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  • कैबिनेट ने 11 सीपीएसई को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने को मंजूरी दी (12-अप्रैल,2017)
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2017-18 के सीजन के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी (12-अप्रैल,2017)
  • कैबिनेट ने अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली परियोजना के कार्यान्वयन के विस्तार को एक साल तक मंजूरी दी (05-अप्रैल,2017)
 
आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2017-18 के सीजन के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के क्रम में 2017-18 के सीजन के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने को मंजूरी दे दी है।

सीसीईए ने 2017-18 के सीजन के लिए एमएसपी को बढ़ाकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। यह पिछले साल की तुलना में 300 रुपये (9.4 प्रतिशत) अधिक है। पिछले तीन वर्ष (2015-16, 2016-17 और 2017-18) के दौरान सरकार ने जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 2700 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये किया है। कुल मिलाकर यह वृद्धि 29 प्रतिशत है। वहीं इससे पूर्व के तीन वर्ष (2012-13, 2013-14 और 2014-15) के दौरान एमएसपी 2200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी। यह वृद्धि 9.1 प्रतिशत थी।

जूट मुख्य रूप से पैकेजिंग उद्योग के लिए कच्चे माल की तरह इस्तेमाल होता है। एमएसपी में वृद्धि से जूट उद्योग को लाभ होगा, जिससे लगभग 40 लाख किसान परिवारों की आजीविका में मदद होगी। इससे संगठित मिलों और तृतीयक क्षेत्रों तथा उनसे संबंधित गतिविधियों समेत इनकी प्रत्यक्ष इकाइयों में काम करने वाले 3.7 लाख कामगारों को सीधे रोजगार मिलेगा। जूट किसान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में पाए जाते हैं, जो देश में इनकी संख्या और उत्पादन का 95 प्रतिशत है।

जेआरओ-204, जेबीओ-2003, जेआरएस-517, जेआरसी-532 और जेआरओ-2407 जैसी जूट की नई किस्मों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम)-वाणिज्यिक फसलों के तहत बीज उत्पादन के लिए सहायता प्रदान करके बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड ने जूट का उत्पादन करने वाले राज्यों में जूट के बीजों को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया है।

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