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  • मंत्रिमंडल ने भारत के संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत राजस्थान के संबंध में अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा को स्वीकृति दी  
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  • मंत्रिमंडल ने 2018-19 मौसम के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी  
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  • गृह मंत्रालय
  • पूर्वोत्तर में भूकंप रोधी कृत्रिम अभ्‍यास का आयोजन  
  • केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री हंसराज गंगाराम अहीर ने वाम चरमपंथ वाले इलाकों में मोबाइल संयोजकता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की  
  • केन्‍द्रीय गृह मंत्री कल गांधीनगर में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 23वीं बैठक की अध्‍यक्षता करेंगे  
  • नीति आयोग
  • नीति आयोग ‘अटल न्यू इंडिया चैलेंज’ के लिए आवेदनों की शुरुआत करेगा  
  • महिला और बाल विकास मंत्रालय
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  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय
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  • रक्षा मंत्रालय
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  • पश्चिमी वायु कमान के कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल सी हरि कुमार ने वायु सेना केन्द्र पटियाला का निरीक्षण किया  
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  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
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ग्रामीण विकास मंत्रालय21-अप्रैल, 2017 20:37 IST

एक करोड़ मनरेगा परिसंपत्तियां भू-चिन्हित (जिओटैग्‍ड)

महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम ने आज एक करोड़ परिसंपत्तियों को भू-चिन्हित करते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की और उन्‍हें लोगों के अवलोकनार्थ उजागर किया।

मनरेगा के अंतर्ग‍त सृजित परिसंपत्तियों का आकार अत्‍यन्‍त विशाल हो चुका है। वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक करीब 2.82 करोड़ रुपये मूल्य की परिसंपत्तियां सृजित की जा चुकी हैं।

इसके अंतर्गत हर वर्ष औसतन करीब 30 लाख परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है, जिनमें अनेक कार्य शामिल होते हैं, जैसे जल संरक्षण ढांचों का निर्माण, वृक्षारोपण, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का सृजन, बाढ़ नियंत्रण के उपाय, स्‍थायी आजीविका के लिए व्‍यक्तिगत परिसंपत्तियों का निर्माण, सामुदायिक ढांचा और ऐसी ही अन्‍य परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। मनरेगा परिसं‍पत्तियों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने की प्रक्रिया जारी है और इस कार्यक्रम के अंतर्गत सृजित सभी परिसंपत्तियां जिआ-टैग की जाएंगी। राष्‍ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों, विशेष रूप से जल संबंधी कार्यों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित किया जा रहा है।

जिआ-मनरेगा ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक बेजोड़ प्रयास है, जिसे राष्‍ट्रीय दूर संवेदी केन्‍द्र (एनआरएससी), इसरो और राष्‍ट्रीय सुचना विज्ञान केन्‍द्र के सहयोग से अंजाम दिया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 24 जून 2016 को एनआरएससी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। इसके अंतर्गत प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों को जिओ-टैग किया जाना है। इस समझौते के फलस्‍वरूप राष्‍ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्‍थान की सहायता से देशभर में 2.76 लाख कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उम्‍मीद की जा रही है कि भू-चिन्हित करने की प्रकिया से फीड स्‍तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

वि.कासोटिया/आरएसबी
(Release ID 60549)


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