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परमाणु ऊर्जा विभाग16-जनवरी, 2016 20:02 IST

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिल्ली में ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पावर’ का किया उद्घाटन

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई-1 जल्द होगी चालू और इकाई-2 इस साल मार्च तक तक हो जाएगी शुरूः डॉ. जितेंद्र सिंह
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार) के विकास, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पावर’ का उद्घाटन किया। यह उत्तर भारत का पहला स्थायी प्रदर्शनी केंद्र है। इसका निर्माण राजधानी में किया गया है, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र (एनएससी) में आम जनता के लिए खोला जा रहा है।

हॉल का उद्घाटन करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज न सिर्फ परमाणु ऊर्जा विकास के लिहाज से बल्कि पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि डीएई उन कुछ विभागों में से एक जिनका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी में नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी कुछ ऐतिहासिक वजह हैं, मुख्य रूप से भारत के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र मुंबई रहा है, जहां स्वर्गीय डॉ. होमी भाभा का घर भी था और देश का पहला परमाणु अनुसंधान केंद्र भी यहीं स्थापित किया गया था। यही विरोधाभास था कि इस प्रौद्योगिकी में दुनिया के अन्य राष्ट्रों से आगे होने के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में इसकी पर्याप्त दृश्यता मौजूद नहीं थी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई दिल्ली में ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पावर’ की स्थापना के साथ हम बीते 60 साल के दौरान परमाणु कार्यक्रम की उपलब्धियों को देश की राजधानी में प्रदर्शित करने में संभव होंगे, बल्कि यह डॉ. होमी भाभा के लिए भी असली श्रद्धांजलि होगी, जिनका विजन और इरादा भारत का परमाणु कार्यक्रम शांति के लिए समर्पित होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा जरूरतें बढ़ने के साथ परमाणु ऊर्जा सस्ती दरों पर ऊर्जा हासिल करने का बड़ा स्रोत होगी, जिससे देश भर के हर क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेशनल पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (एनपीसीआईएल) की सराहना की, जिसने इस परियोजना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मानव संसाधन और विकास मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय को लिखेंगे, जिससे स्कूल, कॉलेज और युवा समूहों के नई दिल्ली के शैक्षणिक और मनोरंजन यात्राओं में ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पावर’, नई दिल्ली के भ्रमण कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे युवा वैज्ञानिक मष्तिष्क विकसित करने और प्रेरित करने में मदद मिलेगी, जो डॉ. होमी भाभा का भी मिशन था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में कई मिथक बाधा बने हैं, जिससे संयंत्रों की स्थापना में देरी हुई है। हालांकि ऐसे चिकित्सा संबंधी प्रमाण नहीं मिले, जिससे साबित हो कि परमाणु संयंत्र स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सभी मिथकों पर स्पष्टता लाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की इकाई-1 को प्राकृतिक प्रक्रियाओं के चलते बंद कर दिया गया था और यह जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुडनकुलम संयंत्र का इकाई 2 भी इस साल मार्च तक चालू हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को विज्ञान की अच्छी समझ है और उनसे हमें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती है।

डॉ. शेखर बसु, चेयरमैन, परमाणु ऊर्जा आयोग और सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग ने कहा कि यह अपनी तरह का पहला भवन है। कार्यक्रम में आए बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि वे हमारे देश का भविष्य हैं और उन्हें आने वारे वर्षों में परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर रिएक्टरों से निकलने वाले विकिरण की तुलना में हमें प्रकृति से ज्यादा न्यूक्लियर विकरण मिलता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के पूरे होने के बाद देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता 13,500 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु ऊर्जा का गैर ऊर्जा इस्तेमाल दवा, कृषि, खाद्य परिरक्षण, कचरा शोधन, जल शुद्धिकरण और उद्योग में भी बड़ी मात्रा में होता है।

न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक श्री कैलाश चंद्र पुरोहित ने कहा कि सुरक्षा को सबसे ज्यादा तरजीह दी गई है। इसके लिए जन जागरूकता बेहद अहम है और इस दिशा में काम किया जा रहा है।

नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) के महानिदेशक श्री जी. एस रौतेला ने कहा कि विज्ञान में कम्युनिकेशन मेथडोलॉजी बेहद अहम है, क्योंकि विज्ञान को सरल और आकर्षक बनाना खासा मुश्किल काम है। हॉल ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी संवादात्मक और दिलचस्प है, जो बच्चों को खासा आकर्षित कर रहा है।

यह उत्तर भारत का अपनी तरह का पहला केंद्र है। इस प्रकार की गैलरियां नेहरू विज्ञान केंद्र, मुंबई और तमिलनाडु विज्ञान और प्रौद्योगिकी विज्ञान केंद्र, चेन्नई में भी बनाई गई हैं। यह गैलरी एनएससी, दिल्ली के स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान राष्ट्र को समर्पित की गई है।

इस गैलरी को एनसीएसएम की एक इकाई एनएससी, दिल्ली में 2.5 करोड़ रुपए बनाया गया है। इसे एनपीसीआईएल के साथ तकनीक और वित्तीय भागीदारी के माध्यम से बनाया गया है।

इस अवसर पर एनपीसीआईएल के निदेशक श्री एन. नागाइच और राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली के निदेशक श्री डी. रामा शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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मोहित/किशोर- 359
(Release ID 44360)


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