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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय13-मार्च, 2015 13:03 IST

राष्‍ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे का प्रेस नोट

कुछ मीडिया ने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे से देश में एच1एन1 वायरस के कारण फैल रहे इन्फ्लुएंजा में संभावित परिवर्तन के बारे में जानकारी मांगी है।

सेल होस्ट एंड माइक्रोब के 17वें संस्‍करण के 11 मार्च, 2015 को इलसिवियर कंपनी के ''इन्फ्लुएंजा निगरानी: 2014-2015 एच1एन1 स्‍वाइन भारत में उत्‍पन्न इन्फ्लुएंजा वायरस'' नामक प्रकाशन (पृष्‍ठ 279-282) में उद्धृत किया गया।

हमारे विशेषज्ञों ने सजगता से उपर्युक्त प्रकाशन में उल्‍लेखित निष्कर्षों की जांच की है। हमने पाया है कि प्रकाशन में जिस विकृति का विश्लेषण किया गया, वह एनआईवी में उपलब्‍ध एच1एन1 वायरस ए/भारत/6427/2014 की उत्‍पत्ति के आंकड़ों में इस प्रकार के परिवर्तन थे। सीडीसी/डब्‍ल्‍युएचओ द्वारा एच1एन1 वायरस के प्रतिरोधकता/आनुवंशिक/प्रतिजनी विश्लेषण पर बाद की रिपोर्ट जो एनआईवी को दी गई उसमें भी ओसेल्‍टामिवीर प्रतिरोध या एचए जीन्‍स में कोई अन्‍य आनुवंशिकी परिवर्तन, जो विषाक्‍त हो सकता है, के बारे में नही बताया गया। यह वायरस ए/उत्तरी केरोलिना/04-2014 के समान था। वर्तमान 2015 के एच1एन1 वायरस के एचए जीन के आनुवांशिक विश्लेषण में भी उपरोक्‍त प्रकाशन में वर्णित ऐसे किसी परिवर्तन के बारे में नही दर्शाया गया है।

इसके अलावा, 2014 की रिपोर्ट में उल्लेख किये गये विकार का 2015 के वर्तमान संक्रमण से कोई संबंध नही है। हाल ही में एनआईवी ने छह पूर्ण जीनोम का विश्‍लेषण किया है। उसमें भी इस प्रकार के परिवर्तन के बारे में कुछ नही कहा गया है।

यह प्रेस विज्ञप्ति इसलिये जारी की गई है, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सकें और वे उपरोक्‍त प्रकाशन में छापे गये गलत निष्‍कर्षों से भ्रमित न हो।

विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/एएम/एमके/जीआरएस- 1276
(Release ID 34436)


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