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  • मंत्रिमंडल ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना को मंजूरी दी (28-दिसंबर,2016)
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजपुरा-बठिंडा रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी (21-दिसंबर,2016)
  • मंत्रिमंडल ने वर्ष 2016-17 के लिए फास्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों को मंजूरी दी (07-दिसंबर,2016)
 
आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए)

मंत्रिमंडल ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजनाको मंजूरी दी है ताकि सुरक्षा के लिहाज से सबसे अधिक एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में ग्रामीण सड़क संपर्क को सुधारा जा सके।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत इस परियोजना को 44 सबसे अधिक एलब्ल्यूई प्रभावित जिलों और सुरक्षा एवं संचार के लिहाज से महत्वपूर्ण आसपास के जिलों में आवश्यक पुलियों और जल निकासी संरचनाओं के साथ कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए लागू किया जाएगा। ये सड़कें सभी मौसम परिस्थितियों की परवाह किए बगैर सालभर परिचालन में रहेंगी।

 

इस परियोजना के तहत उपरोक्त जिलों में 11,724.53 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 5,411.81 किलोमीटर सड़क का निर्माण/उन्नयन और 126 पुलियों/क्रॉस ड्रेनेज कार्य किए जाएंगे। एलडब्ल्यूई सड़क परियोजना के लिए रकम साझेदारी का पैटर्न पीएमजीएसवाई की ही तरह होगा यानी आठ पूर्वोत्तर और तीन हिमालयी राज्यों (जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड) को छोड़कर अन्य सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है। वित्त मंत्रालय इस परियोजना के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय को कार्यान्वयन अवधि 2016-17 से 2019-20 के दौरान 7,034.72 करोड़ रुपये का आवंटन करेगा।

 

ग्रामीण विकास मंत्रालय इस परियोजना के लिए प्रायोजक मंत्रालय के साथ-साथ कार्यान्वयन मंत्रालय भी होगा। इस परियोजना की संभावित कार्यान्वयन अवधि 2016-17 से 2019-20 तक चार वर्ष होगी।

 

एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजनाकी परिकल्पना वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के लिए की गई है। इसके तहत देश में 90 प्रतिशत एलब्ल्यूई हिंसा के लिए जिम्मेदार वामपंथी उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित 35 जिले और गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सड़कों/जिलों की सूची एवं सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा के लिहाज से गंभीर 9 समीपवर्ती जिले शामिल हैं। इस योजना में उन सड़कों को शामिल किया गया है जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर मानी गई हैं। इसमें जिले की अन्य सड़कों (ओडीआर), ग्रामीण सड़कों (वीआर) और उन्नयन के लिए मौजूदा जिले की प्रमुख सड़कों (एमडीआर) को शामिल किया गया है। इन सड़कों पर 100 मीटर तक लंबे उन पुलों के लिए भी वित्तपोषण किया जाएगा जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे।

 

पीएमजीएसवाई दिशानिर्देशों के तहत एमडीआर के निर्माण/उन्नयन की अनुमति नहीं है। लेकिन एलडब्ल्यूई क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एमडीआर को विशेष छूट के तहत इस परियोजना में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग इस परियोजना से बारह होंगे। इस योजना के तहत जिन सड़कों का निर्माण किया जाएगा उनकी पहचान गृह मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद की जाएगी।

 

पृष्ठभूमिः

 

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में दूरदराज के सभी पात्र बस्तियों को हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना के रूप में 25 दिसंबर 2000 को शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत मैदानी क्षेत्रों में 500 लोगों से अधिक की आबादी (2001 की जनगणना के अनुसार) और विशेष श्रेणी के राज्यों में 250 लोगों से अधिक की आबादी (2001 की जनगणना के अनुसार) वाली सभी बस्तियों को सड़क संपर्क से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। विशेष श्रेणी के राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा आदिवासी (अनुसूची-5) क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों (रेगिस्तान विकाय कार्यक्रम के तहत पहचान किए गए) और पिछड़े जिलों (गृह मंत्रालय/योजना आयोग द्वारा पहचान किए गए) को भी इसमें शामिल किया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए 100 या इससे अधिक लोगों की आबादी (2001 की जनगणना के अनुसार) वाले सबसे गहन एकीकृत कार्ययोजना (आईएपी) ब्लॉकों को भी पीएमजीएसवाई के तहत पात्र माना गया है।

 

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