विज्ञप्तियां उर्दू विज्ञप्तियां फोटो निमंत्रण लेख प्रत्यायन फीडबैक विज्ञप्तियां मंगाएं Search उन्नत खोज
RSS RSS
Quick Search
home Home
Releases Urdu Releases Photos Invitations Features Accreditation Feedback Subscribe Releases Advance Search
विज्ञप्तियां
माह वर्ष
  • कैबिनेट ने जीएसटी व्यवस्था के तहत जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में अवस्थित पात्र औद्योगिक इकाइयों के लिए बजटीय सहायता योजना को मंजूरी दी (16-अगस्त,2017)
  • कैबिनेट ने पोर्ट ब्‍लेयर स्थित अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह वन एवं बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने को स्‍वीकृति दी (16-अगस्त,2017)
  • कैबिनेट ने रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया एवं क्रियाविधि को मंजूरी दी (16-अगस्त,2017)
  • केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने तिरूवनंतपुरम-कन्‍याकुमारी के बीच रेल लाइन के विद्ययुतीकरण सहित दोहरीकरण परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी (02-अगस्त,2017)
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मदुरै-वांची और मनियाछी –तूतीकोरिन रेल मार्गों का विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण करने को मंजूरी दी (02-अगस्त,2017)
  • कैबिनेट ने वांची-मनियाछी-नागरकोइल वाया तिरुनेलवेलि रेल लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का अनुमोदन किया (02-अगस्त,2017)
 
आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए)

कैबिनेट ने पोर्ट ब्‍लेयर स्थित अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह वन एवं बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने को स्‍वीकृति दी

      प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने केंद्र सरकार के एक उपक्रम पोर्ट ब्‍लेयर स्थित अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह वन एवं बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने और समस्‍त कर्मचारियों की देनदारियों की अदायगी को मंजूरी दे दी है।

      उपर्युक्‍त उपक्रम को बंद कर देने से भारत सरकार की ओर से एएनआईएफपीडीसीएल को मिलने वाले अनुत्‍पादक ऋणों को बंद करने में मदद मिलेगी तथा इससे परिसं‍पत्तियों का और ज्‍यादा उत्‍पादक इस्‍तेमाल करना संभव हो पाएगा।

      इच्‍छुक कर्मचारियों को स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस)/स्‍वैच्छिक पृथक्करण योजना (वीएसएस) पैकेज की पेशकश करके और वीआरएस/वीएसएस को न अपनाने वाले कर्मचारियों की छंटनी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत करके इस उद्देश्‍य की पूर्ति की जाएगी, जिसमें अन्‍य देनदारियों, यदि कोई हो, का निपटान करना भी शामिल है।

      वर्तमान में इस निगम में 836 कर्मचारी कार्यरत हैं।

      इसमें धनराशि डालकर निम्‍नलिखित तरीके से इसे बंद किया जाएगा:-

  • 2007 के अनुमानित वेतनमान पर कार्यरत समस्‍त कर्मचारियों की वीएसएस के वित्‍त पोषण और अन्‍य देनदारियों की अदायगी के लिए भारत सरकार की ओर से बजटीय सहायता के जरिए 125.72 करोड़ रुपये की राशि डाली जाएगी।
  • निगम को बंद करने के बाद 31 मार्च, 2017 को देय ब्‍याज पर रोक लगाने के साथ-साथ एएनआईएफपीडीसीएल को भारत सरकार की ओर से दिए गए 186.83 करोड़ रुपये के ऋणों और 185.18 करोड़ रुपये के अर्जित ब्‍याज को बट्टे खाते में डालना।
  • मेटल स्‍क्रैप ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी लिमि‍टेड) के जरिए एएनआईएफपीडीसीएल की चल परिसंपत्तियों (संयंत्र एवं मशीनरी, विद्युत उपकरण, वाहन एवं कार्यालय उपकरण, फर्नीचर एवं फिक्सचर, हाथी एवं पशुधन, बागान एवं अन्‍य तैयार माल इत्‍यादि) की नीलामी करना।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीजी) एनबीसीसी लिमिटेड के जरिए एएनआईएफपीडीसीए की अचल परिसंपत्तियों अर्थात भूमि और/अथवा भवनों का हस्‍तांतरण/बिक्री करेगा।      

 

पृष्ठभूमिः

 

      भारत सरकार के एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एएनआईएफपीडीसीएल की स्थापना इस द्वीप समूह में वानिकी संबंधी बागानों के विकास एवं प्रबंधन के उद्देश्य के साथ वर्ष 1977 में हुई थी। एएनआईएफपीडीसीएल तीन मुख्य परियोजनाओं यथा वानिकी परियोजना, रेड ऑयल पाम (आरओपी) और कटछल रबर परियोजना (केआरपी) का संचालन करता रहा है। वानिकी परिचालन इस निगम की मुख्य गतिविधियों में शामिल थे और इसने कुल राजस्व में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान दिया। उच्चतम न्यायालय द्वारा 10 अक्टूबर, 2001 और 7 मई, 2002 को सुनाए गए फैसले के मद्देनजर वानिकी गतिविधियों पर रोक लगाए जाने के कारण एएनआईएफपीडीसीएल वर्ष 2001 से ही घाटे वाले उद्यम में तब्दील हो गया है। इसके परिणामस्वरूप एएनआईएफपीडीसीएल अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हो गया। निगम के कर्मचारियों को वेतन वितरण के साथ-साथ वैधानिक भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने ब्याज वाले ऋण के रूप में एएनआईएफपीडीसीएल को वित्तीय सहायता मुहैया कराई।

      पिछले 15 वर्षों के दौरान विभिन्न समितियां गठित की गईं और मंत्रालय द्वारा समय-समय पर प्रोफेशनल एजेंसियों की सेवाएं ली गईं और उन्होंने कर्मचारियों की उचित संख्या तय करने सहित उन सभी संभावनाओं पर व्यापक दृष्टि से गौर किया है जिनका उपयोग वन निगम के पुनरुद्धार के लिए किया जा सकता है। इन निर्णयों के आधार पर कई प्रस्तावों पर गौर किया गया, लेकिन इनमें से कोई भी प्रस्ताव कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद व्यापक रूप से विचार-विमर्श करने के बाद भारत सरकार ने इस निगम को बंद करने का निर्णय लिया।

 

 ***

 

एकेटी/वीके/आरआरएस/एसके/डीके-3411

 

 

 

डिज़ाइन एवं होस्‍ट राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी),सूचना उपलब्‍ध एवं अद्यतन की गई पत्र सूचना कार्यालय
ए खण्‍ड शास्‍त्री भवन, डॉ- राजेंद्र प्रसाद रोड़, नई दिल्‍ली- 110 001 फ़ोन 23389338