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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय25-जनवरी, 2016 18:25 IST

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन 121 देशों का ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय और अंतर सरकारी संगठन होगा जिसका मुख्यालय भारत में होगा और जिसका रणनीतिक भागीदार संयुक्त राष्ट्र होगा

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति श्री फ्रांस्वा ओलांद ने संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मुख्यालय की आधारशिला रखी और राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान, ग्वालपहाड़ी, गुड़गांव में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अंतरिम सचिवालय का शुभारंभ किया।

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान कैंपस के अंदर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन मुख्यालय के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित की है और अगले पांच सालों में मुलाकात के खर्चों के लिए 175 करोड़ रूपये का सहयोग दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन प्रधानमंत्री के स्वच्छ और सस्ती उर्जा प्रदान करने की दृष्टि का हिस्सा है जो सबकी पहुंच में हो और जो सतत विश्व का निर्माण करे। यह विकास की गति को बढ़ाने और सौर उर्जा के विस्तार की एक नयी शुरूआत होगी ताकि वर्तमान और भविष्य की वैश्विक उर्जा पहुंच और उर्जा सुरक्षा को हासिल किया जा सके।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय और अंतर सरकारी संगठन होगा जिसका मुख्यालय भारत में होगा। अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन सौर उर्जा के प्रचार के प्रति सन्नध होगा ताकि सभी 121 सदस्य देशों में सौर उर्जा को एक मूल्यवान, भरोसेमंद और स्वच्छ एवं हरी उर्जा के रूप में स्थापित किया जा सके। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को बनाने में लगातार सहायता और सहयोग के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति को धन्यवाद ज्ञापित किया।

भारत की सराहना करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति श्री फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि पेरिस सम्मेलन में, भारत ने यह दिखाया कि यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए ऊर्जा संक्रमण हेतु पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता को धन्यवाद, जिसकी वजह से हम एक महात्वाकांक्षी, ईमानदार औऱ गतिशील सहमति पेरिस में हासिल कर सके जो कि पूरी मानवता के लिए बाध्यकारी है। उन्होने कहा कि पेरिस समझौते को लागू कराने में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहेगी। श्री ओलांद ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि फ्रांस भारत के साथ पेरिस समझौते के बाद की दुनिया का निर्माण करना चाहता है और अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन इस के लिए मार्ग प्रशस्त कह रहा है। इस संगठन को फ्रांस का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होने घोषणा की कि फ्रांस विकास एजेंसी अगले पांच सालों में सौर उर्जा के विकास के लिए परियोजना के शुरूआती वित्तपोषण के लिए €300 मिलियन आवंटित करेगी।

सम्मानित अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन को वास्तविक से एक विधि सम्मत संस्था में बदलाव के लिए एक अंतरिम प्रशासनिक सेल को कार्यशील बना दिया गया है। इसके साथ उन्होने यह भी बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन के लिए एक समग्र निधि के लिए सहयोग करने के साथ ही भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन के सदस्य देशों के लिए राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान में प्रशिक्षण सहयोग की पेशकश भी की है। श्री गोयल ने यह भी बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन का अंतरिम सचिवालय राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान के सूर्य भवन में कार्यशील हो गया है। उन्होने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन का मुख्यालय राष्ट्रीय सौर उर्जा संस्थान में स्थापित होने और दोनो के बीच जीवंत संबंध बनने से दोनो ही संस्थानों को बहुत ही फायदा होगा।

इस अवसर पर भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) ईसा ने कोष निधि के लिए प्रत्येक ने $ 1 मिलियन अमेरिकी डालर के योगदान की घोषणा की।

अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन की कल्पना एक विशेष मंच के रूप में की गई है और इसका आम लक्ष्य इसके सदस्य देशों में सौर ऊर्जा और सौर उपकरणों के प्रयोग को बढ़ाने की दिशा में योगदान देना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर पेरिस घोषणा प्रतिस्पर्धी सौर पीढ़ी, वित्तीय साधनों की तत्काल तैनाती के लिए वित्त और प्रौद्योगिकी की लागत को कम करने के लिए नए और ठोस प्रयास शुरू करने के लिए सामूहिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा है जो बताता है सस्ती सौर ऊर्जा की भारी तैनाती के लिए 2030 तक 1000 अरब अमरीकी डॉलर से अधिक धन निवेश की जरूरत है ताकि भविष्य सौर पीढ़ी, भंडारण और देशों की 'व्यक्तिगत जरूरतों के लिए अच्छी प्रौद्योगिकियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल, फ्रांस सरकार और संयुक्त अरब अमीरात की सरकार के कई मंत्री इस अवसर पर उपस्थित थे। नई दिल्ली स्थित 60 से अधिक निवासी राजनयिक मिशनों से प्रतिनिधि; अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, भारतीय उद्योगों और व्यापार, मीडिया के प्रतिनिधियों की एक बड़ी संख्या; और हरियाणा के किसान इस मौके पर उपस्थित थे।

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एके/वाईबी- 533
(Release ID 45541)


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