प्रकाश उद्योग ने भाग लिया और सबसे कम उद्धृत मूल्‍य 204 रूपये प्रति एलईडी बल्‍ब था। पुद्दुचेरी एलईडी मूल्‍य से यह लगभग 35 प्रतिशत और वर्ष के शुरूआती मूल्‍य से यह लगभग 50 प्रतिशत कम है। मांग के एकत्रीकरण के परिणामस्‍वरूप मूल्‍य में आई गिरावट उन्‍नत एलईडी प्रौद्योगिकी से युक्‍त प्रकाश क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को प्रोत्‍साहित करने के लिए अच्‍छा संकेत है। 204 रूपये के मूल्‍य पर एलईडी सीएफएल से केवल 30-40 प्रतिशत ही महंगा है। जबकि सीएफएल की तुलना में एलईडी 50 प्रतिशत अधिक ऊर्जा की बचत करता है और इसमें पारे का उपयोग भी नहीं होता जबकि सीएफएल में होता है। इसके अलावा एलईडी का जीवनकाल सीएफएल के मुकाबले 4-5 गुणा अधिक है। इस प्रकार जीवनकाल लागत के आधार पर यह सीएफएल से सस्‍ता है। घरेलू क्षेत्र में एलईडी के उपयोग में मुख्‍य अवरोध मानकीकरण और जागरूकता की कमी है। बीईई, एलईडी की मांग को बढ़ाने के लिए पहुंच और जागरूकता अभियान के साथ-साथ एक लेबलिंग कार्यक्रम शुरू करेगा। आईसीएल और सीएफएल की वर्तमान मांग 1.1 बिलियन यूनिट प्रतिवर्ष से अधिक है। घरेलू मांग में बढ़ोतरी से एलईडी बल्‍बों की कीमत में कमी आयेगी और देश में इसके भारी उत्‍पादन की क्षमताओं में भी बढ़ोतरी होगी। मानकीकरण और जागरूकता पैदा होने से जनता द्वारा इसकी भारी खरीदारी की जायेगी जिससे मांग में वृद्धि होगी और त्‍वरित तरीके से इसके मूल्‍यों में गिरावट आयेगी।

विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/एएम/आईपीएस/एसके –4103
(Release ID 30750)


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